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कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान बंगलोर से चले मृत मजदूर की एक माह बाद हुई पहचान

Janjwar Desk
12 Jun 2020 3:30 AM GMT
कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान बंगलोर से चले मृत मजदूर की एक माह बाद हुई पहचान
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परिजन मृतक की 21 दिनों तक बाट जोहते रहे कि वह कहीं क्वारंटीन सेंटर में होगा तो छूटने के बाद वापस घर जरूर आएगा लेकिन होनी के आगे किसी की नही चलती। मांझी थाना पर पहुंचे परिजन मृतक के कपड़े व मोबाइल में उसका फोटो देखते ही फफक कर रोने लगे।

जनज्वार ब्यूरो, पटना। कोरोना काल में हुए लॉकडाउन के दौरान घर वापस जाने की कोशिश में न जाने कितने मजदूरों की विभिन्न हादसों में असमय मौत हो गई। इसी क्रम में बिहार के सारण जिले में गुरुवार 11 जून को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सबको भावुक तो कर ही दिया। साथ ही यह भी सामने ला दिया कि कितने लोग-कितने परिवार किस तरह से तबाह-बर्बाद हो गए हैं। इस विपत्ति से ऐसे परिवार कभी उबर पाएंगे भी या नहीं, कुछ कहा नहीं जा सकता।

सारण जिला के मांझी स्थित एक बागीचे में लगभग एक माह पूर्व गत 15 मई को एक मजदूर की मृत्यु हो गई थी। मांझी के दुर्गापुर गांव स्थित एक बगीचे में गिर कर अचानक उस अज्ञात ब्यक्ति की मौत हुई थी। मृतक की जेब से कोई ऐसा कागजात नहीं मिला था जिससे उसकी पहचान की जा सके। लिहाजा थोड़े इंतजार के बाद उसकी अंतिम क्रिया कर दी गई। गुरुवार 11 जून को मृतक के परिजन अचानक छपरा पहुंचे और उसके सामान से उसकी पहचान की। मृतक की शिनाख्त बिहार के नालंदा जिले के ठेकहाँपुर गांव निवासी लखन गोप के पुत्र मोती प्रसाद रूप में की गई है।

गुरुवार को मृतक के आधा दर्जन परिजन मांझी बलिया मोड़ स्थित भोजनालय पर पहुंचे जहां उसने अपने संगी प्रवासियों के साथ भोजन किया था। परिजनों ने बताया कि लगभग एक सप्ताह की दुर्गम यात्रा कर सभी प्रवासी बेंगलुरु से यूपी के बलिया तक बस से पहुंचे थे। बलिया से पैदल आने के क्रम में सब एक दूसरे से बिछड़ गए। थके-हारे प्रवासी घर पहुंचने की जल्दबाजी में मांझी के बलिया मोड़ पर खाना खाकर सरकारी बसों से अलग अलग होकर नालंदा पहुंच गए।

रिजन मृतक की 21 दिनों तक बाट जोहते रहे कि वह कहीं क्वारंटीन सेंटर में होगा तो छूटने के बाद वापस घर जरूर आएगा लेकिन होनी के आगे किसी की नही चलती। मांझी थाना पर पहुंचे परिजन मृतक के कपड़े व मोबाइल में उसका फोटो देखते ही फफक कर रोने लगे।

रिजनों ने बताया कि मृतक बेंगलुरु स्थित एक फ्लावर मिल में बतौर मजदूर का काम करता था। मृतक के परिवार में उसकी पत्नी रेखा देवी के अलावा तीन पुत्री क्रमशः सुनीति कुमारी रिंकी कुमारी और नीतू कुमारी तथा नीतीश कुमार और दीपक कुमार नामक दो पुत्र हैं।

ता दें कि 15 मई को तपती दोपहरी में वह विक्षिप्त की भांति दौड़ते हुए एक बगीचे में गिर पड़ा था तथा कुछ ही क्षणों में उसकी मौत हो गई थी। बाद में जांच के क्रम में मृतक का कोरोना जांच सेम्पल निगेटिव पाया गया था।

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