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बिहार : बिना रेलिंग के पुल पर हो रहीं दुर्घटनाएं, 20 साल पहले हुआ था पुल का निर्माण

Janjwar Desk
27 Jun 2020 7:41 AM GMT
बिहार : बिना रेलिंग के पुल पर हो रहीं दुर्घटनाएं, 20 साल पहले हुआ था पुल का निर्माण
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बिहार के सारण जिला के मांझी विधानसभा क्षेत्र के कोपा और मरहां को जोड़ने वाले सोंधी नदी पर बने पुल की रेलिंग टूट चुकी है। अबतक कई दुर्घटनाएं भी हो चुकीं हैं।स्थानीय ग्रामीण आक्रोशित हैं...

छपरा, जनज्वार। बिहार के सारण जिला का एक पुल इतना खतरनाक हो चुका है कि देखकर ही डर महसूस होता है। वजह तो मामूली सी है पर अबतक इसका निदान नहीं हो सका है। लोग गुहार लगाकर थक चुके हैं और अब आक्रोशित हो रहे हैं।महज रेलिंग न होने के कारण अबतक इस पुल पर कई बार दुर्घटना भी हो चुकी है।

सारण जिला के मांझी विधानसभा क्षेत्र में यह पुल है। यह पुल कोपा और मरहां को आपस में जोड़ता है। पुल के दोनों तरफ दर्जनों गांव हैं। इन गांवों के लोगों के आने-जाने का एकमात्र रास्ता इसी पुल से होकर गुजरता है। सोंधी नदी पर बने इस बेहद संकरे पुल की एक तरफ की रेलिंग पूरी तरह से ध्वस्त होकर नदी में गिर चुकी है। तो दूसरी तरफ की रेलिंग का बड़ा हिस्सा टूट कर पुल से ही लटका हुआ है। लगभग 8-10 फीट चौड़े इस पुल पर कार,ट्रैक्टर,टेंपो,पिकअप जैसे वाहन भी चलते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि रेलिंग नहीं होने से कई वाहन नीचे गिर कर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।

शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नजरे इनायत अबतक इस रेलिंग को बनाने के प्रति नहीं हुई है। काम बहुत बड़ा नहीं है। एक तरफ नई रेलिंग बना देनी है तो दूसरी तरफ की रेलिंग का एक हिस्सा बना देना है। यह बमुश्किल कुछ हजार या फिर 2 -4 लाख के बजट वाला काम ही है,पर सँभवतः बड़े लोगों को छोटा काम पसंद नहीं आता। भले ही इस कारण कुछ लोग अपनी जान भी गंवा बैठें।

पुल के नीचे नदी की गहराई लगभग 15 फीट है। जाहिर है,खतरा बड़ा है। नीचे गिरने के बाद जान का खतरा होना ही है। इलाका भी खेतों के बीच का है,लिहाजा ज्यादातर सुनसान रहता है। ऐसे में गिर जाने के बाद मदद करने और बचाने वाला भी मिलना कठिन है।

स्थानीय सरपंच पुन्नी लाल साह कहते हैं 'इस पुल से अबतक कई वाहन नीचे गिर चुके हैं। खासकर अंधेरा होने के बाद इस पुल से गुजरना काफी खतरनाक है। हमने पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर हर जगह पुल की रेलिंग के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी है,पर अबतक मरम्मत नहीं हो सकी है।'

जनज्वार ने इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों से बात की। ग्रामीण अब आंदोलन की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि पुल कई गांवों को आपस में जोड़ता है,इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है। स्थानीय ग्रामीण रामलड्डू सिंह कुशवाहा, योगेंद्र साह,अवधलाल सिंह,हरदेव सिंह,एजाज खान,कृष्णा साह,रियाज अहमद,अवधेश साह आदि ने कहा कि हमलोग बराबर इसी पुल से गुजरते हैं। भय बना रहता है। हमें तो पता है कि पुल पर रेलिंग नहीं है तो सतर्क होकर गुजरते हैं। पर हमारे नाते-रिश्तेदार और बाहरी लोगों को तो यह जानकारी नहीं है। इसलिए हम हमेशा सशंकित रहते हैं।

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष और मांझी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रह चुके पूर्व सैनिक रामनारायण यादव कहते हैं 'यह पुल मेरे विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। लीगों से मिलने-जुलने के क्रम में बराबर इस पुल से आना-जाना रहता है। यह काफी खतरनाक है। समाजवादी पार्टी जिला पदाधिकारी से मिलकर इस पुल की रेलिंग शीघ्र बनवाने की मांग करेगी।'

स्थानीय मीडिया में भी इस मुद्दे को लेकर अबतक कोई हलचल नहीं हुई है। ग्रामीण यह भी कहते हैं कि मीडिया,सरकार और प्रशासन की नजर में शायद यह एक छोटी समस्या होगी। पर कोई स्थानीय लोगों और रेलिंग नहीं होने के कारण हो रही दुर्घटनाओं के पीड़ितों से तो पूछे कि यह कितनी बड़ी समस्या है।

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