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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रोज उपलब्धियां गिनवा रहे नीतीश, लेकिन देश के टॉप 100 में नहीं आया बिहार का कोई शिक्षण संस्थान

Janjwar Desk
12 Jun 2020 11:00 AM GMT
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रोज उपलब्धियां गिनवा रहे नीतीश, लेकिन देश के टॉप 100 में नहीं आया बिहार का कोई शिक्षण संस्थान
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उच्च शिक्षा में बिहार सरकार के सारे शिक्षण संस्थान फेल साबित हो रहे हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षण संस्थानों की घोषित की गई रैंकिंग में टॉप100 में बिहार सरकार का कोई संस्थान जगह नहीं बना पाया।दो इंजीनियरिंग संस्थानों ने जगह बनाई भी है,तो ये दोनों बिहार सरकार के नहीं हैं।

जनज्वार ब्यूरो, पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी दल तैयारियों में जुटे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी रोज वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग कर कार्यकर्ताओं से सीधे रूबरू हो रहे हसीन और सरकार की उपलब्धियों का बखान कर उन्हें जनता को बताने का निर्देश दे रहे हैं।पर उच्च शिक्षा में बिहार सरकार के सारे ड्रीम प्रोजेक्ट फेल हो गए हैं। कोई भी संस्थान किसी भी कैटेगरी में देश के टॉप 100 संस्थानों की सूची में जगह नहीं बना सका।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गुरुवार 11 जून को नेशनल इंस्टीट्यूटनल रैंकिंग फ्रेमवर्क-2020 के तहत देशभर के शिक्षण संस्थानों की ताजा रैंकिंग जारी की गई। सालाना जारी होने वाली यह रैंकिंग 10 कैटेगरी में जारी की गई है। 10 कैटेगरी में तीन कैटेगरी में बिहार के दो इंजीनियरिंग संस्थान टॉप 100 में जगह बना पाए हैं, पर ये दोनों संस्थान केंद्रीय हैं। आईआईटी पटना चार स्थान फिसल कर 26वें स्थान पर है, जबकि एनआईटी पटना ने पिछले वर्ष की अपेक्षा कुछ सुधार किया है और यह 92वें स्थान पर है। पिछले वर्ष यह 134वें स्थान पर था।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहली बार वर्ष 2005 में सरकार बनाने के साथ ही उच्च शिक्षा का विजन प्रस्तुत किया था।इसके तहत आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय,चाणक्या विधि विश्वविद्यालय,कृषि विश्वविद्यालय,चन्द्रगुप्त इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट आदि की स्थापना की गई।पर उच्च शिक्षा की दशा ज्यों की त्यों ही रही। दूसरे राज्यों में पढ़ रहे बिहारी छात्रों की लाखों की संख्या यह बताने को काफी है कि बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों की वास्तविक हालत क्या है।

इसमें सबसे हास्यास्पद बात यह है कि राज्य के अधिकांश शिक्षण संस्थानों ने इस रैंकिंग के लिए आवेदन करने की भी जहमत नहीं उठाई। बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षा के प्रति कितनी गंभीरता है,यह इसी से स्पष्ट होता है सबसे पुराने और केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने की मांग करने वाले पटना यूनिवर्सिटी समेत किसी भी यूनिवर्सिटी ने इसके लिए आवेदन नहीं किया जबकि यह रैंकिंग शिक्षण संस्थानों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पटना के ए.एन कॉलेज, दरभंगा के सीएम साइंस कॉलेज,पटना के चन्द्रगुप्त इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सहित कुछ संस्थानों ने आवेदन किया भी तो निर्धारित कैरिटेरिया के अनुसार जगह बनाने में विफल रहे।लिहाजा विश्वविद्यालय, मैनेजमेंट, मेडिकल, फार्मेसी, लॉ, डेंटल, आर्किटेक्चर आदि कैटेगरी में बिहार का कोई संस्थान जगह नहीं बना सका।

बिहार के यूनिवर्सिटी-कॉलेजों की स्थिति कोई छुपी हुई नहीं है। इन संस्थानों की पहचान अब एडमिशन, परीक्षा और डिग्री देने वाले केंद्र के रूप में होने लगी है। ये यूनिवर्सिटी-कॉलेज कितने लापरवाह हैं, यह इससे भी स्पष्ट होता है कि विगत कुछ वर्षों से नैक एक्रीडेशन कराना जरूरी हो गया है।यह एक्रीडेशन कॉलेजों के पतन-पाठन, शिक्षक-कर्मचारी की उपलब्धता, संसाधनों की स्थिति आदि के आधार पर दिया जाता है। यूजीसी से अनुदान भी इसी एक्रीडेशन के आधार पर मिलता है, पर बिहार के ज्यादातर यूनिवर्सिटी-कॉलेज अबतक एक्रीडेशन नहीं करा पाए हैं और यूजीसी के अनुदान से वंचित होने का खतरा सामने है।

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