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कोराना इलाज पर केजरीवाल ने बदले सुर, अब दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम को कहा एक यूनिट

Janjwar Desk
19 Jun 2020 1:30 AM GMT
कोराना इलाज पर केजरीवाल ने बदले सुर, अब दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम को कहा एक यूनिट
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केजरीवाल ने कहा, इस कोविड केयर सेंटर में हल्के लक्षणों वाले और एसिम्प्टोमैटिक मरीजों के आइसोलेशन की व्यवस्था की जा रही है...

जनज्वार ब्यूरो। दिल्ली सरकार अब राष्ट्रीय राजधानी सहित पूरे एनसीआर को एक कोरोना यूनिट मानकर काम करेगी। इससे पहले सरकार ने दिल्ली के अस्पतालों को केवल स्थानीय कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित करने का फैसला किया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा, गृहमंत्री के साथ हुई बैठक में पूरे एनसीआर को एक कोरोना यूनिट मान कर काम करने पर विचार किया गया है। दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम सब एक ही है। गृहमंत्री ने इन राज्यों के आसपास के जिलाधिकारियों को बुलाया हुआ था। एक तरह से पूरे एनसीआर को एक कोरोना यूनिट मान कर काम किया जाएगा।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने गुरुवार को छतरपुर के राधा स्वामी सत्संग परिसर में कोरोना मरीजों के लिए बनाए जा रहे 10 हजार बेड के कोविड केयर सेंटर का निरीक्षण किया। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी उनके साथ मौजूद रहे। इसी दौरान उन्होंने पूरे एनसीआर को एक कोरोना यूनिट मानने की बात कही।

केजरीवाल ने कहा, इस कोविड केयर सेंटर में हल्के लक्षणों वाले और एसिम्प्टोमैटिक मरीजों के आइसोलेशन की व्यवस्था की जा रही है। यह जुलाई के पहले सप्ताह तक बन कर तैयार हो जाएगा। यहां पर डॉक्टरों और एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, राधा स्वामी सत्संग ने यहां पर अपनी जगह दी है। बहुत सारे ऐसे लोग भी होते हैं, जिनके घर में व्यवस्था नहीं होती है। उनके पास आइसोलेशन करने के लिए घर में अगल से कमरा नहीं होता है। कई गरीब लोग झुग्गियों में रहते हैं, उनके पास शौचालय नहीं हैं। ऐसे लोगों को आइसोलेशन करने के लिए हमें व्यवस्था करनी पड़ती है।

जुलाई के पहले सप्ताह तक यह कोविड केयर सेंटर बन कर तैयार हो जाएगा। होटल में भी आईसीयू बेड का इंतजाम नहीं हो सकता है। प्रत्येक होटल को किसी अस्पताल के साथ संबंद्ध किया जा रहा है। यदि मरीज गंभीर है, तो उसे अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, छतरपुर में बन रहे 10 हजार कोविड केयर सेंटर में आईसीयू का इंतजाम करना थोड़ा मुश्किल है। इसलिए इसे तीन-चार अस्पतालों के साथ संबद्ध करना पड़ेगा, ताकि कोई मरीज गंभीर हो, तो उसे अस्पताल में भर्ती किया जा सके।

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