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Haryana News : इधर बरसात का अंदेशा, दूसरी ओर धान की सरकारी खरीद केंद्र सरकार ने 11 अक्टूबर तक टाल दी

Janjwar Desk
1 Oct 2021 4:00 PM GMT
Haryana News : इधर बरसात का अंदेशा, दूसरी ओर धान की सरकारी खरीद केंद्र सरकार ने 11 अक्टूबर तक टाल दी
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Haryana News : किसानों ने बताया कि यह सरकार पूरी तरह से मनमानी पर उतर आई है। एक और तो पीएम मोदी किसानों की आमदनी डबल करने की बात कर रहे, दूसरी ओर फसल बेचने में उनके सामने दिक्कत खड़ी की जा रही....

Haryana News जनज्वार ब्यूरो चंडीगढ़। एक अक्टूबर से होने वाली धान की सरकारी खरीद को केंद्र ने अचानक स्थगित कर दिया है। अब धान की खरीद 11 अक्टूबर से होगी। इधर हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) में 20 प्रतिशत से ज्यादा धान की कटाई हो चुकी है। धान मंडियों में पहुंच गई है। लगातार बरसात का अंदेशा हो रहा है, इस वजह से धान उत्पादक किसान भारी परेशानी से दो चार हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है।

हरियाणा और पंजाब में 25 सितंबर से आम तौर पर धान की सरकारी खरीद शुरू हो जाती है। इस बार 1 अक्टूबर से खरीद की बात की गई थी। अचानक ही अब 11 अक्टूबर तक सरकारी खरीद स्थगित करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय के बाद मंडियों में धान लेकर आए किसानों में गहरा रोष है। इस वक्त मंडियों में धान की आवक जोरो पर है। खरीद शुरू न होने की वजह से मंडियों में जाम की स्थिति बनी हुई है।

हरियाणा और पंजाब (Haryana And Punjab) में मोटी धान की सरकारी खरीद होती है। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कुछ दिन पहले ही दावा किया था कि धान की सरकारी खरीद इस बार एक अक्टूबर से शुरू हो जाएगी। इस आश्वासन के बाद किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी। अब अचानक धान खरीद का कार्यक्रम सरकार ने स्थगित कर दिया है।


करनाल (Karnal) जिले के उचाना गांव के किसान रामस्वरूप 68 और हरपाल सिंह 65 ने बताया कि उपमुख्यमंत्री (Dushyant Chautala) के आश्वासन के बाद किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी है। अब जब धान कट कर मंडी में पहुंच गई तो सरकार ने यकायक खरीद को स्थगित करने का निर्णय ले लिया है।

किसान रामस्वरूप ने बताया कि दस दिन तक मंडी में धान की रखवाली कौन करेगा? इधर बरसात का सीजन है। किसी भी वक्त तेज बरसात हो सकती है। मंडियों में धान को ढापने और सुरक्षित रखने के इंतजाम नहीं है। ऐसे में अब वह क्या करें?

किसानों ने बताया कि यह सरकार पूरी तरह से मनमानी पर उतर आई है। एक और तो पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) किसानों की आमदनी डबल करने की बात कर रहे हैं, दूसरी ओर फसल बेचने में उनके सामने दिक्कत खड़ी की जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान की खरीद को लेकर आए नये फरमान पर कहा कि सरकार ने धान खरीद में अन्नदाता का बिल्कुल मजाक बनाकर रख दिया है। पहले खुद सरकार ने ही 25 सितंबर से खरीद शुरू करने का ऐलान किया था। उसके बाद 1 अक्टूबर से खरीद की बात कही और अब 11 अक्टूबर तक खरीद को टाल दिया गया है। लाखों क्विंटल धान प्रदेश की मंडियों में अन्नदाता ट्रैक्टर ट्रालियों में भर कर ला चुके है। सरकार बताए कि अब किसान इस फसल का क्या करें और कहां ले जाएँ?

हुड्डा ने कहा कि किसान एक तरफ मौसम और दूसरी तरफ सरकार की नीयत और नीतियों की मार झेल रहा है। अधिक बारिश की वजह से किसान की खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई और अब उसे सरकारी लेटलतीफी का शिकार होना पड़ रहा है। मंडी में खुले आसमान के नीचे धान लेकर बैठे किसान के सामने मौसम अब भी चुनौती बना हुआ है। 24 घंटे उसपर बारिश से धान खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।'

सरकारी खरीद के इंतजार में किसान (Farmers) प्राइवेट एजेंसियों के हाथों लुट रहे हैं। मजबूरी में उन्हें एमएसपी से कम रेट पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। इसलिए सरकार को बिना देरी किए खरीद शुरू करनी चाहिए और जिन किसानों ने एमएसपी से कम रेट पर फसल बेची है, उनके नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।


इधर सरकार ने तर्क दिया कि अभी धान में नमी की मात्रा ज्यादा है। इसलिए अचानक धान की सरकारी खरीद को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। सीएम मनोहर लाल (Manohar Lal Khattar) ने बताया कि नमी युक्त धान से नुकसान होता है। इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

लेकिन भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Chadhuni) ने बताया कि सरकार मनमानी कर रही है। किसानों को बाजार के हवाले किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि किसी भी तरह से तीन कृषि कानून लागू कर दिए जाए।

किसान नेता सुखविंदर सिंह (Sukhvinder Singh) ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की स्थिति पैदा की जा रही है कि किसान तंग आकर फसल ओने पौने दाम पर निजी व्यापारियों को बेच दे। किसानों के साथ सरकार ने बड़ा षड़यंत्र किया है। क्योंकि जो किसान मंडी में धान लेकर आ गया, उसे धान बेचना ही होगा। वह ज्यादा देर तक मंडी में धान को रख ही नहीं सकता है। अब इस स्थिति का फायदा आढ़ती और व्यापारी उठाएंगे।

बाद में जब सरकारी धान शुरू होगा तो यह व्यापारी इस धान को सरकारी खरीद में दिखा देंगे। इस तरह से न्यूनतम समर्थन मूल्य का जो लाभ किसानों को मिलना चाहिए था, वह कुछ आढ़ती और व्यापारियों की जेब में चला जाएगा। केंद्र सरकार के इस कदम से यही हो रहा है।

उधर पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjeet Singh Channi) ने पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात कर धान खरीद को जल्द शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में धान की कटाई शुरू हो गई है। मंडियों में धान आ गया है। इस स्थिति में धान की सरकारी खरीद स्थगित करना तर्क संगत नहीं है।

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