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जिस गांव में राजीव गांधी सोनिया-राहुल को लेकर गए थे, उस गांव के 20 घरों को जला दिया वन विभाग ने

Janjwar Desk
23 Oct 2020 3:17 PM GMT
जिस गांव में राजीव गांधी सोनिया-राहुल को लेकर गए थे, उस गांव के 20 घरों को जला दिया वन विभाग ने
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आदिवासियों के इस गांव में बीते 13 अक्टूबर को वन विभाग से नियंत्रित वन प्रबंध समिति की अगुवाई में 20 लोगों के लोगों के घरों को तोड़ा गया और उन्हें आग लगा दी गई, गांव के लोग जिला मुख्यालय धमतरी में अनिश्चितकाल के लिए धरने पर बैठे हैं......

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में एक दुगली गांव है। इस गांव में कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी सपरिवार पहुंचे थे। पांचवीं अनुसूची में आने वाले इस गांव के लोगों का आतिथ्य सत्कार देते हुए तब गांव को गोद लेने की घोषणा की गई थी लेकिन तीन दशक से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह गांव अपने विकास को तरस रहा है।

जानकारी के मुताबिक, आदिवासियों के इस गांव में बीते 13 अक्टूबर को वन विभाग से नियंत्रित वन प्रबंध समिति की अगुवाई में 20 लोगों के लोगों के घरों को तोड़ा गया और उन्हें आग लगा दी गई। न्याय की मांग को लेकर गांव के लगभग 100 आदिवासी बच्चे, महिलाएं जिला मुख्यालय धमतरी में अनिश्चितकाल के लिए धरने पर बैठे हैं।

इन आदिवासी घरों को उजाड़ने और वन भूमि से भगाने के लिए उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया जा रहा है और उनकी फसलों को जानवरों से चरवा दिया गया है। इससे पहले भी तीन साल पहले 20 मार्च 2017 को उनकी झोपड़ियों को जला दिया गया था।

इस संबंध में संजय पराते ने अपने फेसबुक पोस्ट में घटना की जानकारी साझा की है। उनकी फेसबुक पोस्ट के मुताबिक चुनाव जीतने के बाद 20 अगस्त 2019 को राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी यहां पहुंचे थे और उन्होंने 150 करोड़ रुपयों के विकास कार्यों की घोषणा की थी।

उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा, नीचे विस्तार से पढ़ें-

'धमतरी जिले के नगरी विकासखंड का दुगली गांव याद है न आपको! जी हां, वही दुगली गांव, जहां 14 जुलाई 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सपरिवार सोनिया-राहुल समेत पहुंचे थे। कमारों के आतिथ्य का कड़ू कांदा, मड़िया पेज, कुल्थी दाल और चरोटा भाजी का स्वाद ग्रहण करते हुए इस गांव को गोद लेने की घोषणा की थी। पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाला यह गांव तब से आज तक विकास की बाट जोह रहा है।

यह वही गांव है, जहां चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिवंगत राजीव की प्रतिमा के अनावरण के लिए पिछले साल 20 अगस्त को फिर दुगली पहुंचे, 150 करोड़ रुपयों के विकास कार्यों की घोषणा की और सभी आदिवासियों को वन भूमि का पट्टा देने की घोषणा की।

यह उसी आदिवासी गांव दुगली की खबर है, जहां के आश्रित ग्राम वसुंधरा धोबाकछार के 20 आदिवासी परिवारों के लगभग 100 लोग अपने बाल-बच्चों सहित पिछले 5 दिनों से धमतरी जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन के बाद अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि बीते 13 तारीख को वन विभाग से नियंत्रित वन प्रबंधन समिति की अगुआई में उनके घरों को तोड़कर आग लगा दी गई है, जबकि वे 1993-94 से वन कक्ष क्रमांक 266 की वन भूमि पर काबिज है और खेती कर रहे हैं। उन्हें उजाड़ने और वन भूमि से भगाने के लिए उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया जा रहा है और उनकी फसलों को जानवरों से चरवा दिया गया है।

उनको वन भूमि से भगाने का यह पहला प्रयास नहीं है। साढ़े तीन साल पहले 20 मार्च 2017 को भी उन पर हमला करके उनकी झोपड़ियों को नष्ट कर दिया गया था। अपनी काबिज वन भूमि पर वनाधिकार के दावे के लिए उन्होंने आवेदन भी दिया था, लेकिन बिना कोई कारण बताए मौखिक रूप से उनके दावे निरस्त होने की सूचना दे दी गई।

इस प्रकरण के सामने आते ही माकपा नेता समीर कुरैशी ने तत्काल धरनारत पीड़ित आदिवासियों से मुलाकात की और उनके संघर्षों का समर्थन किया। उन्होंने मांग की है कि आदिवासियों को उत्पीड़ित करने वाले लोगों पर कानूनी कार्यवाही हो, उनकी संपत्ति को पहुंचे नुकसान का उन्हें मुआवजा मिले और काबिज वन भूमि के पट्टे दिए जाएं। पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल 25-26 को इस गांव का दौरा भी करेगा।'


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