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Indo Pak Relations : पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन का भारत पर कितना पड़ेगा असर?

Janjwar Desk
10 April 2022 8:22 AM GMT
Indo Pak Relations News : पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन का भारत पर कितना पड़ेगा असर?
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इमरान खान और शहबाज शरीफ।

Indo Pak Relations : पाकिस्तान में सियासी उलटफेर के बाद एक गठबंधन सरकार अस्तित्व में आने वाली है। इस गठबंधन में राजनीतिक रूप से एक-दूसरे के धुर विरोधी पार्टियां पहली बार एक मंच पर दिखाई देंगी। तय है इसका असर भारत पर भी होगा।

Indo Pak Relations News : पाकिस्तान में जारी सियासी संकट ( Political crisis Pakistan ) का एक से दो दिन में पटाक्षेप हो जाएगा। पाकिस्तान में हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामे के बाद इमरान खान ( Imran khan ) को सत्ता से बाहर हो चुके हैं। शहबाज शरीफ ( Shahbaz Sharif ) ने पीएम पद के लिए नामांकर दाखिल कर दिया है। कल पीएमएलएन के नेता शहबाज शरीफ पाकिस्तान नेशनल असेंबली में बहुमत साबित कर सत्ता की कुर्सी पर काबिज हों जाएंगे। इस बीच पाक में सियासी उथल पुथल का असर न केवल पाकिस्तान पर पड़ेगा, बल्कि भारत ( India ) पर भी इसका असर होना तय है। साथ ही पाकिस्तान कें संबंध अन्य देशों के साथ बदलेंगे।

ऐसा ​इसलिए कि 2018 में सत्ता में आने के बाद से इमरान खान ( Imran Khan ) ने भारत और अमेरिका विरोधी स्टैंड लिया था। इस कमी की भरपाई के लिए इमरान की सरकार ने चीन और रूस से पींगे बढ़ाने की कोशिश की। इमरान ने विगत 24 फरवरी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। यह वही दिन था जिस दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया था। इस घटना के बाद से पाकिस्तान में सत्ता विरोधी हवा को मजबूती मिली, और उसके डेढ़ माह के भीतर इमरान खान सत्ता से बाहर हो गए। पाकिस्तान में सियासी उलटफेर के बाद एक गठबंधन सरकार अस्तित्व में आने वाली है। इस गठबंधन में राजनीतिक रूप से एक-दूसरे के धुर विरोधी पार्टियां पहली बार एक मंच पर दिखाई देंगी। तय है इसका असर भारत पर भी होगा।

तो इंडिया से पाक के सुधरेंगे संबंध?

जहां तक भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की बात है कि इमरान खान के कार्यकाल के दौरान भारत-पाक संबंध ( Indi-Pak relations ) सबसे बुरे दौर में रहे हैं। संबंधों में अहसजता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पिछले तीन साल सात माह के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और पाक पीएम इमरान खान के बीच एक भी आधिकारिक बैठकें नहीं हुईं। इसके पीछे इमरान खान का कश्मीर मुद्दे पर ज्यादा जोर देना रहा है। इस बार को उन्होंने हाल ही में स्वीकार भी किया है कि हमें कश्मीर मुद्दे पर उतना जोर नहीं देना चाहिए था, जितना दिया गया।

बाजवा संबंधों में सुधार पर दे सकते हैं जोर

अब पाकिस्तान में इमरान सरकार गिरने के बाद भारत और पाकिस्तान में इसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर गहरे अविश्वास के कारण कई वर्षों से औपचारिक राजनयिक वार्ता नहीं हुई है।भारत-पाकिस्तान संबंधों का बारीक नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना इस्लामाबाद में नई सरकार पर कश्मीर में सफल संघर्ष विराम के लिए दबाव डाल सकती है। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान के ताकतवर सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने हाल ही में कहा था कि यदि भारत सहमत होता है तो उनका देश कश्मीर पर आगे बढ़ने को तैयार है।

नवाज के अनुभवों का लाभ उठा सकते हैं शहबाज

Indo Pak Relations News : फिर अविश्वास प्रस्ताव पर जीत हासिल करने के बाद संभावित पीएम शहबाज शरीफ ने भी बयान दिया है कि हम किसी से बदलने की भावना से काम नहीं करेंगे। हालांकि, उनकी बातें पाकिस्तान के आंतरिक मुद्दे से ज्यादा जुड़ी हैं, लेकिन ये भी तय है कि पूर्व पीएम नवाज शरीफ के कार्यकाल के दौरान कश्मीर मुद्दे पर स्थिति हमेश नियंत्रण में रही थी। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बढ़ा था। शहबाजह शरीफ नवाज के छोटे भाई हैं। वो अपने बड़े भाई के अनुभवों का लाभ उठा सकते हैं। साथ ही इमरान खान जिद पर अड़े रहने की नीतियों से पाकिस्तान को हुए नुकसान से सीख भी ले सकते हैं।

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