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पत्रकार मनदीप की गिरफ्तारी पर रवीश का 'जेलर' को पत्र - 'जेल की दीवारें आजाद आवाजों से ऊँची नहीं हो सकती हैं'

Janjwar Desk
31 Jan 2021 11:49 AM GMT
पत्रकार मनदीप की गिरफ्तारी पर रवीश का जेलर को पत्र - जेल की दीवारें आजाद आवाजों से ऊँची नहीं हो सकती हैं
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मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार ने जेलर के नाम से एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि आप नहीं असली जेलर तो कोई और है और जेल में बंद की गयी इन आजाद आवाजों को संभाल कर रखिएगा...

जनज्वार। युवा पत्रकार मनदीप पुनिया की गिरफ्तारी पर पत्रकार मुखर हो रहे हैं और सरकार से उन्हेें रिहा करने की मांग कर रहे हैं। पत्रकारों ने रविवार दोपहर दो बजे दिल्ली के पटेल चैक स्थित पुलिस मुख्यालय से प्रेस क्लब तक शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला है, वहीं कई पत्रकार सोशल मीडिया पर लेख, टिप्पणी व अन्य माध्यमों से इसका विरोध कर रहे हैं। अब मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी इस पूरे प्रकरण पर एक टिप्पणी लिखी है जिसमें उन्होंने कहा है कि जेल की दीवारें आजाद आवाजों से ऊँची नहीं हो सकती हैं।

रवीश कुमार ने अपने यह टिप्पणी पत्रनुमा लिखी है जिसे जेलर साहब को संबोधित किया है। रवीश ने लिखा है कि डियर जेलर साहब, भारत का इतिहास इन काले दिनों की अमानत आपको सौंप रहा है। आजाद आवाजों व सवाल करने वालों को रात में उनकी पुलिस उठा ले जाती है। दूर दराज के इलाकों में एफआइआर कर देती हैं, इन आवाजों को संभाल कर रखिएगा।

अपने बच्चों को वाट्सएप चैट में बताइएगा कि सवाल करने वाला उनकी जेल में रखा गया है। बुरा लग रहा है लेकिन मेरी नौकरी है, जेल भेजवाने वाला कौन है उसके नाम आपके बच्चे गूगल सर्च कर लेंगे। जो आपके बड़े अफसर हैं, आइएएस, आइपीएस वे अपने बच्चों से नजरें चुराते हुए उ्रन्हें पत्रकार नहीं बनने के लिए कहेंगे। उन्हें समझाएंगे कि मैं नहीं तो फलां अफसर तुम्हें जेल के अंदर बंद कर देंगे। ऐसा करो तुम गुलाम बनो और जेल से बाहर रहो।

भारत माता देख रही है गोदी मीडिया सर पर बैठाया जा रहा है और आजाद आवाजें जेल भेजी जा रही हैं। डिजिटल मीडिया पर स्वतंत्र पत्रकारों ने अच्छा काम किया है, फेसबुक लाइव व यू ट्यूब चैनल से किसान आंदोलन की खबरें गांव-गांव तक पहुंचीं हैं।

उन्हें बंद करने के लिए मामूली गलतियों और अलग दावों पर एफआइआर किया जा रहा है। आजाद आवाज की इस जगह पर सबसे बड़े जेलर की निगाह है। जेलर साहब आप असली जेलर नहीं है, असली जेलर तो कोई और है।

रवीश ने आगे लिखा है अगर यह अच्छा है तो इस बजट में प्रधानमंत्री जेलबंदी योजना लांच हो। मनरेगा से गांव-गांव में जेल बने और बोलने वालों को जेल में डाल दिया जाए। जेल बनाने वाले को भी जेल में डाल दिया जाए। उन जेलों की तरफ देखने वाले को भी जेल में डाल दिया जाए। मुनादी करायी जाए कि प्रधानमंत्री जेलबंदी योजना लांच हो गयी है, कृपया खामोश रहें।

सवाल करने वाले पत्रकार जेल में रखे जाएंगे तो दो बातें होंगी। जेल से अखबार निकलेगा और बाहर के अखबारों में चाटुकार लिखेंगे। विश्व गुरु भारत के लिए यह अच्छी बात नहीं होगी। मेरी गुजारिश है कि सिद्धार्थ वरदराजन, राजदीप सरदेसाई, अमित सिंह सहित सभी पत्रकारों के खिलाफ मामले वापस लिए जाएं। मनदीप पुनिया को रिहा किया जाए और एफआइआर का खेल बंद हो।

रवीश कुमार ने अंत में लिखा है - मेरी एक बात नोट कर पर्श में रख लीजिएगा, जिस दिन जनता यह खेल समझ लेगी, उस दिन गांवों में ट्रैक्टर, बसों एवं ट्रकों के पीछे, हवाई जहाज, बुलेट ट्रेन, मंडियों, मेलों, बाजारों और पेशाबघरों की दीवार पर यह बात लिख देगी - गुलाम मीडिया के रहते कोई मुल्क आजाद नहीं होता है, गोदी मीडिया से आजादी से ही नई आजादी आएगी।

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