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मध्य प्रदेश

मात्र 11 हजार के लिए बुजुर्ग को अस्पताल ने बनाया बंदी, क्या यही है मोदी की आयुष्मान योजना की हकीकत

Janjwar Desk
7 Jun 2020 10:22 AM GMT
मात्र 11 हजार के लिए बुजुर्ग को अस्पताल ने बनाया बंदी, क्या यही है मोदी की आयुष्मान योजना की हकीकत
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पैसे न होने पर अस्पताल से छुट्टी के लिए कहा, तो कर्मचारियों ने पहले फाइल देने में आनाकानी की और बाद में 11,270 रुपए की मांग की। इतना ही नहीं पेशाब की नली भी नहीं निकाली और बाद में पलंग से हाथ-पैर बांध दिए...

मध्य प्रदेश, जनज्वार। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में एक निजी अस्पताल प्रबंधन की एक बेहद अमानवीय तस्वीर सामने आयी है। यहां 80 साल के बुजुर्ग के परिजन जब उपचार के लिए जरुरी रकम नहीं जमा कर पाए तो अस्पताल ने बुजुर्ग के हाथ और पैर ही पलंग से बांध दिए, ताकि परिजन कहीं से भी रकम जमा करें।

बुजुर्ग की बेटी शीला दांगी कहती हैं कि यहां के एक निजी नर्सिंग होम में उसने अपने बुजुर्ग पिता लक्ष्मी नारायण दांगी (80) को लगभग एक सप्ताह पहले भर्ती कराया गया था। उन्हें पेट की तकलीफ है। अस्पताल प्रबंध ने इलाज के लिए पहले छह हजार, फिर पांच हजार रुपए मांगे, जिसे जमा करा दिया गया।

शीला का आरोप है कि शनिवार 6 जून की सुबह उसने पैसे न होने पर अस्पताल से छुट्टी के लिए कहा, तो कर्मचारियों ने पहले फाइल देने में आनाकानी की और बाद में 11,270 रुपए की मांग की। इतना ही नहीं पेशाब की नली भी नहीं निकाली और बाद में पलंग से हाथ-पैर बांध दिए।

यह उस देश की हकीकत है जहां मोदी सरकार गरीबों के लिए आयुष्मान भारत जैसी योजना होने के दावे और वादे करती है। सरकार ने घोषित किया हुआ है कि आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, भारत सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों खासकर बीपीएल धारक को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। इस योजना के अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये तक का कैशरहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। सवाल है कि आखिर क्या इस 80 साला बुजुर्ग जैसे गरीब इस कैटेगरी में नहीं आते।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रकाश विष्णु फुलंबीकर ने रविवार 7 जून को कहा केि, 'इस मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी ने अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व (एसडीएम) के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल गठित किया, जिसमें दो चिकित्सक है। इस दल ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। वहीं निजी अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर दिया गया है।'

इस घटना पर रोष व्यक्त करते हुए पत्रकार कृष्णकांत कहते हैं, सरकार ​स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, रेलवे सब प्राइवेट हाथों में बेचना चाहती है. अस्पताल प्राइवेट बनिये के पास होगा तो वह बिल न चुका पाने के लिए आपको बांध देगा। किडनी निकाल लेगा। ​मुस्टंडे भेजकर पिटवा देगा। सरकार चाहती है कि देश की सारी सुविधाएं ठाकुर का कुआं हो जाएं। सरकार चाहती है कि देश के स्कूल और अस्पताल साहूकार का ठीहा हो जाएं। इससे क्रोनी पालने में मदद मिलेगी। पर आप ऐसा क्यों चाहते हैं? वह तो आपको बिस्तर से बांध देगा। जो लोग रोज रोज टैक्सपेयर के पैसे की चिंता में दुबले होते रहते हैं, इन बुनियादी बातों पर उन्हें भी कभी कोई सवाल नहीं सूझता।'

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