Mining in Hasdev Aranya : भाजपाई नेताओं की भाषा क्यों बोल रहे हैं भूपेश बघेल ? क्या अपनी ही पार्टी के दबाव में हैं छत्तीसगढ़ के सीएम ?

Mining in Hasdev Aranya : भाजपाई नेताओं की भाषा क्यों बोल रहे हैं भूपेश बघेल ? क्या अपनी ही पार्टी के दबाव में हैं छत्तीसगढ़ के सीएम ?
Mining in Hasdev Aranya : ज्यादा नहीं पिछले साल की ही बात है, जब छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल ने देश में महंगाई को लेकर चिंता जताने वालों को भोजन त्यागने की सलाह दी थी। तब सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने कहा था कि बीजेपी के नेता मानसिक संतुलन खोते जा रहे हैं। शनिवार को भानुप्रतापपुर में मीडिया के सामने सीएम भूपेश बघेल भी जैसे मानसिक संतुलन खो बैठे और कह दिया कि हसदेव अरण्य में जंगल कटाई का विरोध करने वालों को अपने एसी, पंखे और कूलर को बंद कर लड़ाई में उतरना चाहिए।
दोनों बयानों में काफी समानता है। पर्यावरण की सुरक्षा भी उतना ही अहम मुद्दा है, जितना महंगाई के दौरान व्यक्ति की खाद्य सुरक्षा। सीएम ने अपने बयान में यह दिखा दिया कि उनकी सरकार कोयला खनन के लिए पेड़ों की बलि लेने के अपने फैसले पर अडिग है। यह राजनीति का तकाजा है कि विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर यह बयान देने के 24 घंटे के भीतर सीएम बघेल ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पर्यावरण दिवस पर शुभकामना ट्वीट को रीट्वीट भी किया है।
We have #OnlyOneEarth.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 5, 2022
Today and everyday, celebrate, protect and help restore our planet.#WorldEnvironmentDay pic.twitter.com/5o1VWh0PkA
कितना सच बोल रहे हैं बघेल?
छत्तीसगढ़ के सीएम ने कहा कि लोग यह दावा कर रहे हैं कि कोयला खनन के लिए राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम और अदाणी पावर के एमडीओ को सौंपे गए हसदेव अरण्य के 1136 हेक्टेयर वन क्षेत्र में 8 लाख पेड़ काटे जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि खदान के लिए दी गई 30 साल की लीज के दौरान केवल 8 हजार पेड ही काटे जाएंगे। सीएम का दावा इसलिए भी अविश्वसनीय है, क्योंकि 1136 हेक्टेयर सघन वन क्षेत्र में 8 हजार पेड़ हो ही नहीं सकते। अगर सीएम का दावा सही है तो फिर एक घने जंगल के एक हेक्टेयर में केवल 8 पेड़ ही होने चाहिए, जो कि असंभव सी बात है। सीएम ने कहा कि विरोधियों को आदिवासियों के पुनर्वास, मुआवजे और कटने वाले पेड़ों के बदले वृक्षारोपण पर ध्यान देना चाहिए। सीएम ने एक और दावा किया कि खनन परियोजना के लिए जमीन के आवंटन में पंचायतों से सहमति लेने की प्रक्रिया फर्जी नहीं, तर्कसंगत थी।
अपने ही लोगों से घिरे सीएम
सरगुजा के कांग्रेस नेताओं ने परसा कोल ब्लॉक का विरोध कर रहे ग्रामीणों को अपना समर्थन दिया है। सरगुजा में कांग्रेस के बड़े नेता और औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक की अगुवाई में जिला कांग्रेस और जिला और जनपद पंचायत सदस्यों ने हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन समर्थन किया है। सीएम के प्रतिद्वंद्वी और राज्य में मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार टीएस सिंहदेव अंबिकापुर के विधायक और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री हैं। सिंहदेव के भतीजे और सरगुजा जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने जिला पंचायत से प्रस्ताव पारित कर खनन प्रभावित गांवों में पूरे कोरम के साथ दोबारा ग्रामसभा आयोजित होने तक प्रशासन को पेड़ काटने सहित तमाम गतिविधियों को रोक देना चाहिए। साफ है कि भूपेश बघेल पर अपनी ही पार्टी के नेताओं का दबाव बढ़ रहा है। शनिवार को भाजपाई लहजे में दिया गया उनका बयान इसी ओर इशारा करता है।





