Odisha : हाईकोर्ट के जज ने 1 दिन में 32 मामलों में सुनाया फैसला, कई मामले 3 दशक से भी ज्यादा पुराने

Odisha : हाईकोर्ट के जज ने 1 दिन में 32 मामलों में सुनाया फैसला, कई मामले 3 दशक से भी ज्यादा पुराने
Bhuvneshwara News : अदालतों में पेंडिंग मामलों ( Pending cases ) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ( Supreme court ) की सक्रियता का असर अब देश भर में फैले अन्य न्यायालयों के कामकाज पर दिखाई देने लगा है। ओडिशा उच्च न्यायालय ( Odisha High Court ) के सीनियर जस्टिस देवव्रत दास की अध्यक्षता वाली सिंगल बेंच ने 26 सितंबर को 32 मामलों में फैसला सुनाकर को सबको सकते में डाल दिया। इनमें से अधिकांश मामले अपीलीय सिविल अदालतों के आदेश को चुनौती देने वाली दूसरी अपील हैं। 32 में से 31 मामले दूसरी अपील से जुड़े हैं। कई मामले तो 1988-1990 के बीच के हैं।
गंगाधर प्रधान ने 1990 के एक मामले में दूसरी अपील दायर की थी। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस ने बालासोर जिले में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर को जमीन की बिक्री में यथास्थिति के दावे को बरकरार रखा। प्रधान ने 1990 में यह अपील करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था कि उनके विरोधी पक्ष ने संपत्ति का कुछ हिस्सा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के अधिकारियों को बेच दिया। एक अन्य मामले में जस्टिस देवव्रत दास ने कालाहांडी के जिला कलेक्टर की अपील को बरकरार रखा, जिन्होंने 1999 में प्रहलाद अघरिया नाम के एक शख्स और अन्य लोगों की ओर से सरकारी भूमि के अतिक्रमण के खिलाफ उड़ीसा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
ओडिसा हाईकोर्ट में पेंडिंग हैं 1.72 लाख मामले
बता दें कि ओडिशा हाईकोर्ट ( Odisha High Court ) में अतिरिक्त स्थायी वकील समरेश जेना ने कहा कि एक ही दिन में 32 मामलों पर फैसला सुनाना अहम है। उच्च न्यायालय में लंबित मामलों को कम करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। जेना ने कहा कि 23 सितंबर तक 1.72 लाख केस हाईकोर्ट ( High court ) में लंबित थे जिनमें से 67000 से अधिक मामले दीवानी रिट याचिका से जुड़े हैं। लगभग 20,000 मामले आपराधिक अपील के लंबित हैं। जेना ने कहा कि अदालतों को बैकलॉग को जल्द दूर करने की जरूरत है।
भारतीय अदालतों में 4.83 करोड़ केस पेंडिंग
Bhuvneshwara News : इसी तरह अगस्त 2022 में मॉनसून सत्र के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा को अदालतों में लंबित मामलों ( Pending cases ) की जानकारी दी थी। उन्होंने संसद के मानसून सत्र में एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि देश भर की अदालतों में 4.83 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। निचली अदालतों में 4 करोड़ से अधिक और सुप्रीम कोर्ट में 72,000 से अधिक केस पेंडिंग हैं।











