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Agnipath Ki Agnipariksha में फंसी मोदी सरकार, इससे पहले भी 5 मुद्दों पर हो चुकी है 'किरकिरी'

Janjwar Desk
17 Jun 2022 2:45 AM GMT
Agnipath Scheme Protest : ट्रेन-बस नहीं बीजेपी नेताओं को बनाओ निशाना, भड़काऊ पोस्ट करने वाले RJD नेता पर मुकदमा दर्ज
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Agnipath Scheme Protest : 'ट्रेन-बस नहीं बीजेपी नेताओं को बनाओ निशाना', भड़काऊ पोस्ट करने वाले RJD नेता पर मुकदमा दर्ज

Agnipath Ki Agnipariksha : देश के बेरोजगार युवा मोदी सरकार की अग्निपथ योजना ( Agnipath ) को एक छलावा मान रहे हैं।

Agnipath Ki Agnipariksha : केंद्र सरकार की अग्निपथ स्कीम ( Agnipath Scheme ) कई कारणों से विवादों में आ गई है। खास बात यह है कि इस बार विपक्ष और किसान के बदले युवाओं ने इस योजना के खिलाफ मोर्चा संभाला है। यह एक स्वत: स्फूर्त आंदोलन जैसा है। इसकी शुरुआत बिहार ( Bihar ) से हुई और आधे दर्ज से ज्यादा राज्यों में फैल गई है। विरोध के उच्च स्तर को देखते हुए सरकार ने अभ्यर्थियों की आयु 21 से बढ़ाकर 23 कर दी है। इसके बावजूद मोदी सरकार के लिए इस समस्या से बाहर निकलना मुश्किल है। ऐसा इसलिए कि केंद्र ( modi government ) की इस योजना को बेरोजगार युवा छलावा ( eyewash ) मान रहे हैं।

अग्निपथ सरकार की सेहत के लिए ठीक नहीं

बेरोजगार युवा और छात्रों को लगता है कि यह तो उनके भविष्य के ​साथ खिलवाड़ है। इस बात को लेकर केंद्र सरकार का विरोध देशभर में जारी है। सरकार की अग्निपथ योजना ( Agnipath Scheme ) पर विपक्ष के अलावा पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी सवाल उठाने लगे हैं। सरकार अब भी इस योजना के फायदे गिनवाने में जुटी है। जबकि सरकार को चाहिए कि प्रारंभिक स्तर पर ही चेत जाए। ऐसा न करना सरकार की सेहत के सही नहीं होगा।

फिलहाल बिहार ( Bihar ), हरियाणा, यूपी( Uttar Pradesh ), हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड सहित देश के कई राज्यों में युवा आक्रोशित नजर आ रहे हैं। जगह-जगह से हिंसा और आगजनी की घटनाएं जारी हैं। ये पहला मौका नहीं है जब मोदी सरकार अपने ही किसी फैसले का विरोध झेल रहा हो। आइए हम आपको बताते हैं ऐसी किन किन योजनाओं का राष्ट्रीय स्तर पर हो चुका है विरोध :

1. नोटबंदी

8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे प्रधानमंत्री अचानक ही टीवी पर प्रकट हुए और 500-1000 की करेंसी को गैर कानूनी घोषित कर दिया। इस योजना को डीमोनेटाइजेशन यानी विमुद्रीकरण कहा गया। सरकार के इस फैसले से थोड़ी ही देर में पूर देश मे अफरा-तफरी मच गयी। पुराने नोट जमा करने व नए नोट हासिल की जद्दोजहद में जनता हताश और परेशान नजर आई। लगभग 100 लोगों की जान गई। नोटबंदी करते हुए सरकार ने दावा किया था कि इससे बड़े पैमाने पर कालाधन वापस आएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सर्कुलेशन में मौजूद 99.30 फीसदी 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट वापस आए गए यानी सिर्फ 0.7 प्रतिशत नोट वापस नहीं आये। नक्सलवाद और आतंकवाद पर लगाम लगने की बात भी सही नहीं साबित हुई। साल 2019 में हुआ पुलवामा का आतंकी हमला इसका बड़ा उदाहरण है।

2. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST)

एक देश-एक कानून के नाम पर मोदी सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लेकर आयी थी। इसका मकसद इनडायरेक्ट टैक्स जैसे उत्पाद शुल्क, वैट, सर्विस टैक्स, आदि को खत्म कर एक टैक्स लागू करना था। 29 मार्च 2017 को संसद में पारित होने के बाद जीएसटी 1 जुलाई 2017 से देशभर में लागू हो गया। जीएसटी का विरोध सबसे ज्यादा पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में ही हुआ। टैक्सटाइल हब कहे जाने वाले सूरत में व्यापारियों ने जीएसटी के खिलाफ पर्चा छपवा-छपवाकर जनता में बांटा। कई-कई दिनों तक प्रतिष्ठानों को बंद रख विरोध जताया। दबाव में आकर सरकार को जीएसटी कानून में संशोधन करने पड़े।

3. सीएए-एनआरसी

मोदी सरकार सरकार साल 2019 में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए 6 समुदायों (हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी) के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने के लिए नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA) लेकर आई थी। इसका मकसद भारत में घुस आये अवैध प्रवासियों को भी बाहर निकालना था लेकिन हुआ क्या, सीएए और एनआरसी के खिलाफ पूरे देश में विरोध उग्र प्रदर्शन हुआ। शाहीन बाग मॉडल का नाम दुनियाभर में चर्चा का विषय बना। ये मॉडल भविष्य में भी सरकार को चुनौती देता रहा।

4. तीन तलाक

सीएए और एनआरसी के साथ केंद्र सरकार संसद में मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) बिल लाकर इंस्टेंट ट्रिपल तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत तो अपराध घोषित कर दिया था। सरकार के इस फैसले का सड़क से संसद तक विरोध हुआ। सरकार को मुस्लिम विरोधी बताने की कोशिश हुई। इस कानून के खिलाफ मुसलमानों के एक वर्ग ने सड़क पर संघर्ष किया। कांग्रेस और AIMIM जैसे दलों ने संसद में मोर्चा खोला। मुस्लिम धर्मगुरू और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसे शरीयत में हस्तक्षेप बताया। तीन तलाक कानून के मुताबिक तीन तलाक देने वाला कानूनन अपराधी माना जाता है। इसके तहत तीन साल की जेल और महिला के भरण-पोषण के लिए मुआवजा देने का प्रावधान है। संसद में इसका विरोध करने वालों की मांग थी कि अपराध संबंधी क्लॉज हटा दिया जाए, उसका मुस्लिम पुरुषों के खिलाफ गलत इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि सरकार ने इन दलीलों को नहीं माना और संसद में 1 अगस्त, 2019 को बिल पारित हो गया।

5. किसान आंदोलन

17 सितंबर, 2020 को खेती से जुड़े तीन कानूनों को संसद में पास किया गया। पहला कानून कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम -2020, दूसरा कानून कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 और तीसरा कानून आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020 था। तीनों कानून को देशभर में जबरदस्त विरोध हुआ। एक साल से ज्यादा समय तक आंदोलन चला। पीएम मोदी द्वारा माफी मांगने और कानून वापस लेने के बाद ही यह आंदोलन समाप्त हुआ। किसानों का आरोप था कि नए कृषि कानूनों की वजह से कृषि क्षेत्र भी कॉरपोरेट यानी पूँजीपतियों के हाथ में चला जाएगा। ऐसा होने से किसानों को नुकसान होगा। किसान आन्दोलन सही मायने में मोदी सरकार के लिए 'अग्निपथ' साबित हुआ था।

Agnipath Ki Agnipariksha : अब अग्निपथ स्कीम का भी वही हश्र होने वाला है। 14 जून को केंद्र सरकार तीनों सेनाओं ( Indian army ) में युवाओं की भर्ती के लिए 'अग्निपथ योजना' लेकर आई। इसके अन्तर्गत 17.5 से 21 साल तक के युवाओं को 4 साल के लिए सेना में भर्ती करने की योजना है। भर्ती हुए युवा अग्निवीर ( Agniveer ) कहलाएंगे। चार साल बाद 75 प्रतिशत बाहर कर दिए जाएंगे। 25 प्रतिशत को आगे 15 साल तक नौकरी करने का मौका मिलेगा। इन युवाओं को पेंशन या ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी। इससे खफा युवा सड़क पर उतर चुके हैं। शुरूआत बिहार से हुई। 6 से 7 राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी है। कई जगहों पर हिंसा और अगजनी भी हो रही है। यानि अग्निपथ योजना मोदी सरकार के लिए अग्निपथ पर चलने जैसा साबित होने वाला है।


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