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Qutub Minar Hearing: '800 सालों से बिना पूजा के हैं देवता तो आगे भी रहने दो', कुतुब मीनार केस पर 9 जून को फैसला

Janjwar Desk
24 May 2022 7:40 PM IST
Qutub Minar Hearing:
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Qutub Minar Hearing: '800 सालों से बिना पूजा के हैं देवता तो आगे भी रहने दो', कुतुब मीनार केस पर 9 जून को फैसला

Qutub Minar Hearing: सुनवाई को दौरान कोर्ट ने कहा, देवता बिना पूजा के पिछले 800 साल से हैं…उन्हें ऐसे ही रहने दो. इस दौरान कोर्ट ने याचिकर्ता के वकील से कहा, मूर्ति के अस्तित्व पर विवाद नहीं है. सवाल यहां पूजा के अधिकार की अनुमति का है. कोर्ट ने जैन से कहा, मेरा सवाल है कि इस अधिकार का वैधानिक समर्थन क्या है?

Qutub Minar Hearing: कुतुब मीनार परिसर में रखी हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों की पूजा का अधिकार मांगने वाली याचिका पर दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. दिल्ली की साकेत कोर्ट 9 जून को अपना आदेश सुनाएगी जिससे यह साफ होगा कि क्या इस मामले की सुनवाई एक बार फिर से सिविल जज के सामने की जाएगी या नहीं क्योंकि इससे पहले सिविल जज शुरुआती तौर पर पूजा का अधिकार मांगने वाली याचिका को खारिज कर चुके हैं.

साकेत कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने दलील देते हुए कहा कि 27 मंदिरों को तोड़कर परिसर बनाया गया था. ये बात साफ है और इसका ज़िक्र भी है वहां परिसर है. यह बात निचली अदालत (सिविल जज) में भी बताई थी पर उन्होंने मामला खारिज कर दिया था.

याचिकाकर्ता के वकील हरि शंकर जैन ने कोर्ट में कहा, जब वहां (Qutub Minar) मंदिर है, जो मस्जिद के अस्तित्व में आने से पहले से था. इसे रीस्टोर क्यों नहीं किया जा सकता है. वकील हरि शंकर जैन ने कहा, वह चाहते हैं कि देवताओं को स्थापित कर पूजा की अनुमति दी जाय. हरि शंकर जैन ने कोर्ट में दलील दी, इसे माना गया है कि पिछले 800 सालों से इसका (Qutub Minar) मुसलमानों ने इस्तेमाल नहीं किया है.

जज ने कहा, अगर इसकी इजाजत दी गई तो संविधान के ताने-बाने और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को नुकसान होगा.

सुनवाई को दौरान कोर्ट ने कहा, वो कौन सा कानूनी अधिकार है, जो आपको इसकी इजाजत देता है. भले ही यह मान लिया जाए कि तोड़कर ढांचा (Qutub Minar) बनाया गया है. कोर्ट ने आग कहा, ये मान लेते है कि मुसलमानों ने इसे मस्जिद (Qutub Minar) के रूप में इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन वो सवाल जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि आप इसे किस आधार पर मंदिर बहाल करने का दावा कर सकते हैं?

याचिकाकर्ता के वकील हरि शंकर जैन ने कहा, अगर यह (Qutub Minar) एक हिंदू मंदिर है तो इसकी इजाजत क्यों नहीं दी जा सकती? कानून ऐसा कहता है. एक बार देवता की संपत्ति हो गई तो वह हमेशा देवता की संपत्ति रहती है. इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील हरि शंकर जैन ने AMASR Act 1958 के सेक्शन 16 का जिक्र किया.

याचिकाकर्ता के वकील हरि शंकर जैन कोर्ट से कहा, जज साहब ने पिछली तारीख पर मेरे आवेदन पर मूर्ति की देखभाल करने का आदेश पारित किया था. कुतुब मीनार (Qutub Minar) में एक लोहे का खंभा है, जो करीब 1600 साल पुराना है. जैन ने कहा, वहां (Qutub Minar) भगवान महावीर का चित्र हैं.

याचिकाकर्ता के वकील हरि शंकर जैन ने कोर्ट को दलील दी, कुतुब मीनार (Qutub Minar) में मूर्तियां हैं. एक लोहे का खंभा है, जो 1600 साल पुराना है. ये स्मारक के बीच में है, जिस पर संस्कृत में श्लोक लिखा गया है.

सुनवाई को दौरान कोर्ट ने कहा, देवता बिना पूजा के पिछले 800 साल से हैं…उन्हें ऐसे ही रहने दो. इस दौरान कोर्ट ने याचिकर्ता के वकील से कहा, मूर्ति के अस्तित्व पर विवाद नहीं है. सवाल यहां पूजा के अधिकार की अनुमति का है. कोर्ट ने जैन से कहा, मेरा सवाल है कि इस अधिकार का वैधानिक समर्थन क्या है? मूर्ति है या नहीं, हम उसे नहीं देख रहे हैं. हम सिविल जज के आदेश के खिलाफ हैं.

एएसआई (ASI) के वकील सुभाष गुप्ता ने कोर्ट में दलील दी और कहा, निचली अदालत का फैसला सही था. उसे नहीं बदला जाए. कानून राष्ट्रीय स्मारक पर पूजा की अनुमति नहीं देता है. वकील सुभाष गुप्ता ने कोर्ट से कहा,एकबार जब स्मारक हमारे कब्जे में आ जाता है, तो फिर उसमें बदलाव नहीं हो सकता है.

वकील गुप्ता ने कहा कोर्ट में कहा, 1991 ऐक्ट के तहत किसी पूजा करने वाली जगह को किसी बदलाव किए जाने से रोकता है. 1958 एक्ट के तहत हमें स्मारकों के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है. वकील सुभाष गुप्ता ने कोर्ट में गुप्ता ने कहा कि जब इस स्मारक को ASI को दिया गया तो उस दौरान इसके खिलाफ अपील करने के लिए 60 दिन का वक्त था. गुप्ता ने निचली अदालत के पुराने आदेश पर बहस करते हुए कहा कि हां, मौलिक अधिकार है, लेकिन यह पूर्ण नहीं होता है और इसीलिए कोर्ट ने पाया कि इस केस में यह अधिकार नहीं दिया जा सकता है.

याचिकाकर्ता के वकील हरि शंकर जैन ने कोर्ट में कहा, शिलालेख पर लिखा हुआ है कि इस जगह का निर्माण 27 मंदिरों के अवशेषों से किया गया है, लेकिन अभी दलील दी जा रही है कि मंदिरों के अवशेष का उपयोग इसे बनाने में नहीं किया गया है.

दोनों पक्षों के बीच सुनवाई के दौरान जोरदार बहस हुई. साकेत कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलालें सुनने का बाद, कुतुब मीनार परिसर (Qutub Minar) में पूजा करने वाली मांग की याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 9 जून तय की है.

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