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अन्वय नाइक सुसाइड: 'मजबूत सबूत' के बावजूद केस बंद करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज ने हैरानी जताई

Janjwar Desk
9 Nov 2020 9:19 AM GMT
अन्वय नाइक सुसाइड: मजबूत सबूत के बावजूद केस बंद करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज ने हैरानी जताई
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बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज ने कहा कि आत्महत्या के मामले में उकसाने के सबूत हैं और फिर भी ए-सारांश रिपोर्ट दायर की गई थी। यह काफी हैरान करने वाला था। मुझे नहीं पता कि फडणवीस सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया...

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज बी.जी. कोलसे-पाटिल ने रविवार को तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा 'मजबूत साक्ष्य' उपलब्ध होने के बावजूद अन्वय नाइक सुसाइड केस को बंद करने पर आश्चर्य व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाना दंड भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत किसी अन्य संज्ञेय अपराध की तरह है। जो कोई भी आत्महत्या के लिए उकसाता है उसे 10 साल की जेल की सजा होती है। यह धारा हत्या या अन्य संज्ञेय अपराधों जैसा गंभीर अपराध बताता है।

खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के कुछ दिनों के बाद उन्होंने खुद उद्धव ठाकरे को लिखा था। लेकिन मैं दावा नहीं करता कि केस मेरी वजह से खोला गया था।

सुसाइड केस को लेकर कोलसे पाटिल ने कहा कि एक सुसाइड नोट पहला प्रमुख सबूत है। हालांकि आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए सहायक सबूत आवश्यक हैं और इस मामले में अन्वय नाइक द्वारा स्टूडियो के काम के बारे में सहायक सबूत, कुछ भुगतान और शेष 82 लाख रूपये के बकाया के सबूत उपलब्ध हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलसे पाटिल ने कहा कि इसका मतलब है कि आत्महत्या के मामले में उकसाने के सबूत हैं और फिर भी ए-सारांश रिपोर्ट दायर की गई थी। यह काफी हैरान करने वाला था। मुझे नहीं पता कि फडणवीस सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया...।'

ए-सारांश रिपोर्ट तब दायर की जाती है जब किसी शिकायत में लगाए आरोप सही पाए जाते हैं लेकिन सबूतों की कमी के लिए कोई प्रोसिक्यूसन (अभियोजन) नहीं सकता है। उन्होंने कहा, एक सारांश रिपोर्ट का मतलब है कि शिकायत सही है। जब शिकायत सही पायी जाती है और अपेक्षित सहायक साक्ष्य उपलब्ध होते हैं तो कोई कारण नहीं कि केस को बंद कर दिया जाए।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी और दो अन्य को पिछले हफ्ते आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 34 (सामान्य इरादे) के तहत गिरफ्तार किया गया था, जो कथित तौर पर आर्किटेक्ट-इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां को आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ा है। रिपब्लिक टीवी द्वारा 2018 में बकाया का भुगतान नहीं किया गया। नाइक ने एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें गोस्वामी और दो अन्य लोगों के नाम शामिल थे।

नाइक की बेटी अदन्या ने कहा, 'मैं टिप्पणी नहीं कर पाऊंगा क्योंकि मामला सब ज्यूडिश है। लेकिन जैसा कि हमने पहले ही अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है, हमने किए गए काम और 82 लाख रुपये के बकाया भुगतान के संबंध में सभी सहायक दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। यह अब पब्लिक डोमेन में है।'

दूसरी ओर, राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा, 'ऐसा लगता है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण गोस्वामी और दो अन्य के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया गया ... फडणवीस सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री ने उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया।' देशमुख ने घोषणा की थी कि उन्होंने मई में अदन्या से शिकायत प्राप्त करने के बाद मामले में नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं।

कोलसे पाटिल ने कहा कि उन्हें यह भी पता चला है कि गोस्वामी को पुलिस हिरासत से भी इनकार कर दिया गया। इस मामले में पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाने और दस्तावेजी सबूत को बरामद करने के लिए हिरासत मांगी थी जैसा कि नाइक ने आरोप लगाए हैं। अदालत ने पुलिस हिरासत को खारिज कर दिया। अदालत ने अपनी विवेकाधीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। लेकिन न्याय के लिए विवेकाधीन शक्तियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

रविवार को गोस्वामी के द्वारा वकील से मिलने देने के आरोप कोलसे पाटिल ने कहा, 'अभियुक्त को वकील से मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए ...।'

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