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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मुआवजे की राशि के लिए 'Death Certificate' अनिवार्य नहीं, राज्य सरकारें देगी 50 हजार का अनुग्रह राशि

Janjwar Desk
5 Oct 2021 5:36 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मुआवजे की राशि के लिए Death Certificate अनिवार्य नहीं, राज्य सरकारें देगी 50 हजार का अनुग्रह राशि
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सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मरे लोगों के परिजनों के हित में फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी सरकार यह कहकर मुआवजा देने से इंकार नहीं कर सकती कि डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण कोरोना नहीं लिखा हुआ है...

जनज्वार| दिल्ली| कोरोना महामारी में देश के लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाईं। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने मृतक के परिजनों का ढाढस बांधने के लिए भारी भरकम मुआवजे का ऐलान भी कर दिया। लेकिन कोरोना से मौत के डेढ़-दो साल बाद भी कई ऐसे परिवार है, जो मुआवजे की राशि के लिए दर-दर की ठोकरें कर रहें हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सोमवार, 4 अक्टूबर को केंद्र सरकार और राज्यों को निर्देश दिए हैं। उच्चतम न्यायालय ने कोरोना से मौत होने पर पीड़ित परिवारों को कम से कम 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में पीड़ित परिवारों को राहत देते हुए कहा कि मुआवजा पाने के लिए अब डेथ सर्टिफिकेट पर कोविड से मौत लिखा होना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की राशि राज्य सरकारें अपने आपदा प्रबंधन कोष से देंगी। केंद्र या राज्य सरकार चाहें तो इस राशि को अपनी इच्छा से बढ़ा भी सकते हैं। साथ ही, राज्य या केंद्र सरकारों को पारदर्शिता के लिए लाभार्थियों की सूची प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में प्रकाशित करनी पड़ेगी। साथ ही इस योजना को लाभ उन मृतकों के परिजनों को मिल सकेगा जिनके परिवार के किसी सदस्य ने कोरोना के कारण आत्महत्या कर ली हो।

डेथ सर्टिफिकेट में कोविड से मौत नहीं तो भी मिलेगा मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मरे लोगों के परिजनों के हित में फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी सरकार यह कहकर मुआवजा देने से इंकार नहीं कर सकती कि डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण कोरोना नहीं लिखा हुआ है। अगर सर्टिफिकेट पहले जारी किए जा चुके हैं और परिवार के किसी सदस्य को उससे आपत्ति है तो वह संबंधित अथॉरिटी से बदलाव की अपील भी कर सकते हैं। RT-PCR जैसे कोई भी अन्य दस्तावेज जिसमें मृत को कोरोना होने की पुष्टि हो, उसे दिखाने पर अथॉरिटी को डेथ सर्टिफिकेट में बदलाव करना अनिवार्य होगा। अगर इसके बाद भी परिवार को कोई आपत्ति है तो वह ग्रीवांस रीड्रेसल कमिटी के सामने जाकर अपनी समस्या रख सकता है। यहां 30 दिनों के भीतर पीड़ित परिजनों की समस्या को दूर करके मुआवजा देने का प्रावधान होगा।

मुआवजा पाने की पूरी प्रकिया

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मुआवजे की राशि के लिए के आवंटन के लिए राज्य सरकारें ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार करेगी। जो भी मुआवजे के दावेदार होंगे वे ऑनलाइन ही राज्य सरकार के वेबसाइट पर सभी जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे। इसके बाद सभी दस्तावेज वेरिफाई होंगे और 30 दिनों में मुआवजे की राशि पीड़ित परिवारों को दी जाएगी। राज्य सरकारें स्टेट डिजास्टर रिस्पोंस फंड (SDR) से ये पैसे देगी और डिपार्टमेंट ऑफ डिजास्टर मेनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) पैसे बांटेगी। यह राशि आधार लिंक होगी और सीधे मृतक के परिजनों के खाते में मुआवजे की राशि मिलेगीजाएगी।

अन्य राहत स्कीम से अलग होगी ये योजना

जस्टिस एम आर साह के नेतृत्व वाली बेंच ने निर्देश देते हुए ये भी स्पष्ट किया ये योजना पहले से केंद्र या राज्य सरकारें द्वारा चलाई जा रही किसी अन्य राहत योजना से अलग होगी। अगर कोई राज्य सरकार पीड़ित परिवारों को अपने स्तर से पहले से कोई राहत मुआवजा दे रही है, फिर भी राज्यों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 50 हजार राशि बतौर मुआवजा देना होगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार पर लगातार कोरोना से मृत के परिजनों को मुआवजा देने को लेकर दबाव बनाया था जिसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था, जिसमें कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को 50 हजार रुपये देने को लेकर सहमति जताई गई थी। सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, कोविड-19 से मौत होने की बात प्रमाणित होने पर अनुग्रह राशि दी जाएगी। मुआवजे की अनुग्रह राशि राज्य आपदा मोचन कोष (SDRF) से राज्यों द्वारा मुहैया की जाएगी।

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