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Supreme Court के दो न्यायाधीशों ने अपने ही बनाए सिस्टम पर उठाए सवाल, जानें क्या कहा?

Janjwar Desk
15 Sep 2022 6:51 AM GMT
Motor Accident Claim : मृतक की संपत्ति और व्यवसाय मिलने के बाद भी आश्रित आय के नुक्सान के लिए मुआवजे के हकदार हैं - सुप्रीम कोर्ट
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Motor Accident Claim : मृतक की संपत्ति और व्यवसाय मिलने के बाद भी आश्रित आय के नुक्सान के लिए मुआवजे के हकदार हैं - सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच को ऐतराज इस बात से है कि नए सिस्टम में जजों को सुनवाई के लिए समय नहीं मिल पा रहा है। मुकदमों की भरमार से बेंच दब रही हैं।

नई दिल्ली। बेहतर कामकाज के तरीके हमेशा से बहस का विषय रहा है। इसको लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) के दो न्यायाधीशों ने ( SC Judges ) अपने ही बनाए सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। दोनों न्यायाधीशों ने कुछ मुद्दों पर ऐतराज जताया है। उन्होंन वर्तमान व्यवस्था ( Judicial sysytem ) में सुधार पर भी जोर दिया है। ताकि न्यायिक कामकाज और बेहतर हो सके।

दरअसल, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच ने कहा कि नए लिस्टिंग सिस्टम में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सुनवाई का प्रावधान है। इससे उनके पास किसी भी मामले पर फैसला लेने के लिए बहुत कम समय बचता है। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि कि दोपहर के सेशन में केसों की भरमार हो जाती है। ये बात दोनों जजों ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कही। जस्टिस एसके कौल सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के सदस्य भी हैं। कॉलेजियम की गतिविधियों का निष्पादन करने के लिए उन्हें समय निकालना होता है।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच को इस बात पर ऐतराज है कि मुकदमों की भरमार से बेंच दब रही हैं। समय नहीं मिलेगा तो कैसे बेंच फैसला कर पाएंगी। नए सिस्टम में बिलकुल भी समय नहीं मिल पा रहा जो बेंच मामले की सुनवाई कर सकें।

कॉलेजियम की व्यवस्था क्यों?

खास बात ये है कि कॉलेजियम सिस्टम ( Collegium system ) का भारत के संविधान में कोई जिक्र नही है। साल 1998 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसलों के जरिए यह प्रभाव में आया था। कॉलेजियम सिस्टम में सुप्रीम कोर्ट ( supreme Court ) के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों का एक पैनल जजों की नियुक्ति और तबादले की सिफारिश करता है। कॉलेजियम की सिफारिश दूसरी बार भेजने पर सरकार के लिए उसे मानना जरूरी होता है।

बता दें कि सीजेआई यूयू ललित ( CJI UU Lalit ) ने अपने पहले दिन 900 से अधिक याचिकाओं को सूचीबद्ध कराया था। इनमें हिजाब विवाद, सिद्दीकी कप्पन, गौतम नवलखा समेत कई मामले शामिल हैं। पहले रोस्टर के रूप में सीजेआई ने 15 बेंच में प्रत्येक को लगभग 60 मामले सौंपे। यानि 900 मामले की सुनवाई होनी है। इन याचिकाओं से निपटने के लिए सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शाम चार बजे तक अधिकतम 270 मिनट का समय मिलता है। नए सिस्टम में औसतन एक मामले को निपटाने में चार मिनट से थोड़ा अधिक समय मिल रहा है। जस्टिस एमआर शाह की अगुवाई वाली बेंच को सबसे ज्यादा 65 याचिकाएं सौंपी गई हैं।

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