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उत्तर प्रदेश

8 पुलिसवालों की हत्या के बाद बिकरु समेत आसपास के 500 फोन नम्बर सर्विलांस पर, दर्जनभर की गिरफ्तारी

Janjwar Desk
4 July 2020 7:53 AM GMT
8 पुलिसवालों की हत्या के बाद बिकरु समेत आसपास के 500 फोन नम्बर सर्विलांस पर, दर्जनभर की गिरफ्तारी
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पिछले 24 घंटे में यूपी का सबसे बड़ा मोस्ट वॉन्टेड बन चुके विकास दुबे के गांव से पुलिस ने दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे घटना क्रम और हमले के मास्टर माइंड रहे विकास के बारे में पूछताछ करने की तैयारी चल रही है। साथ ही विकास की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने करीब 500 मोबाइल फोन नंबर भी सर्विलांस पर लगाए हैं...

कानपुर, जनज्वार। पिछले 24 घंटे में यूपी का सबसे बड़ा मोस्ट वॉन्टेड बन चुके विकास दुबे के गांव से पुलिस ने दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे घटना क्रम और हमले के मास्टर माइंड रहे विकास के बारे में पूछताछ करने की तैयारी चल रही है। साथ ही विकास की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने करीब 500 मोबाइल फोन नंबर भी सर्विलांस पर लगाए हैं। पूरे बिकरू गांव में भारी पुलिस बल तैनात है, गांव छावनी में तब्दील नजर आ रहा है। घटना के बाद से ही गांव और आस-पास के क्षेत्रों में पुलिस का सर्च ऑपरेशन चल रहा है।

विकास दुबे के गांव बिकरु से अब तक करीब 2 दर्जन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। यही नहीं पुलिस की फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर बारीकी से छानबीन कर रही है। डीजीपी खुद जाकर गांव का दौरा कर चुके हैं। इसके साथ ही गांव से जोड़ने वाले रास्तों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।




गौरतलब है कि विकास उर्फ पंडीजी ने यह खूनी खेल राहुल तिवारी नाम के शख्स की उस एफआईआर के बाद रची, जो गुरुवार 2 जुलाई को चौबेपुर थाने में दर्ज कराई गई थी। इस संबंध में थाने के दीवान यशवीर सिंह ने बताया कि विकास समेत उसके तीनों भाइयों की हिस्ट्रीशीट है। इस खूनी खेल के पीछे राहुल की दी गई एफआईआर वजह बनी। क्योंकि उसी की शिकायत पर पुलिस जांच के लिए विकास के गांव बिकरू गई थी।

दीवान चौबेपुर यशवीर सिंह ने बताया की राहुल ने विकास पर अपने ससुर लालू की जमीन अपने नाम कराये जाने की एफआईआर कराई थी। एफआईआर में उसने लिखवाया था कि विकास उसे रास्ते से जबरन अपनी गाड़ी में डालकर अपने घर ले गया था, जहां उसने मुझे मार पीटकर एक कमरे में बंद कर दिया था। किसी तरह रात में मौक़ा देखकर वो वहां से निकल भागा था।

गुरुवार 2 जुलाई को दर्ज इसी मामले की जांच के लिए ही पुलिस टीम रात 1 बजे बिकरू गांव गई थी। हालांकि बिकरू गांव में पुलिस को पहले से विरोध की आशंका थी। इसलिए कई थानों की फ़ोर्स लेकर खुद सीओ देवेंद्र मिश्रा वहां गए थे। दीवान यशवीर सिंह का कहना है कि पूरे मामले की हकीकत से पुलिस भी वाकिफ थी। लिहाजा शिकायतकर्ता राहुल के घर पर उसकी सुरक्षा के लिए पुलिस टीम भेजी गई थी। लेकिन उसके घर पर कोई मौजूद नहीं था।


विकास दुबे की तलाश में यूपी पुलिस पूरी रात कई जगहों पर छापेमारी करती रही। 8 पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर मारने का आरोपी विकास दुबे घटना के बाद किसी अज्ञात जगह छिप गया है। इधर सूत्रों से जानकारी मिली है कि चौबेपुर थाने के ही एक दारोगा ने विकास दुबे को पुलिस रेड की सूचना दी थी। पुलिस की करीब बीस टीमें अलग अलग जिलों में दबिश देती रहीं। ये वो जगह थी, जहां पर विकास दुबे के रिश्तेदार और परिचित रहने बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में 12 और लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ चल रही है। पुलिस ने इन सभी को मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर उठाया है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को पुलिस ने उठाया है उनकी पिछले 24 घंटे में विकास दुबे की बातचीत हुई थी। हैरानी की बात है कि विकास के फोन की कॉल डिटेल में कुछ पुलिसवालों के नंबर भी सामने आए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि चौबेपुर थाने के ही एक दारोगा ने विकास दुबे को पुलिस के आने की जानकारी पहले ही दे दी थी। शक के घेरे में एक दारोगा, एक सिपाही सहित एक होमगार्ड भी है। तीनों की कॉल डिटेल के आधार पर उनसे पूछताछ चल रही है।

आईजी कानपुर रेंज मोहित अग्रवाल ने ऐलान किया है कि जो शख्स कानपुर मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मियों की मौत के जिम्मेदार कुख्यात अपराधी विकास दुबे की जानकारी देगा, उसे 50 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास दुबे का ठिकाना बताने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। फिलहाल, विकास दुबे के बारे में पता लगाने के लिए कई लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है। कानपुर में चौबेपुर के जिस थाना क्षेत्र में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने 8 पुलिस कर्मियों की हत्या को अंजाम दिया है, उसी थाने में उसके के खिलाफ 60 संगीन केस दर्ज हैं। कानपुर में इस मुठभेड़ के बाद विकास दुबे यूपी पुलिस का मोस्ट वॉन्टेड बन गया है।

बहरहाल, हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जब उसके गांव में गई थी, तो जेसीबी मशीन लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया था। जैसे ही पुलिसकर्मी सीओ देवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में पैदल आगे बढ़े तो विकास के गुर्गों ने तीन दिशाओं से उन पर फायरिंग शुरू कर दी थी। इस हमले में यूपी पुलिस के सीओ समेत 8 पुलिसकर्मी मार दिए गए थे।

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