Jawahar Bagh kaand : शहीद मुकुल द्विवेदी की पत्नी ने क्यों कहा - 'योगी सरकार से मुझे रत्ती भर भी नहीं है न्याय की उम्मीद'

Jawahar Bagh kaand : शहीद मुकुल द्विवेदी की पत्नी ने क्यों कहा - ‘योगी सरकार से मुझे रत्ती भर भी नहीं है न्याय की उम्मीद’
Jawahar Bagh kaand : छह साल पहले उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में जवाहर बाग कांड ( Jawahar Bagh kaand ) हुआ था। इस कांड में वहां के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव की मौत हुई थी। साथ ही जवाहर बाग से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसक घटना में 27 अतिक्रमणकारियों की जान चली गई थीं। गुरुवार यानि दो जून को शहीद मुकुल द्विवेदी को श्रद्धांजलि देने उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी जवाहर बाग पहुंची थीं।
इस बात को याद रखे सरकार
जवाहर बाग ( Jawahar Bagh kaand ) से अतिक्रमणकारियों को हटाने में मारे गए तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ( Archana Dwivedi ) भावुक हो गईं। वह अपने आंसू को नहीं रोक पाईं। उन्होंने कहा कि उन्हें योगी सरकार ( Yogi Government ) से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची है। वह यहां अपने पति मुकुल द्विवेदी की शहादत के दिन उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करने आई हैं। मैं, उन्हें जिंदगी भर नहीं भूल सकती। सरकार कभी याद रखे, मुकुल द्विवेदी ने अपनी शहादत सरकार कामकाज में प्रतिबद्धता की वजह से दी थी। अगर ऐसे अधिकारियों से साथ अन्याय होता रहा तो कोई भी अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम नहीं करेगा। योगी सरकार संवेदनहीनता का परिचय न दे।
Yogi Government ने अभी तक न्याय नहीं किया, अब उम्मीद भी नहीं है
अर्चना द्विवेदी ( Archana Dwivedi ) ने कहा कि जवाहर बाग कांड के पूरे छह साल बीत गए। जवाहर बाग कांड ( Jawahar Bagh kaand ) के समय भारतीय जनता पार्टी ने बढ़-चढ़कर वादे किए थे, लेकिन अब छह वर्ष का लंबा अंतराल बीत जाने के बाद भी सरकार ( Yogi Government ) ने उनकी शहादत के साथ न्याय नहीं किया। न तो अपने वादे के मुताबिक इस बाग का नामकरण उनके नाम पर किया, न ही बाग में उनकी प्रतिमा की स्थापना की और न ही उन्हें एक शहीद का दर्जा दिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं सरकार की कार्रवाई से रत्ती भर भी संतुष्ट नहीं हूं। होऊं भी कैसे?
दोषियों की अभी तक पहचान नहीं हुई
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सीबीआई अभी तक मामले की जांच पूरी नहीं कर सकी है। दोषियों को कड़ी सजा मिलने की बात तो बहुत दूर, उनका पहचान तक नहीं हो सकी कि अतिक्रमणकारी कौन थे? कहां से आए और कैसे सरकारी बाग पर काबिज हो गए?
योगी ने विभागीय प्रस्ताव को खारिज क्यों किया?
हमें बताया गया था कि नगर निगम ने मथुरा में चौराहों का नामकरण शहीदों के नाम पर करने का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जांच तक आगे नहीं बढ़ाई गई। अर्चना द्विवेदी ( Archana Dwivedi ) ने कहा कि उद्यान विभाग से पता चला है कि सरकार ( Yogi Government ) ने बाग का नामकरण और स्मारक बनाए जाने से संबंधित फाइल भी वापस कर दी है।
अब मांट के विधायक ने किया मुकुल की पत्नी से ये वादा
दूसरी तरफ मांट से विधायक राजेश चौधरी ने कहा कि मैं खुद मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी ओर से उनका स्मारक बनवाने का प्रतिवेदन प्रस्तुत करूंगा। उनकी याद में शहीद स्मारक तो बनना ही चाहिए। इन दिनों मथुरा दौरे पर आईं सांसद हेमामालिनी ने भी जवाहर बाग पहुंचकर शहीद अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी।
सरगना रामवृक्ष यादव भी मारा गया था
Jawahar Bagh kaand : बता दें कि उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh News ) के मथुरा ( Mathura News ) जिले में 6 साल पहले 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले उद्यान विभाग के जवाहर बाग ( Jawahar Bagh kaand ) पर दो वर्ष से अवैध कब्जा जमाए बैठे अतिक्रमणकारियों को खदेड़ने के प्रयास के दौरान हुई भीषण हिंसा हुई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह के थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव व 27 अतिक्रमणकारियों की हिंसक घटना में मौत हुई थी। हिंसक घटना में अतिक्रमणकारियों का सरगना रामवृक्ष यादव भी मारा गया था।
(जनता की पत्रकारिता करते हुए जनज्वार लगातार निष्पक्ष और निर्भीक रह सका है तो इसका सारा श्रेय जनज्वार के पाठकों और दर्शकों को ही जाता है। हम उन मुद्दों की पड़ताल करते हैं जिनसे मुख्यधारा का मीडिया अक्सर मुँह चुराता दिखाई देता है। हम उन कहानियों को पाठक के सामने ले कर आते हैं जिन्हें खोजने और प्रस्तुत करने में समय लगाना पड़ता है, संसाधन जुटाने पड़ते हैं और साहस दिखाना पड़ता है क्योंकि तथ्यों से अपने पाठकों और व्यापक समाज को रू-ब-रू कराने के लिए हम कटिबद्ध हैं।
हमारे द्वारा उद्घाटित रिपोर्ट्स और कहानियाँ अक्सर बदलाव का सबब बनती रही है। साथ ही सरकार और सरकारी अधिकारियों को मजबूर करती रही हैं कि वे नागरिकों को उन सभी चीजों और सेवाओं को मुहैया करवाएं जिनकी उन्हें दरकार है। लाजिमी है कि इस तरह की जन-पत्रकारिता को जारी रखने के लिए हमें लगातार आपके मूल्यवान समर्थन और सहयोग की आवश्यकता है।
सहयोग राशि के रूप में आपके द्वारा बढ़ाया गया हर हाथ जनज्वार को अधिक साहस और वित्तीय सामर्थ्य देगा जिसका सीधा परिणाम यह होगा कि आपकी और आपके आस-पास रहने वाले लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाली हर ख़बर और रिपोर्ट को सामने लाने में जनज्वार कभी पीछे नहीं रहेगा, इसलिए आगे आयें और जनज्वार को आर्थिक सहयोग दें।)





