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Prison Statistics India 2021: बिना सजा के भारत की जेलों में बंद हैं 72 हजार कैदी, सबसे ज्यादा यूपी में

Janjwar Desk
12 March 2022 6:47 AM GMT
Prison Statistics India 2021: बिना सजा के भारत की जेलों में बंद हैं 72 हजार कैदी, सबसे ज्यादा यूपी में
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Prison Statistics India 2021: अदालत पर मुकदमों का बोझ और जेल में कानूनी सहायता की कमी की वजह से हजारों की संख्या में कैदी बिना सजा पाये यहां तक की बिना मुकदमा चले ही वर्षों से देश के अलग-अलग राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की जेलों में बंद हैं।

Prison Statistics India 2021: अदालत पर मुकदमों का बोझ और जेल में कानूनी सहायता की कमी की वजह से हजारों की संख्या में कैदी बिना सजा पाये यहां तक की बिना मुकदमा चले ही वर्षों से देश के अलग-अलग राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की जेलों में बंद हैं। कईयों की जमानत भी हो गई है, लेकिन जमानती नहीं मिलने की वजह से भी जेल में रहने को मजबूर हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार देश भर की जेलों में तीन लाख 71 हजार 848 कैदी बंद हैं इसमें से एक लाख 30 हजार 335 करीब तीन माह से बंद हैं, 72 हजार कैदी तीन से छह माह से, 62 हजार 296 छह माह से एक वर्ष, 54 हजार 287 एक से दो वर्ष, 29 हजार 194 दो से तीन वर्ष, 16603 तीन से पांच वर्ष और 7128 कैदी पांच वर्ष से अधिक समय से जेलों में बिना सजा पाये सिर्फ आरोप लगने की वजह से जेलों में बंद हैं। 31 दिसंबर-2020 तक राज्य सरकार की ओर से यह आंकड़ा केंद्र को सौंपी गई है।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि जेलों में बंद कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए बहुत सारी पहल की गई है, लेकिन इसके बावजूद यह हालात हैं। लिहाजा अंडर ट्रायल कैदियों के मामलों के जल्द निपटारे के लिए केन्द्र के साथ-साथ राज्यों की ओर से और जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं। हालांकि मुकदमों की जल्द निपटारे की जिम्मेदारी राज्यों सरकारों की होती है।

केन्द्र सरकार का कहना है कि विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता देने के लिए देशभर की जेलों में 1091 लीगल सर्विस क्लीनिक की स्थापना की गई है, जहां पंजीकृत अधिवक्ता कैदियों को कानूनी सहायता देते हैं। इसके अलावा 3240 अदालतों में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई की व्यवस्था की गई है और इन्हें देशभर के 1272 जेलों को जोड़ा गया है।

बिना सजा के 5 वर्ष से ज्यादा समय से जेल में बंद कैदी

केन्द्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि विचाराधीन कैदियों की सहायता के लिए कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (सीआरपीसी) में बदलाव किया गया है। इसमें धारा 436ए को जोड़ा गया है। इसके अनुसार वैसे विचाराधीन कैदी जो किसी अपराध में जेल में बंद हैं और उस अपराध में जितनी अधिकतम सजा है और उसका आधा समय जेल में बिता लिया है और मुकदमा अभी भी अदालत में चल ही रहा है तो वैसे कैदियों को तुरंत जमानत मिल जानी चाहिये, तो उसे हर हाल में जमानत मिल जानी चाहिये।

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