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उत्तर प्रदेश

भाजपा विधायक ने पूछा सुरक्षा का सवाल तो योगी सरकार ने दिया आदेश, 'सूबे में ब्राह्मणों के पास कितने हथियार हैं पता करो'

Janjwar Desk
31 Aug 2020 3:34 AM GMT
भाजपा विधायक ने पूछा सुरक्षा का सवाल तो योगी सरकार ने दिया आदेश, सूबे में ब्राह्मणों के पास कितने हथियार हैं पता करो
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उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से यह आदेश एक भाजपा विधायक द्वारा इस संबंध में पूछे गये सवाल का जवाब देने के लिए दिया गया, हालांकि अब सरकार इससे पीछे हट चुकी है...

जनज्वार। उत्तरप्रदेश सरकार ने राज्य में कितने ब्रह्मणों (Brahmin) के पास हथियार हैं, इसकी गिनती का आदेश राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सभी डीएम को दिया। ऐसा आदेश विधानसभा में ब्राह्मणों की सुरक्षा पर एक भाजपा विधायक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दिया। विधायक द्वारा विधानसभा में गृहमंत्री से पूछे गए सवाल में ब्राह्मणों की हत्या व सुरक्षा से संबंध में सवाल तो थे ही, साथ ही यह भी पूछा गया था कि कितने ब्राह्मणों को सुरक्षा Brahmin Security in Uttar Pradesh) के लिए हथियार के लाइसेंस दिए गए हैं। राज्य सरकार ने इसी प्रश्न का जवाब देने के लिए इस तरह का आदेश दिया।

उत्तरप्रदेश के गृहमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) स्वयं हैं, ऐसे में सदन में विधायक का यह सवाल सीधे तौर पर उन्हीं से था। सुल्तानपुर जिले के लम्भुआ से भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी ने 16 अगस्त को उत्तरप्रदेश विधानसभा के प्रधान सचिव को विधानसभा के नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार, सवाल उठाते हुए एक नोट भेजा था।

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देवमणि द्विवेदी ने अपने सवाल में यह पूछा था कि तीन वर्षाें में उत्तरप्रदेश में कितने ब्राह्मण मारे गए, कितने हत्यारे गिरफ्तार किए गए, कितने दोषी ठहराए गए, ब्राह्मणों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं, क्या सरकार प्राथमिकता के आधार पर ब्राह्मणों को शस्त्र लाइसेंस प्रदान करेगी, कितने ब्राह्मणों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया और उनमें कितनों को शस्त्र प्रदान किया गया।

इस सवाल के बाद उत्तरप्रदेश सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेज कर हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले व हथियार प्राप्त करने वाले ब्राह्मणों का विवरण मागा था। राज्य के गृह विभाग के अवर सचिव प्रकाश चंद्र अग्रवाल के हस्ताक्षर से 18 अगस्त को यह पत्र जारी किया गया था। इसमें 21 अगस्त तक सभी जिलों से विवरण मांगा गया था।

हालांकि सरकारी सूत्रों ने अब इस मुद्दे पर पीछे हटने का संकेत दिया है। यह कहा गया है कि इस प्रक्रिया को अब आगे नहीं बढाया जा सकता है। 21 अगस्त तक जिलों को इमेल से विवरण भेजना था, जिसके जवाब में एक जिले ने ब्यौरा भेज भी दिया था।

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