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उत्तर प्रदेश

गैंगस्टर विकास दुबे के गुर्गों ने मारे गये पुलिसवालों लाद दिया था एक के ऊपर एक, लगे थे जलाने की फिराक में

Janjwar Desk
4 July 2020 4:32 AM GMT
गैंगस्टर विकास दुबे के गुर्गों ने मारे गये पुलिसवालों लाद दिया था एक के ऊपर एक, लगे थे जलाने की फिराक में
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घटनास्थल की तस्वीरें देखने से पता चलता है कि कैसे खून से लथपथ पुलिसवाले अपनी जान बचाने को इधर से उधर भागे होंगे। कोई किसी के घर मे घुसा, कोई बाथरूम में छिपा। एक पुलिसवाले को चारपाई में गिराकर बदमाशों ने कई गोलियां मारीं....

मनीष दुबे की रिपोर्ट

कानपुर। कानपुर के बिकरू गांव की सड़कें पुलिसवालों के खून से रंगी हुई हैं। बदमाशों ने बड़ी साजिश कर रखी थी, वह मारे गए पुलिसवालों के शवों को जला देना चाहते थे, जिसके चलते बदमाशों ने एक के ऊपर एक सभी शवों को इकट्ठा कर दिया था। पुलिस की गाड़ियों को भी फूंकने की तैयारी थी, लेकिन तभी भारी पुलिस बल पहुंचने पर बदमाश अपने मंसूबों में कामयाब न हो सके और उन्हें भागना पड़ा।

जेल जैसी मजबूत दीवारों के बना किले जैसा विकास दुबे का घर जिसके तीन तरफ से सड़कें निकल रही हैं। दीवारों के ऊपर कंटीले तार लगे हुए हैं। पूरा घर सीसीटीवी से लैस है। तीनों तरफ की सड़कों पर तकरीबन सवा सौ मीटर की दूरी तक खून ही बिखरा पड़ा था। घटनास्थल की तस्वीरें देखने से पता चलता है कि कैसे खून से लथपथ पुलिसवाले अपनी जान बचाने को इधर से उधर भागे होंगे। कोई किसी के घर मे घुसा, कोई बाथरूम में छिपा। एक पुलिसवाले को चारपाई में गिराकर बदमाशों ने कई गोलियां मारीं।

यहां से की विकास दुबे ने अपराध की दुनिया में एंट्री

वर्ष 1990 में अपने किसान पिता रामकुमार की बेइज्जती का बदला लेने के शुरू हुआ विकास के अपराध का सिलसिला पिछले 3 दशक से जारी है। उसने नीची जातियों के कई लोगों को पीट दिया था। तब थाने में विकास के खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र में अन्य जातियों के दबदबे को कम करने के लिए विकास को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने लगा। शिवली के नेता लल्लन बाजपेई से विकास की चुनावी रंजिश चलती थी। तब पूर्व विधायक नेकचंद पांडेय ने विकास पर हाथ रखा था, क्योंकि लल्लन कहीं न कहीं नेकचंद के लिए भी कांटा था।

1992 में विकास ने बिकरू में ही एक दलित युवक की हत्या कर दी थी, यह उसका पहला हत्या का मुकदमा था, जिसमें उसने गांव के ही छुन्ना उर्फ सोनेलाल की 315 बोर के तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्या के बाद विकास पर एससी-एसटी एक्ट के मामला दर्ज हुआ था। तब बिकरु गांव शिवली कोतवाली में आता था। इस अपराध के बाद 2002 तक विकास पर हत्या, गैंगस्टर, अवैध शस्त्र अधिनियम, जानलेवा हमला, 7 क्रिमिनल एक्ट समेत 28 मुकदमे कोतवाली शिवली में दर्ज हो चुके थे।

विकास के 30 वर्ष पुराने राजनीतिक, आपराधिक जीवन में ग्राम पंचायत, जिला पंचायत और प्रधानी उसके आशीर्वाद के बगैर नहीं चलती थी। उस पर 60 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए। विकास की क्षेत्र में पंडीजी के नाम से तूती बोलती थी। ब्लॉक शिवराजपुर, शिवली नगर पंचायत तथा ग्राम पंचायत में बिना विकास की दखल के किसी प्रत्याशी का जीत पाना नामुमकिन बात होती है। विकास की पत्नी ऋचा दुबे 2015 में घिमऊ जिला पंचायत में रिकॉर्ड मतों से जीती थी, जिसके बाद भाई अनुराग से बैर हो गया था। चौबेपुर व शिवराजपुर में कोई फैक्ट्री, उधमी, कोल्ड स्टोर बिना विकास की मर्जी के नहीं चल पाते थे।

51 वर्षीय विकास दुबे उर्फ पंडीजी के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिकरु ग्राम पंचायत के अलावा आंटी सखरेज, कंजति, काशीराम निवादा, तकीपुर, भीठी, देवकली, सकरवां आदि तमाम क्षेत्रों में प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य वही होता था, जिसको पंडीजी का आशीर्वाद मिलता था। घिमऊ से पत्नी ऋचा को प्रत्याशी बनाने के लिए एक सत्ताधारी पार्टी की जिलाध्यक्ष और उसके बेटों से विकास की तनातनी की खूब चर्चा रही थी।

कोतवाली शिवली के अंदर 12 अक्टूबर, 2001 को भाजपा सरकार के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की विकास दुबे ने थाने में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मंत्री का गनर और ड्राइवर इस हत्या के गवाह थे। पुलिस ने मुख्य आरोपी विकास के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया। बाद में अदालत में पुलिस व अन्य गवाह मुकर गए। गवाहों ने कहा उन्होंने हत्या करते विकास को नहीं देखा था, जिसके बाद सबूतों के अभाव में अदालत ने 2005 में विकास को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया था। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में विकास का नाम सुर्खियों में आ गया था।

अब विकास की योजना खुलकर राजनीति में आने की थी। वह 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा था। जिसके चलते उसने भाजपा और बसपा की टिकट पर नजर गड़ा रखी थी। गैंगस्टर विकास का पोलिटिकल कैरियर भी कम चौंकाने वाला नहीं रहा। सूबे में जब जिस पार्टी की सरकार रही, वह उसी पार्टी के मजबूत नेताओं के संरक्षण में चल निकलता था। उसकी राजनीतिक पकड़ सबसे अधिक बसपा सरकार में रही। तब से लेकर अब तक वह बसपा, सपा तथा भाजपा के भी कई बड़े नेताओं के संपर्क में रहा।

बिकरु में हुए वीभत्स हत्याकांड के बाद गांव के कई घरों में ताले पड़ चुके हैं और गांव वालों ने अपने मुंह पर भी ताला लगा लिया है। लगभग 2500 की आबादी वाले इस गांव के सन्नाटे को पुलिस व मीडिया वालों की आवाजें ही तोड़ रही हैं। पुलिस पूछताछ के लिए बैठाए गए लोगों के अलावा गांव में किसी भी आदमी का कोई अता-पता नहीं है। अधिकतर घरों में ताले लटक रहे हैं या फिर घर की बुजुर्ग महिला घर के बाहर चारपाई डालकर बैठी मिल रही।

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