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Uttarakhand News : सुंदरखाल गांव के दलित है मूलभूत सुविधा से वंचित, बिजली-पानी मांगने पर BJP विधायक करता है गुंडागर्दी

Janjwar Desk
12 Feb 2022 6:14 AM GMT
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Uttarakhand News : सुंदरखाल गांव के एक निवासी ने बताया किस गांव के बगल से एक नदी गुजरती है, जब बारिश होती है तो बाढ़ आ जाती हैं, बाढ़ से पूरा गांव तबाह हो जाता है, उनका कहना है कि सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है...

Uttarakhand News : उत्तराखंड के वनग्राम सुंदरखाल गांव में दलित की दयनीय स्थिति हो रही है। सुंदरखाल के दलितों ने अपनी दुख भरी दास्तां जनज्वार के साथ साझा की है। उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बाढ़ से परेशान है गांव

सुंदरखाल गांव के एक निवासी ने बताया किस गांव के बगल से एक नदी गुजरती है| जब बारिश होती है तो बाढ़ आ जाती हैं और यह नदी आगे की ओर आकर गांव को तबाह कर देती है। बाढ़ से पूरा गांव तबाह हो जाता है| यहां के निवासी बहुत परेशान है। उनका कहना है कि सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है| वनग्राम सुंदरखाल गांव को विस्थापित भी नहीं करती हैं। यहां कोई मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है।

गांव के परिवार नहीं है सुरक्षित

गांव के निवासी ने बताया कि जब हम काम पर निकल जाते हैं तो हमें यह चिंता रहती है कि हमारा परिवार सुरक्षित है या नहीं। उनका कहना है कि इस गांव में सुरक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं है। साल 2010 में गांव की 10 महिलाओं को बाघ ने हमला कर मार दिया था। जिस कारण पूरा गांव दहशत में था और शाम 6:00 बजे के बाद से बाहर नहीं निकलता था। उन्होंने बताया कि गांव में शौचालय की भी सुविधा नहीं है। उन्हें शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में दहशत के माहौल में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता था। निवासी ने बताया कि 2 दिन पहले भी एक व्यक्ति को बाघ ने अपना निवाला बनाया था।

ग्राम प्रधान चुनने का नहीं है अधिकार

यह बात जानकर हैरानी होगी कि इस गांव के निवासियों को विधायक और सांसद चुनने का अधिकार तो है लेकिन ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार नहीं है। बता दें कि यह अनुसूचित जाति का क्षेत्र है। इस गांव में लोग साल 1972 से बसे हुए हैं। इस गांव के बच्चे शिक्षा की व्यवस्था से वंचित है। निवासियों को कहना है कि उन्होंने बहुत से आंदोलन किए हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है।

गांव में नहीं है मूलभूत सुविधाएं

गांव के निवासियों ने बताया कि इस गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले यहां पर नेता आते हैं और बिजली देने का वादा करते हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई भी नजर नहीं आता है। इस गांव में बिजली भी नहीं है। उनका कहना है कि जब भी विधायकों को चुनाव जीतना होता है तो यहां बिजली के खंभे लगा देते हैं लेकिन बिजली की सुविधा नहीं दी जाती है। गांव में बिजली के खंभों को लगे 5 साल हो गए हैं और पिछले साल बाढ़ में कुछ खंबे बह गए।

विधायक बताता है निवासियों को गुंडा

गांव के निवासियों का कहना है कि कोरोना काल से ही बच्चों की पढ़ाई बंद है। बच्चे बाहर निकल नहीं सकते क्योंकि बाघ का खतरा है। 27 सितंबर को गांव के निवासियों ने भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट के घर तक जुलूस भी निकाला था। निवासियों ने विधायक के सामने अपनी बिजली और पानी की सुविधा की मांगे रखी। निवासियों की मांगे ना सुनते हुए भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि तुम यहां गुंडागर्दी करने आए हो लेकिन हम तुमसे बड़े गुंडे हैं। साथ ही दीवान सिंह बिष्ट ने गांव के निवासियों को डरा-धमका कर भगा दिया।

बीजेपी विधायक ने मदद करने से किया इनकार

गांव के निवासियों का कहना है कि उन्होंने भाजपा विधायक के घर तक 27 सितंबर को जुलूस निकाला था और अपनी मांगे सामने रखी थी। निवासियों से कहा गया कि यहां डैम बना दिया जाएगा लेकिन कुछ कार्य नहीं हुआ और 19 अक्टूबर को आई बाढ़ में गांव के लगभग 50 घर बह गए। गांव वालों ने कहा कि विधायक के घर एसडीएम की मंजूरी लेकर गए थे लेकिन वहां उन्हें घेर लिया गया और डराया-धमकाया गया। यहां के विधायक दलित कहकर इनके साथ भेदभाव करते हैं।

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