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Uttarakhand Chunav 2022: हॉट सीट रामनगर विधानसभा क्षेत्र में पहली बार निर्दलियों के पंजे में फंसे राष्ट्रीय दल

Janjwar Desk
7 Feb 2022 2:40 PM IST
Uttarakhand Chunav 2022: हॉट सीट रामनगर विधानसभा क्षेत्र में पहली बार निर्दलियों के पंजे में फंसे राष्ट्रीय दल
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Uttarakhand Chunav 2022: रामनगर विधानसभा के इस चुनाव में अभी तक पक्ष-विपक्ष की भूमिका निभाते आये दोनो प्रमुख राष्ट्रीय दल पहली बार में अपने आप को निर्दलीय प्रत्याशियों के चक्रव्यूह में फंसा महसूस कर रहे हैं।

सलीम मलिक की रिपोर्ट

Uttarakhand Chunav 2022: रामनगर विधानसभा के इस चुनाव में अभी तक पक्ष-विपक्ष की भूमिका निभाते आये दोनो प्रमुख राष्ट्रीय दल पहली बार में अपने आप को निर्दलीय प्रत्याशियों के चक्रव्यूह में फंसा महसूस कर रहे हैं। इनके सामने राजनैतिक चौसर पर विपक्षी को मात देने के साथ ही अपने किले में लगती सेंध का इलाज करने की चुनौती से भी जूझने का टास्क आ खड़ा हुआ है।

इस बार के इस विधानसभा चुनाव में रामनगर विधानसभा क्षेत्र से परम्परागत दलों के अलावा पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी रंग का चटख बनाये हुए हैं। मैदान में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. महेन्द्रपाल सिंह हैं तो कांग्रेस में हुए आंतरिक राजनीतिक मंथन से उपजे संजय नेगी बतौर निर्दलीय प्रत्याशी खम ठोक रहे हैं। मौजूदा विधायक दीवान सिंह बिष्ट एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन उन्हें आरएसएस पृष्ठभूमि के एक प्रतिष्ठित परिवार से निर्दलीय चुनाव लड़ रही श्वेता मासीवाल के तीखे सवालों से असहज होना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी से शिशुपाल सिंह रावत, बहुजन समाज पार्टी से हेम भट्ट, सपा से अब्दुल गफ्फार, उक्रांद से राकेश चौहान, उपपा से चिंताराम संहित कुल ग्यारह प्रत्याशी फिलहाल चुनाव मैदान में हैं।

क्षेत्र के राजनैतिक मिजाज की बात करें तो राज्य बनने के बाद जिस दल की प्रदेश में सत्ता रही, विधायक भी उसी का रहा। मुख्य तौर पर कांग्रेस-भाजपा की धुरी पर घूमती इस राजनीति ने रामनगर की भूमि किसी अन्य दल या निर्दलीय प्रत्याशी के लिए उर्वरा नहीं होने दी। लेकिन इस बार का चुनावी परिदृश्य हटकर है। गुटबाजी का शिकार कांग्रेस कई सालों से रही है। सो चुनाव में भी वह बदस्तूर कायम है। हरीश रावत व रणजीत रावत गुट की खींचातानी में पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी ने कांग्रेस से बगावत कर चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। कांग्रेस प्रत्याशी को पैराशूट प्रत्याशी बताते हुए "रामनगर का बेटा" थीम पर आक्रामक शैली में चुनाव लड़ रहे संजय कांग्रेस के एक गुट को अपने साथ रखकर भाजपा के लूप होल्स का भी बखूबी इस्तेमाल कर भाजपा-कांग्रेस दोनो के ही प्रत्याशियों की धड़कन बढ़ाने का काम कर रहें हैं। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और स्थानीय भावना का ज्वार उनकी प्रमुख ताक़त है।

दूसरी प्रमुख निर्दलीय प्रत्याशी श्वेता मासीवाल हैं। जो चुनावी समर में पहली बार शामिल हो रहीं हैं। लेकिन सामाजिक कामों में वह ग्यारह वर्ष से अपने भाजपा नेता सुदीप मासीवाल के दिवंगत होने के बाद से ही सक्रिय हैं। कोविड काल में उनका सोशल वर्क बेहद उल्लेखनीय रहा। कोरोना काल में स्थानीय भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट की स्थानीय अस्पताल पर की गई बेबस टिप्पणी "इस अस्पताल में तो मेरी भी कोई सुनवाई नहीं होती" को आधार बनाते हुए मध्यम वर्गीय सिविल सोसायटी को लुभाने वाले कई मुद्दों को बहस के केंद्र में रखकर स्थानीय से लेकर प्रदेश की सत्ता तक हमलावर हैं। जनहित के मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाकर कुशल प्रबंधन के सहारे वह समाज के चिंतनशील, युवा तबके को झझकोर रही हैं। बाकी परम्परागत सभी दलीय प्रत्याशी अपनी बनी-बनाई लीक पर चुनावी संग्राम में हैं। जिसमें जातीय समीकरण, विकास के सुनहरे वायदे शामिल हैं।

कुल मिलाकर रामनगर विधानसभा में चुनाव का निर्णय निर्दलीय प्रत्याशी ही तय करेंगे। विजयी प्रत्याशी की जीत का आधार उसके दलीय समीकरण कम बल्कि निर्दलीय प्रत्याशियों को उसके व मुख्य प्रतिद्वन्दी को प्रभावित करने की क्षमता ही बनेगी। चुनाव का सारा रोमांच भी यही बने हुए हैं।

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