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राष्ट्रीय

धीमा बोलना क्या नेताओं को लोकप्रिय बनाता है?

Janjwar Desk
31 Aug 2022 11:36 AM IST
धीमा बोलना क्या नेताओं को लोकप्रिय बनाता है?
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धीमा बोलना क्या नेताओं को लोकप्रिय बनाता है?

अकैडमी ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोसीडिंग्स में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि धीमे स्वर में बोलने पर नेताओं की लोकप्रियता पुरुषों और महिलाओं में अलग असर डालती है...

वरिष्ठ लेखक महेंद्र पाण्डेय का विश्लेषण

Popular leaders speak in low pitch, but it is not true for women leaders. सामान्य धारणा है कि धीमा बोलने वाले नेता अधिक लोकप्रिय होते हैं| धीमा बोलना, मतलब नीचे के स्वर में बोलने से है| ऐसे नेताओं को अधिक गंभीर और अधिक सक्षम माना जाता है| हाल में ही अकैडमी ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोसीडिंग्स में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि धीमे स्वर में बोलने पर नेताओं की लोकप्रियता पुरुषों और महिलाओं में अलग असर डालती है| धीमे स्वर में बोलने वाली महिला नेताओं को जनता गंभीरता से नहीं लेती| इस अध्ययन को यूनिवर्सिटी ऑफ़ केंसास के स्कूल ऑफ़ बिज़नस की प्रोफ़ेसर मिदाम किम ने किया है|

अध्ययन के अनुसार आवाज के इस प्रभाव को विकासवाद के मनोविज्ञान से समझा जा सकता है| जनता को महिला नेताओं की कम मिसाल मिलती है इसीलिए उनकी तेज या धीमी आवाज का अनुभव जनता को कम रहता है, और वे इसपर ध्यान भी नहीं देते| विकासवाद के क्रम में कबीलाई सभ्यता से लेकर औद्योगिक युग के शुरुआत तक महिला नेताओं का पूरा अभाव रहा है| कबीले के युग में कबीले का सबसे शारीरिक तौर पर सबसे सशक्त पुरुष ही इसका सरदार चुना जाता था| किसी भी कबीले के किसी सरदार की आवाज के बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया है| पर, भौतिक शास्त्र का एक वैश्विक नियम है, कोई भी पदार्थ जितना बड़ा और भारी होता जाता है, उसकी आवाज कम हो जाती है| जंगलों में भी सबसे बड़े जानवरों की आवाज कम ही सुनने को मिलती है| मानव विकासवाद में संभवतः यही परंपरा आज भी चल रही है, और लोग पुरुष नेताओं से अपेक्षा करते हैं कि वे सशक्त और प्रभावी हों, पर धीमी आवाज में बात करते हों| महिला नेताओं को लोग आज भी सशक्त नेता नहीं बल्कि सहायक नेता के तौर पर स्वीकार करते हैं इसलिए उनकी आवाज पर ध्यान नहीं देते|

प्रोफ़ेसर मिदाम किम के दल ने अपने अध्ययन के लिए प्रयोगशाला में 200 लोगों को बुलाया था, और उन्हें नेताओं के भाषणों के ऑडियो सुनाकर इसका आकलन करने को कहा गया| हरेक नेता के ऑडियो के तीन स्वरुप थे – एक में नेता की सामान्य आवाज थी जिसमें वास्तविक भाषण दिया गया था, दूसरे में इसका स्वर धीमा कर दिया गया था और तीसरे में स्वर थोडा ज्यादा किया गया था| लगभग सभी प्रतिभागियों को पुरुष नेताओं द्वारा धीमी आवाज में दिया गया भाषण सबसे अधिक पसंद आया| जबकि महिला नेताओं के साथ ऐसा नहीं था|

पारंपरिक तौर पर महिलाओं को समाज को नेतृत्व देने वाली भूमिका में नहीं देखा जाता है और सामान्य धारणा है कि महिलायें कमजोर होती हैं और नेतृत्व का बोझ नहीं उठा सकती हैं| महिलायें जब राजनीति में आती हैं तब उन्हें पुरुषों की अपेक्षा कई गुना अधिक श्रम करना पड़ता है और सामाजिक वर्जनाओं को तोडना पड़ता है| महिलाओं को शारीरिक तौर और मानसिक तौर पर कमजोर समझा जाता है, इसीलिए नेतृत्व की भूमिका में आते ही उनकी धीमी आवाज को स्वीकार नहीं किया जाता है| उन्हें अपेक्षाकृत तेज बोलना पड़ता है ताकि महिलाओं को कमजोर समझने वाली जनता भी उनके प्रभाव से अवगत हो सके|

एक दूसरे अध्ययन में बताया गया है कि तेज आवाज में बोलने वाली महिलाओं को जनता वास्तविक से कम उम्र का समझती है| यूनिवर्सिटी ऑफ़ विएना के मनोवैज्ञानिकों द्वारा किये गए अध्ययन के अनुसार तेज आवाज में जब महिलायें बात करती हैं, तब जनता की नज़रों में उनके सौन्दर्य, स्वास्थ्य और आकर्षण पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ता पर जनता उनकी उम्र का आकलन वास्तविक उम्र से कम करती है| इस अध्ययन को फ्रंटियर्स ऑफ़ साइकोलॉजी नामक जर्नल के अगस्त 2022 अंक में प्रकाशित किया गया है| इस अध्ययन के लिए प्रतिभागियों को एक ही महिला के एक ही रिकॉर्डिंग के दो सेट सुनाये जाते थे – एक वास्तविक वौइस् रिकॉर्डिंग और दूसरे में इसी आवाज को तेज कर दिया जाया था| इससे पहले इस तरह के अध्ययनों में केवल सौन्दर्य और आकर्षण पर ध्यान दिया जाता था, पर इस अध्ययन के लिए प्रतिभागियों से आवाज सुनाकर वक्ता महिलाओं का जो चित्र मस्तिष्क में उभरता है उसके आधार पर सौन्दर्य, आकर्षण, महिला-विशेष गुणों, उम्र और उनके स्वास्थ्य पर अलग-अलग अंक देने को कहा गया था| इस अध्ययन के अनुसार सामान्य आवाज और तेज आवाज के ऑडियो से किसी और पैरामीटर पर फर्क नहीं आया पर वक्ता महिला के उम्र के आकलन में औसतन एक वर्ष का अंतर आ गया|

इस तरह के अध्ययन के निष्कर्ष भारत छोड़कर पूरी दुनिया पर लागू होते हैं, क्योंकि हम तथाकथित लोकतंत्र के उस दौर में हैं जहां व्यक्ति की पूजा की जाती है, राजनैतिक विचारधारा की नहीं| यहाँ सबसे अधिक भौंडा बोलने वाला, धाराप्रवाह झूठ बोलने वाला और अश्लील फब्तियां कसने वाला नेता सबसे लोकप्रिय होता है| ऐसा नेता धीमे बोले या चिल्लाये – उसकी लोकप्रियता बरकरार रहती है, बल्कि चिल्लाने वाले और जहर उगलने वाले नेताओं की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती है| यहाँ की महिला नेताएं भी वही लोकप्रिय हैं जो समय समय पर ज्वालामुखी जैसी फटती हैं और विपक्षी नेताओं पर या समाज पर लावा उगलती हैं|

किसी मनुष्य की आवाज और उसके बोलने के तरीके से उसके बारे में बहुत कुछ समझा जा सकता है और अब वैज्ञानिक इसी समझ को उजागर कर रहे हैं| पर, अफ़सोस यह है कि इसका सम्बन्ध हमारे देश से नहीं है|

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