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Lockdown में 67 फीसदी मजदूर हो गए बेरोजगार, अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सर्वे में हुआ खुलासा

Manish Kumar
14 May 2020 5:20 AM GMT
Lockdown में 67 फीसदी मजदूर हो गए बेरोजगार, अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सर्वे में हुआ खुलासा
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लॉकडाउन के बाद शहरी क्षेत्रों में 10 में से 8 मजदूरों की नौकरी गई है, जबकि गांवों में 10 में से 6 मजदूरों को बेरोजगार होना पड़ा है...

जनज्वार। लॉकडाउन के लागू होने के बाद से 67% मजदूरों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। यह खुलासा अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के एक सर्वे हुआ है। यह सर्वे 10 अन्य सिविल सोसायटी संगठनों के साथ अ​जीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा मिलकर किया गया था।

स सर्वे में सामने आया है कि शहरी क्षेत्रों में 10 में से 8 मजदूरों की नौकरी गई है, जबकि गांवों में 10 में से 6 मजदूरों को बेरोजगार होना पड़ा है।

ह सर्वे आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (पुणे), ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में किया गया है। इसमें लॉकडाउन का रोजगार, आजीविका और सरकार की राहत योजनाएं पर पड़ने वाले लॉकडाउन के प्रभाव का आकलन किया गया। यह एक फोन सर्वे था, जिसमें करीब 4000 लोगों से बात की गई।

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बसे ज्यादा नौकरियां शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार से जुड़े लोगों की गई है। इनमें करीब 84% लोगों की नौकरियां गई हैं, जबकि वेतनभोगी कामगारों में 76% और केजुअल मजदूरों में 81% लोगों की नौकरियां गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 66% केजुअल वेतकर्मियों की नौकरियां गई हैं, वहीं वेतनभोगी मजदूरों में 62% की नौकरियां गई हैं।

इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि लॉकडाउन लागू होने के बाद से सर्वे में रोजगार और कमाई के स्तर को मापा और उनकी तुलना फरवरी के हालात से की। इसमें स्व-नियोजित, आकस्मिक और नियमित वेतन/वेतनभोगी कर्मचारियों को कवर किया था। अभी इसकी डिटेल रिपोर्ट आनी बाकी है।

स सर्वेक्षण में इतनी भारी संख्या में बेरोजगारी दर्शा अध्ययन करने वाली टीम ने संकट से प्रभावित लोगों की स्थितियों को सुधारने के लिए कुछ उपाय भी सुझाए हैं, जिनमें मुख्यतया उनकी राशन की जरूरत को पूरा करने की तरफ ध्यान दिलाया गया है।

ध्ययन टीम ने सरकार को सुझाव दिया है कि लॉकडाउन से प्रभावित सभी जरूरतमंदों को कम से कम अगले छह महीने तक मुफ्त राशन देने का बंदोबस्त किया जाना चाहिए और दो महीने के लिए प्रतिमाह कम से कम 7,000 रुपये के बराबर नकद हस्तांतरण किया जाना चाहिए। इस​के अलावा ग्रामीण इलाकों में मनरेगा का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वहां रह रहे ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम मिल सके।

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लॉकडाउन के लागू होने के बाद बेतहाशा बेरोजगारी बढ़ने की बात कई अन्य माध्यमों से भी सामने आ रही है। मुंबई स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 3 मई को जब सप्ताह समाप्त हुआ तो भारत में बेरोजगारी दर अभूतपूर्व 27.11 प्रतिशत थी। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मामूली रूप से 29.22% थी जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर 26.16% थी।

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प्रैल के महीने के लिए बेरोजगारी की दर मार्च के अंत में 8.74% से 23.52% तक बढ़ गई, जो कोरोनावायरस के कारण राष्ट्रीय लॉकडाउन में केवल दो सप्ताह थी। फरवरी के महीने में 7.78% की बेरोजगारी दर दर्ज की गई जो मार्च के लिए लगभग 9% हो गई, वह भी राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के केवल दो सप्ताह के भीतर। फरवरी के महीने में 7.78% की बेरोजगारी दर दर्ज की गई जो मार्च के लिए लगभग 9% हो गई।

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