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राजनीति

केजरीवाल राजस्थान छात्रसंघ की जीत से खुश क्यों नहीं

Janjwar Team
19 Sep 2017 7:55 AM GMT
केजरीवाल राजस्थान छात्रसंघ की जीत से खुश क्यों नहीं
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मन की शांति ग्रहण कर विपासना से लौट आए केजरीवाल, पर पार्टी में फिर एक बार घमासान की चर्चा

दिल्ली से स्वतंत्र कुमार की रिपोर्ट

आम आदमी पार्टी की बवाना उपचुनाव में हुई जीत के बाद राजस्थान में छात्र चुनावों में जीत की दोहरी खुशी मिलने के बाद भी आप में अंदर कुछ न कुछ खटपट चल ही रही है।

चूंकि राजस्थान का प्रभारी कुमार विश्वास को बनाया हुआ है तो राजस्थान में आप के छात्र संगठन छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) को चुनाव में मिली बड़ी जीत पर पार्टी के किसी भी बड़े नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया आदि ने न कोई खुशी जाहिर की, न ही मीडिया में कोई बयान दिया और न ही कोई ट्वीट किया।

आम आदमी पार्टी की राजनीति की अंदरूनी समझ रखने वालों को ये बात समझ आ गई कि कुमार के खेमे से आई इस जीत पर अरविंद के खेमे में कोई खुशी नहीं, बल्कि शंका के बादल जरूर नज़र आने लगे।

राजस्थान छात्रसंघों चुनाव में छात्र युवा संघर्ष समिति को मिली जीत के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल महाराष्ट्र 9 दिनों की विपासना के लिए निकल गए। इसी बीच कल 18 सितंबर की दोपहर को कुमार के ट्वीटर हैंडल से एक दनदनाता हुआ ट्वीट आया। जो कुछ ऐसे अंदाज़ में था कि कुमार पार्टी में अलग—थलग करने की कोशिशों में लगे नेताओं को व्यंग्यात्मक भाषा मे सीधे तौर पर चेतावनी दे रहे हैं।

उनका ट्वीट कुछ इस तरह है,"साथियों को शून्य समझने वालों को समझना चाहिए कि जब तक वो तुम्हारे पीछे खड़े हैं तभी तक तुम दहाई हो कभी आगे खड़े हुए तो ढंग की इकाई भी न बचोगे।'

इस ट्वीट के कई सियासी मतलब निकाले जा रहे हैं। इस ट्वीट के जवाब देने के लिए हर बार की तरह इस बार भी सबसे पहले कमान संभाली डिप्टी सीएम के साले संजय राघव ने। उन्होंने कुमार के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि "साथी अगर लालची और षड्यंत्रकारी हो, गुणा भाग करके सब जीरो कर देता है।"

इसके बाद जो सबसे रोचक बात हुई वो यह है कि दिल्ली सरकार से निकाले गए पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी कुमार के इस ट्वीट को रिट्वीट किया। कपिल की पार्टी और सरकार से विदाई के बाद कुमार पर कपिल के एक के बाद एक शाब्दिक प्रहार के बाद कई महीनों में कपिल ने पहली बार कुमार के ट्वीट को रिट्वीट किया है।

कुछ लोग इसे सीधे तौर पर राज्यसभा की सीट के नामों से जोड़ कर देख रहे हैं। जैसे जैसे दिल्ली से राज्यसभा जाने का समय नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे आप की आपसी मतभेद की दरारें और साफ नजर आने लगेंगी।

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