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अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर वहां के राष्ट्रीय झंडे वाले अंडरगार्मेंट की लगती है सेल, लोग करते हैं खूब खरीददारी

Prema Negi
5 July 2019 4:54 AM GMT
अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर वहां के राष्ट्रीय झंडे वाले अंडरगार्मेंट की लगती है सेल, लोग करते हैं खूब खरीददारी
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दुनियाभर में अपनी राष्ट्रीय ताकत और संप्रभुता का झंडा फहराने वाला, ज्ञान-विज्ञान में सर्वोपरि, सुरक्षा में दुनिया का आदर्श माने जाने वाले अमेरिका में अपने राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर कोई कुंठा नहीं दिखती....

वाशिंगटन से राममोहन राय

4 जुलाई को अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस होता है। इसी दिन वर्ष 1776 में वर्तमान अमेरिका के 13 राज्यों को ब्रिटिश राजशाही ने मुक्त घोषित किया था। वैसे अब यहां 50 राज्य हैं, जिनका अपना—अपना इतिहास है तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय ध्वज से अलग—अलग झंडा है।

र्ष 1876 में एक लंबे संघर्ष के बाद यहां गुलाम प्रथा की समाप्ति की घोषणा हुई, पर नस्लवाद व रंगभेदवाद के खिलाफ अभी भी संघर्ष जारी है। 28 करोड़ की आबादी वाले इस देश की जेलों में लगभग 20 लाख लोग जेलों में हैं, जिनमें से आधे लोग अश्वेत हैं।

राष्ट्रीय आज़ादी दिवस को मनाने का यहां अपना ढंग है। पूरे देश मे सार्वजनिक अवकाश है। जगह—जगह पर परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आतिशबाजी का प्रदर्शन किया जा रहा है। पूरी मार्किट में 4 जुलाई विशेष सेल है, जहां घटी दरों पर माल बेचा जा रहा है। खैर यह भी सामान बेचने का एक ढंग है।

हां, मुझे यहां एक बात बहुत ही दिलचस्प लगी, अमेरिका के राष्ट्रध्वज से रंगे व सने हर प्रकार के कपड़े व सामान यहां मार्किट में बिक्री के लिये उपलब्ध हैं। इनमें जूते, जुराब, कच्छे, बनियान, कमीज, खाने में इस्तेमाल होने वाले डोंगे और हर प्रकार की चीजें मौजूद हैं।

राष्ट्रवाद, ध्वज व राष्ट्रीयता यहाँ कोई पवित्र वस्तु नहीं है तथा इनके प्रति अंधभक्ति कहीं भी दृष्टिगोचर नहीं होती। अंध राष्ट्रवाद के तात्कालिक रूप फासिज्म के खिलाफ तो इन्होंने एक ऐतिहासिक लड़ाई सन 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के समय जर्मनी, इटली व जापान के खिलाफ लड़ी थी, इसलिये आज भी अंध राष्ट्रवाद व फासिज्म के खिलाफ इनकी मानसिकता है, हालांकि इसके और अनेक नए रूपों से आज भी यहां के लोग लड़ रहे हैं।

ह सही है कि शासक वर्ग का चरित्र, नीति व नियत आमजन से जैसा सब जगह पृथक है, वो यहां भी है। अमेरिकन जनता का साम्राज्यवाद के वर्तमान रूपों के खिलाफ जंग भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का एक हिस्सा ही है, जिसे समझना बहुत जरूरी है। इसके नायक लिंकन, बोएस, जूनियर और वे सभी हैं, जो मुठ्ठी तान कर एकजुट खड़े हैं।

स्वतंत्रता, भातृत्व व समानता के इस संघर्ष में हम सभी समानता व न्याय के लिए लड़ रही अमेरिकन जनता के साथ हैं और उन्हें उनके स्वतंत्रता दिवस पर अपनी हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं।

ह शिकागो की धरती है, जिसने पूरी दुनिया को मई दिवस दिया, लाल झंडा दिया और नारा भी 'दुनियाभर के मेहनतकशो एक हो जाओ।'

(राममोहन राय वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं।)

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