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बांग्लादेश में लगे 'MODI GO BACK' के नारे, कहा दक्षिण एशिया की एकता खत्म कर रहे मोदी

Nirmal kant
5 March 2020 3:00 AM GMT
बांग्लादेश में लगे MODI GO BACK के नारे, कहा दक्षिण एशिया की एकता खत्म कर रहे मोदी
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बांग्लादेश जनरल स्टूडेंट्स राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल द्वारा राजू मेमोरियल हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट यूनियन के उपाध्यक्ष नुरुल हक नूर ने मोदी को मुजीब की जन्म शाताब्दी में शामिल होने से रोकने की कसम खाई...

जनज्वार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा को लेकर बांग्लादेश में लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। 17 मार्च को ढाका में बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीब उर रहमान की जन्म शाताब्दी के समारोह में मोदी को शामिल होने का न्यौता दिया गया है जिसके खिलाफ बांग्लादेश में कई बुद्धिजीवी व कई सामाजिक संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि विरोध के बावजूद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार मोदी के साथ अपने सफर को आगे भी जारी रखना चाहती है।

ससे पहले बांग्लादेश के विदेश सचिव मसूद बिन मोमन ने रविवार 1 मार्च को ढाका में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दिल्ली में हुई हिंसा को भारत का 'घरेलू मामला' बताया है। पीएम मोदी को 17 मार्च के समारोह में इसलिए आमंत्रित किया गया था क्योंकि भारत ने बांग्लादेश की आजादी में एक बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा इस बीच भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला यात्रा की तैयारी से पहले ढाका में मौजूद थे।

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हालांकि दिल्ली में हुई हिंसा के बाद नरेंद्र मोदी को इस यात्रा में भारी विरोध झेलने के आसार नजर आ रहे हैं। इसके अलावा यात्रा से पहले पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए उस बयान का असर पड़ेगा जिसमें उन्होंने बांग्लादेश से आए 'अवैध अप्रवासियों' को 'दीमक' कहा था। शाह ने कहा था कि बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी 'दीमक' हैं जिनसे छुटकारा पाना काफी जरूरी है।

हालांकि पूर्वोत्तर दिल्ली के दंगों के बाद ही कई बांग्लादेशी छात्रों ने मोदी की बांग्लादेश दौरे का विरोध करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा बांग्ला में कई सामजिक संगठन भी मोदी की बांग्ला यात्रा का विरोध कर रहे हैं। अबतक हिंसा में करीब 46 लोगों की मौत हो चुकी है।

के कई प्रमुख अखबारों ने मोदी के दौरे को लेकर खबरें प्रकाशित की हैं। इन रिपोर्टों के मुताबिक मोदी के दौरे से पहले बांग्लादेश जनरल स्टूडेंट्स राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल द्वारा राजू मेमोरियल हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट यूनियन के उपाध्यक्ष नुरुल हक नूर ने मोदी को मुजीब की जन्म शाताब्दी में शामिल होने से रोकने की कसम खाई।

नूर ने मोदी के ऊपर हमला करते हुए कहा कि अगर मोदी जैसा शख्स इस कार्यक्रम में शामिल होता है तो यह बांग्लादेश के आम लोगों का अपमान होगा और शेख मुजीब उर रहमान का भी, जो बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक सद्भाव बनाए रखना चाहती है उनको भी बड़ा नुकसान होगा। नूर ने कहा कि भारतीय मुसलमान मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आतंकवादियों के निशाने पर हैं। वे भारत में धार्मिक सद्भाव को नष्ट करना चाहते हैं।

दिल्ली दंगों के विरोध में बांग्लादेश छात्र संघ और क्रांतिकारी छात्र युवा एकता जैसे वामपंथी छात्र संगठनों ने शुक्रवार को ढाका विश्वविद्यालय परिसर में अलग-अलग जगहों पर रैली की। साथ ही छात्रों ने राजू मेमोरियाल मूर्ति कला के सामने दिल्ली हिंसा में मारे गए मुस्लिम और हिंदू दोनों के लिए एक सामूहिक प्रार्थना का भी आयोजन किया।

सके अलावा उलमा-ए-इस्लाम बांग्लादेश के महासचिव नूर हसन कासमी ने बांग्लादेश सरकार द्वारा मोदी को दिए गए निमंत्रण को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मुसलमानों को गैर-मुसलमानों की रक्षा करनी चाहिए और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना चाहिए। हम लोग सांप्रदायिक सद्भाव में विश्वास करते हैं। इसलिए शांति बनाए रखी जानी चाहए ताकि कोई गैर-मुस्लिम यहां प्रभावित ना हो।

दौरान लगभग 3000 लोगों ने बिजॉय नगर की सड़क पर 'मुस्लिमों को मारना बंद करो' की लिखी तख्तियां ले रखी थी। उन्होंने रैली के बाद भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला भी फूंका। बांग्लादेश अंजुमने तलमिजे इस्लामिया सिलहट ने जुम्मा नमाज के बाद शोभाघाट में लगभग 10,000 लोगों की एक रैली का भी आयोजन किया। इस दौरान छात्र मोर्चे ने जुम्मे की नमाज के बाद शहर के बंदर बाजार में पार्टी के कार्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। सिलहट में हजारों मुस्लिम धर्म गुरुओं के एक मंच उलमा-मशाय के परिषद सिलहट के बैनर तले इकट्ठा हुए और जुम्मे की नवाज के बाद जूलुस भी निकाला गया।

सके अलावा गुरुवार को बांग्लादेश के 12 नामी लोगों अनीसुज्जमां, अब्दुल गफ्फार चौधरी, हसन अज़ीज़ुल हक, अनुपम सेन, हसन इमाम, सरवर अली, रामेंदु मजुमदार, मोफिदुल हक, तारिक अली, मामूनुर रशीद, नसीरुद्दीन यूसुफ और गोलू कफ़ल ने भी नागरिकता संशोधन अधिनियम और दिल्ली में हुए हिंसा को लेकर चिंता व्यक्त की है। हिंसा के खिलाफ संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर करते हुए अपनी विरोध जताते हुए कहा कि अगर दिल्ली की स्थिति सही नहीं होती है तो यह क्षेत्र में 'अस्थिरता' पैदा कर सकती है।

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न्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के दौरान सबसे बड़ा मददगार होने के कारण एक पड़ोसी मित्र के रूप में जाना जाता है लेकिन भारत में जारी हिंसा दक्षिण एशिया में शांति लोकतंत्र, विकास और सांप्रदायिक सद्भाव एशियाई क्षेत्र के लिए भी हानिकारक हो सकती है। हम बांग्लादेश में उन लोगों को भी बुलाते हैं जो हमारी स्वतंत्रता की भावना को देश के सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने की बात करते हैं।

सके अलावा बांग्लादेश के अन्य संगठन संयुक्त मुक्ति परिषद, नया गणतांत्रिक गोनो मोर्चा, जटिया गणतांत्रिक गोनो मोर्चा और जटिया गोनोफ्रंट ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री दक्षिण एशिया की एकता को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। सैमिलिटा संगस्क्रीटिक जोते ने भी अपनी चिंता व्यक्त की और भारत सरकार से भारत में हिंसा को रोकने के लिए प्रभावी और तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया।

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