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गुजरात मे कोरोना से हालात बद से बदतर, लोगों का जीवन जोखिम में डाल रही स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही

Nirmal kant
11 May 2020 3:30 AM GMT
गुजरात मे कोरोना से हालात बद से बदतर, लोगों का जीवन जोखिम में डाल रही स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
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कोरोना के चलते आज पूरे भारत में चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। खासकर महाराष्ट्र और गुजरात की हालत गंभीर बनी हुई है। ऐसे में गुजरात के स्वास्थ्य विभाग की कार्य पद्धति पर कई सवालिया निशान खड़े हुए हैं....

गुजरात से दत्तेश भावसार की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कोरोना नेगेटिव व्यक्ति को 17 घंटे तक कोरोना पॉजिटिव व्यक्तियों के साथ रखा गया था। उसके बाद उसका नेगेटिव रिपोर्ट आने पर कोरोना नेगेटिव व्यक्ति को पॉजिटिव व्यक्तियों से अलग किया गया। गुजरात के स्वास्थ्य विभाग की यह गंभीर वेदरकारी कई लोगों को जोखिम में डाल रही है।

सा ही एक मामला वडोदरा से भी सामने आया है जिसमें कोरोना पॉजिटिव पाए गए एक व्यक्ति के घरवालों का कोई टेस्ट नहीं किया गया। हालांकि उस जागरूक व्यक्ति ने अपने स्थानीय विधायक से बातचीत की। फिर स्थानीय विधायक ने गुजरात के मुख्यमंत्री से आग्रह किया और मुख्यमंत्री की सूचना के बाद उनके पूरे परिवार टेस्ट किया गया, जिसमें उनके घर के 9 और लोग पॉजिटिव पाए गए। अब आप समझ सकते हैं कि वह 9 पॉजिटिव लोग कितने लोगों को संक्रमित कर सकते थे। ऐसे ही हालात कमोवेश पूरे गुजरात में हैं परंतु सूचनाएं बाहर नहीं आ पा रहीं हैं।

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खासकर कच्छ जनपद की स्थिति बहुत ही चिंताजनक हो चुकी है। कच्छ जनपद की बात करें तो यहां के हजारों लाखों लोग मुंबई में बसे हुए हैं। वह लोग 1 मई से अपने घर वापस आ रहे हैं। कच्छ के लोग उनका स्वागत कर रहे हैं। 1 मई से गुजरात सरकार ने सभी लोगों को आने-जाने की अनुमति दी है जिसके चलते कच्छ में आने वालों की संख्या हर दिन 25,000 से 30,000 की है।

च्छ में आने के लिए मुख्यतौर पर दो ही रास्ते हैं।न दोनों रास्तों के ऊपर हर दिन 5000 से 7000 वाहन आ रहे हैं जिसमें करीबन 25 से 30 हजार लोग आ रहे हैं जिसके लिए क्वारंटीन की सुविधा ना के बराबर है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, हर दिन 1200 से 1400 लोगों को क्वारंटीन किया जा रहा है और पूरे जिले में अबतक करीब 12 से 14 हजार लोग ही क्वारंटीन किए गए हैं।

जनपद के कलेक्टर के नोटिफिकेशन के अनुसार, गुजरात के बाहर रेड जोन में से आए सारे व्यक्तियों को क्वारंटीन में रहना पड़ेगा। परंतु इस नियम का कहीं पर भी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है। कई हिस्सों में गुजरात के बाहर से आए लोगों को और रेड जोन से आए लोगों को कोरेंटिन नहीं किया गया और कुछ केस में ऑरेंज जोन में से आए लोगों को भी क्वारंटीन कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ऐसी कामगिरी भी सवालिया निशान खड़े करती है।

भुज के भानूशाली नगर विस्तार के लोगों ने 'जनज्वार' से बातचीत में बताया कि उनके इलाके में कई लोग गुजरात के बाहर से आए हैं जिनको क्वारंटीन किया गया है। परंतु वे लोग सरकार की तरफ से दी गई सूचनाओं का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण उस इलाके में रहने वाले लोगों के जीवन को भी जोखिम खड़ा हुआ है।

सूरत जो कि रेड जोन में है वहां से आए एक सरकारी अधिकारी को क्नवारंटीन में रहना था। परंतु उनको क्नवारंटीन करने के आदेश के बाद भी वे सरकार के नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए गए हालांकि स्थानीय लोगों ने शिकायत की तो उनको बता दिया गया कि उन्हें क्वारंटीन से छूट दी गई है। ऐसे 15 के करीब अधिकारी भी हाल में यहां अपनी ड्यूटी पर हैं।

गर बात करें मुंबई से आए हुए लोगों की तो जब आवागमन की अनुमति नहीं थी तब भी मुंबई से मुंद्रा पोर्ट तक एक व्यक्ति आ चुका था। वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया। हालांकि वह कैसे आया और कहां से आया इसकी कोई भी जानकारी जिला प्रशासन की तरफ से नहीं दी गई है। इसके बाद अन्य एक महिला भी मुंबई से अनुमति के बिना कच्छ जनपद में आ गई और वह भी पॉजिटिव निकलीं थीं। महिला ने भी यह जानकारी छुपाई और 3 दिनों तक भुज शहर के मार्केट और अन्य कई जगहों पर घूमती हुई पाई गईं वह कोरोना पॉजिटिव थी।

हाराष्ट्र सरकार ने जब यह जानकारी दी तभी जाकर कच्छ के स्वास्थ विभाग को पता चला कि यह महिला कोरोना पॉजिटिव है। लेकिन अगर गुजरात बाहर से आते हैं तो उनको कंपलसरी क्वारंटीन में रहना होता है लेकिन रसूखदार लोग होने की वजह से उन्होंने कोई भी नियम का पालन नहीं किया। आज फिर से मुंबई के अन्य एक व्यक्ति जोकि अंजार तहसील में रहते हैं उनका रिपोर्ट भी पॉजिटिव पाया गया और उनके साथ 2 बसे भरकर लोग आने की जानकारी मिल रही है। वह व्यक्ति 7 तारीख को कच्छ में प्रवेश कर चुका था। 4 दिन में वो ना जाने कितने को संक्रमित कर चुका होगा।

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हालांकि जो भी कच्छ जनपद में आते हैं उन सभी लोगों को अपना पूरा ब्यौरा कच्छ जनपद की बॉर्डर पर लिखवाना होता है और वह पूरा ब्यौरा स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध है। फिर भी बाहर से आए लोगों को क्वॉरेंटाइन करने की कोई भी सुविधा नहीं की गई। उन लोगों को अपने घर में ही क्वारंटीन में रहने को कहा गया, फलस्वरूप कोई भी गंभीरता से क्वारंटीन के नियमों का पालन नहीं कर रहा और धीरे-धीरे कच्छ जनपद में कई केस कोराना पॉजिटिव पाए गए।

ही सारे मामले में सरकार का पक्ष जानने के लिए हमारी टीम 3 दिनों से कच्छ के डीएम की कचहरी में जा रही है लेकिन उनकी तरफ से यह कहते हुए समय नहीं दिया जा रहा है कि यह इतनी गंभीर बात है। लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है जहां कहीं भी पॉजिटिव केस पाया जाता है। उस जगह को बफर जोन बनाकर सील किया जा रहा है जबकि जो भी लोग दूसरे राज्यों से आते हैं उन सभी की जानकारी कच्छ के स्वास्थ्य विभाग के पास मौजूद होने के बावजूद भी कोई कड़े कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। पॉजिटिव केस आने के बाद उस इलाके में सारे तामझाम किए जा रहे हैं। यह बात कुछ ऐसे ही है कि सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने का काम गुजरात का स्वास्थ्य विभाग कर रहा है।

पूरी दुनिया में कोरोना को मात देने के लिए टेस्ट ट्रैक और ट्रीटमेंट का सहारा लिया जा रहा है परंतु गुजरात में खासकर कच्छ जनपद की बात करें तो यहां उल्टी गंगा बाहेती है। बहुत ही कम टेस्ट किए जा रहे हैं। किसी दिन 15 टेस्ट होते हैं किसी दिन 20 या 25 टेस्ट होते हैं जिस जिले में 25 लाख के करीब लोग रहते हों वहां पर इतने कम टेस्ट होना बहुत ही चिंता का विषय है। यह नीति कुछ इस प्रकार की है कि कम से कम टेस्ट हो कम से कम लोगो का टेस्ट हो ताकि कमसे कम ट्रेस हो और ट्रीटमेंट का तो सवाल ही खड़ा नहीं होता।

हमदाबाद की बात करें तो कुछ दिन पहले करीब 25 लोगों कोरोना पॉजिटिव लोगों को कई घंटों तक अस्पताल में एडमिट तक नहीं किया गया। उन लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो डाला इसके बाद ही उनकी सुध ली गई। अब सरकार की तरफ से जो नई गाइडलाइन बनाई गई है। उसमें बिना टेस्ट के ही डिस्चार्ज दिया जाएगा यह बात भी कहीं ना कहीं गले नहीं उतर रही डिस्चार्ज होने वाला व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है या नेगेटिव यह तक पता नहीं चलेगा अगर वह पॉजिटिव होगा और डिस्चार्ज हो चुका होगा तो वह आगे कई लोगों को संक्रमित कर सकता है।

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