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दिल्ली हिंसा से बर्बाद हुए परिवार, अपनों के शव के लिये 2 दिन से इंतज़ार

Prema Negi
28 Feb 2020 4:06 AM GMT
दिल्ली हिंसा से बर्बाद हुए परिवार, अपनों के शव के लिये 2 दिन से इंतज़ार
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27 फरवरी की शाम तक 32 शव मुर्दाघर में पोस्टमॉर्टम के लिये लाये गये। तीन दिनों में 9 शवों का पोस्टमॉर्टम ही हो पाया था। मरे हुये परिवारजन की बॉडी पाने का इंतज़ार लम्बा होता जा रहा है....

जीटीबी अस्पताल से लौटकर हृदयेश जोशी

चपन साल की मोकीमा खातून गुरु तेग बहादुर अस्पताल के शवगृह के बाहर बदहवास पड़ी हैं। कुछ पूछने पर उनका गला भर आता है। आवाज़ नहीं निकलती। उसके साथ आई अस्पताल पहुंची पड़ोसी रईसा खातून बताती हैं कि मोकीमा का 22 साल के बेटा शाहबाज़ सोमवार से लापता है।

“ये (मोकीमा) करावल नगर इलाके की रहने वाली हैं। इनका बेटा उस दिन अपने लिये दवा लेने गया लेकिन फिर लौट कर नहीं आया। अब ये उसे हर जगह ढूंढ रही हैं।” रईसा बताती हैं।

ऑटो ड्राइवर बब्बू की मौत गुरुवार 27 फरवरी की सुबह इसी अस्पताल में हुई। दंगाइयों ने उसे पीट-पीट कर सड़क पर फेंक दिया। बाद में एक ठेले में लादकर परिवार वालों ने बब्बू को अस्पताल पहुंचाया। सिर में गंभीर चोटें आने की वजह से बब्बू की मौत हुई।

राहत के काम में लगे साजिद चौधरी और ताज मोहम्मद

त्तर-पूर्वी दिल्ली के इस अस्पताल में शवगृह के बाहर लोगों का तांता लगा है। गुरुवार 27 फरवरी की शाम तक 32 शव मुर्दाघर में पोस्टमॉर्टम के लिये लाये गये। तीन दिनों में 9 शवों का पोस्टमॉर्टम ही हो पाया था। मरे हुये परिवारजन की बॉडी पाने का इंतज़ार लम्बा होता जा रहा है।

मारे गये लोगों में सभी समाज के गरीब तबके से हैं। कोई बढ़ई, कोई रिक्शाचालक और कोई मज़दूर। एनडीटीवी के पत्रकार साथी रवीश रंजन शुक्ला ने पिछले 3 दिनों कई कहानियां कवर की हैं। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के बाहर उन्होंने बिहार के राम सुगारित पासवान से बात की जिनका 15 साल का बेटा नितिन दंगों की भेंट चढ़ गया।

“मैं रिक्शा चलाकर उसका पेट पाल रहा था। मैं डेडबॉडी के लिये कभी गोकुलपुरी जाता हूं कभी अस्पताल आता हूं।” राम सुगारित ने शुक्ला को बताया।

शवगृह के बाहर इंतज़ार, गुरुवार शाम तक केवल 9 पोस्टमॉर्टम हो पाये

राम सुगारित का दर्द हरी सिंह सोलंकी से किसी तरह कम नहीं है, जिनका 26 साल का बेटा राहुल सोलंकी करावल नगर में दंगाइयों की गोली का शिकार हो गया। हरीसिंह ने अपने बेटे की मौत के बाद मीडिया से कहा कि कपिल मिश्रा तो दंगा करा के अपने घर बैठ गया और उनका जवान बेटा चला गया।

शुक्रवार 28 फरवरी की सुबह तक कुल 38 लोग दंगों में मारे जा चुके हैं। अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में 30 मृतकों के परिवारजनों से बात के आधार पर सूची छपी है। 85 साल की अकबरी से लेकर 15 साल के अमान तक का ज़िक्र है। आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ गुरुवार को एफआईआर हुई लेकिन भड़काई बयान देने वाले बीजेपी सरकार कपिल मिश्रा पुलिस संरक्षण में “पीस-मार्च” निकालते दिखे। इसी मार्च में नारे लग रहे हैं –“देश के गद्दारों को,………”

मौजपुर-बाबरपुर इलाके में गुरुवार को हमें फोर्स की भारी तैनाती दिखी। यहां हालात में दंगों के बाद का अवसाद साफ दिख रहा था लेकिन हालात तनावपूर्ण होने के बाद काबू में थे। फिर दंगे भड़कने के डर से लोग घरों को छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे ही एक युवा फरहान अपनी पत्नी और बच्चे के साथ अपने पैतृक घर अमरोहा के लिये निकलते दिखे।

दंगाग्रस्त इलाकों में फोर्स

नसे सवाल पूछने पर मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों ने हमें रोक लिया और मोबाइल कैमरा छीनने की कोशिश की।

“आपको कुछ और दिखाई नहीं देता?” मोटरसाइकिल सवार ने कहा। फिर हमें शूट बन्द करने की धमकी देकर वह चले गये। इस शख्स का कहना था कि हम पलायन की ख़बर दिखाकर डर का माहौल पैदा कर रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि पिछले 3 दिनों में आगजनी की सैकड़ों घटनायें हुई हैं जिनमें घरों, दुकानों, स्कूलों और मस्जिदों को जलाया गया है।

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धर शिव विहार इलाके में गुरुवार को उपद्रव मचता रहा। कई परिवारों ने वहां से भागकर एक मेरिजहॉल में शरण ली। अपना सबकुछ छोड़कर आये इन लोगों ने इस रिपोर्टर को बताया कि जब तक और अधिक फोर्स नहीं भेजी जाती लोग सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे।

जीटीबी अस्पताल के बाहर साजिद चौधरी और उनके साथी ताज मोहम्मद लोगों को खाना और पानी बांटते दिखे। कई हिन्दुओं ने मुस्लिमों की और मुस्लिमों ने हिन्दुओं की इसी हिंसा के बीच जान बचाई है। जब सरकार दंगों में सक्रिय भागीदार बन जाये और पुलिस उसका हथियार तो आम आदमी की समझ और विवेक ही आखिरी उम्मीद है।

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