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प्राइवेसी और डाटा चोरी के लिए फेसबुक भरेगा 35 हजार करोड़ का जुर्माना

Prema Negi
14 July 2019 5:48 AM GMT
प्राइवेसी और डाटा चोरी के लिए फेसबुक भरेगा 35 हजार करोड़ का जुर्माना
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किसी भी टेक कंपनी पर लगने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना, इससे पहले 2012 में गूगल पर लग चुका है 154 करोड़ रुपय का जुर्माना...

जनज्वार। फेसबुक खाताधारकों की निजता का उल्लंघन करने की कीमत अब उसे चुकानी होगी। डाटा लीक करने के मामले में यूएस फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने फेसबुक पर 5 अरब डॉलर यानी 35 हजार करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना ठोका है। हालांकि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस जुर्माने पर अंतिम मुहर लगने से पहले न्याय विभाग की मंजूरी मिलनी बाकी है।

गौरतलब है कि यह पैनल्टी अब तक किसी टेक कंपनी पर लगने वाली सबसे बड़ा पैनल्टी है। इससे पहले वर्ष 2012 में गूगल पर भी 22 मिलियन डॉलर यानी 154 करोड़ रुपये का जुर्माना लग चुका है। मगर फेसबुक के मामले में जिस तरह की मीडिया रिपोर्ट आ रही हैं उससे माना जा रहा है कि इससे उसकी सेहत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, वह इसके लिए मानसिक तौर पर पहले से तैयार है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक एफटीसी ने निजता का उल्लंघन और यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल करने के लिए फेसबुक पर यह जुर्माना ठोका जा रहा है। जुर्माना लगाये जाने के बाद फेसबुक की तरफ से अभी तक किसी तरह की टिप्पणी नहीं आई और न ही एफटीसी की तरफ से।

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पिछले साल एफटीसी ने घोषणा की थी कि उसने कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा करोड़ों यूजर्स का निजी डेटा चुराने के मामले में फेसबुक के खिलाफ जांच फिर से शुरू कर दी है। गौरतलब है कि 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी अभियान के लिए राजनीतिक सलाहकार के बतौर ब्रिटिश राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने काम किया था। उसी के बाद यह बात सामने आयी थी कि कैंब्रिज एनालिटिका न फेसबुक के करीब 8.7 करोड़ यूजर्स का डाटा चोरी करके उसका प्रयोग ट्रंप को चुनाव जिताने में किया था।

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माचार एजेंसी सिन्हुआ ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि फेसबुक पर जुर्माना लगाये जाने के समर्थन में रिपब्लिकन और विरोध में डेमोक्रेट के एफटीसी कमिश्नरों ने 3-2 से मतदान किया था।

फेसबुक ने तब यह बात स्वीकार भी की थी कि उसने कैंब्रिज एनालिटिका को फेसबुक यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारियां दी थीं। हालांकि उसने यह भी कहा कि यह जानकारी उसने उसने अकादमिक शोधकर्ता के माध्यम से हासिल की थी। फेसबुक की स्वीकारोक्ति के बाद एफटीसी ने इस मामले की जांच शुरू कर दी थी।

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