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गर्भ में भाई के साथ पलने वाली बच्चियां जीवन के हर क्षेत्र में रह जाती हैं पिछड़ी

Prema Negi
27 March 2019 2:09 PM GMT
गर्भ में भाई के साथ पलने वाली बच्चियां जीवन के हर क्षेत्र में रह जाती हैं पिछड़ी
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वैज्ञानिकों ने 1967 से 1978 के बीच पैदा होने वाले बच्चों के आंकड़े किए एकत्रित, इस अवधि में कुल 730,000 बच्चे पैदा हुए, जिनमें से लगभग 13,800 बच्चे थे जुड़वा, इनमें से आधे जुड़वा थे भाई-बहन...

महेंद्र पाण्डेय, वरिष्ठ लेखक

एक नए अध्ययन में पता चला है कि भाई के साथ गर्भ में पलने वाली लड़कियां जीवन की दौड़ में पीछे रह जाती हैं। जुड़वा बहनों की अपेक्षा जुड़वां भाई-बहन की जोड़ी में से बहनें कम पढ़ पाती हैं, कम कमा पाती हैं और उनका वैवाहिक जीवन भी बहुत सफल नहीं होता। हमारे देश में तो लड़कियां सामाजिक कारणों से पीछे रह जाती हैं, पर इस अध्ययन में इसका वैज्ञानिक कारण भी बताया गया है।

इस अध्ययन को अमेरिका के एमोरी यूनिवर्सिटी और नार्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से किया है और इसे अमेरिका के प्रोसीडिंग्स ऑफ़ नेशनल अकैडमी ऑफ़ साइंसेज के नवीनतम अंक में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों ने नोर्वे में वर्ष 1967 से 1978 के बीच पैदा होने वाले बच्चों के आंकड़े एकत्रित किया। इस अवधि में कुल 730,000 बच्चे पैदा हुए, जिनमें लगभग 13,800 जुड़वा थे और इनमें से आधे जुड़वा भाई-बहन थे।

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने जब आकड़ों का विश्लेषण किया तब देखा कि जुड़वा भाई-बहन में से बहन जुड़वा बहनों की जोड़ी की तुलना में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार के सन्दर्भ में पिछड़ जाती है। ऐसी लड़कियों में 15.2 प्रतिशत कम लड़कियां स्नातक तक शिक्षा पूरी कर पाती हैं, 3.9 प्रतिशत अधिक लडकियां शिक्षा पूरी नहीं कर पातीं, 11.7 प्रतिशत कम लड़कियों की शादी हो पाती है, इनके बच्चे 5.8 प्रतिशत कम होते हैं और कमाई के मामले में 8.6 प्रतिशत लड़कियां पीछे रह जाती हैं।

इससे पहले किये गए अनेक अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ था कि भाई-बहनों की जुड़वा जोड़ी में से बहनें लड़कियों के स्वाभाविक गुण खो देतीं हैं। ऐसी लड़कियों में पुरुषों के गुण जैसे शारीरिक बनावट, खतरे से खेलने की आदत और शारीरिक श्रम की आदतें आ जातीं हैं।

वर्तमान अध्ययन के दौरान सबसे पहले वैज्ञानिकों ने यही समझा कि जुड़वा भाई-बहन की एक समान परवरिश के यह नतीजा हो सकता है। पर वैज्ञानिकों ने जिन 13800 जुड़वाओं का अध्ययन किया था उनमें से 583 मामलों में जुड़वा भाई की मृत्यु पैदा होने के समय या फिर ठीक इसके बाद हो गयी थी। इस लिए यह भी संभव नहीं था कि 583 लड़कियों की परवरिश अपने भाई के साथ की गई हो।

दुनियाभर में प्रति 1000 जन्म में से औसतन 4 जुड़वा होते हैं और इनमें से लगभग 50 प्रतिशत जुड़वा भाई-बहन होते हैं। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलेनॉइस में बायोलॉजिकल एंथ्रोपोलॉजी की विशेषज्ञ टालिया मेल्बर के अनुसार इसका कारण गर्भ में पुरुष हार्मोन टेस्टोंस्टीरोंन का उत्सर्जन हो सकता है।

गर्भ में जब भाई-बहन पलते हैं तब 8 से 9 सप्ताह के भीतर इस हारमोन का भारी मात्रा में उत्सर्जन होता है और इसके बाद ही लड़कों का सामान्य विकास आरम्भ होता है। हो सकता है कि यही हारमोन गर्भ में लड़कियों पर बुरा प्रभाव छोड़ता है, जिससे उनमें पुरुषों वाले गुण आने लगते हैं। टालिया मेल्बर के अनुसार इस अध्ययन के निष्कर्ष बहुत रोचक और चौंकाने वाले हैं और इसपर भविष्य में और अध्ययन की आवश्यकता है।

हमारे देश में तो इसका वैज्ञानिक कारण कुछ भी हो, पर सामाजिक कारण ही इतने हैं कि जुड़वा भाई-बहनों में लड़कियां हमेशा उपेक्षित ही रह जाती हैं। भाई-बहन की उम्र में अंतर के समय भी भाई को ही शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरतों में प्राथमिकता मिलती है।

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