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शिक्षा

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ IIMC के छात्रों का भी आंदोलन शुरू, छात्र बोले शिक्षा अधिकार है विशेषाधिकार नहीं

Prema Negi
3 Dec 2019 11:37 AM GMT
फीस बढ़ोतरी के खिलाफ IIMC के छात्रों का भी आंदोलन शुरू, छात्र बोले शिक्षा अधिकार है विशेषाधिकार नहीं

फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ आईआईएमसी के छात्रों का प्रदर्सन, छात्रो ने कहा प्रशासन दे रहा केवल आश्वासन, हमारे पास विरोध प्रदर्शन ही एकमात्र विकल्प...

जनज्वार। दिल्ली मे जवाहर लाल नेहरू विश्वविधालय के छात्र पिछले एक महीने से फीस मे हुई बढ़ोतरी समेत अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच जेएनयू के पास स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के छात्रों ने भी आज से आंदोलन करने का आह्वान कर दिया है। छात्र आईआईएमसी में फीस बढ़ोतरी के साथ ट्यूशन फीस, हॉस्टल और मेस चार्ज में वृद्धि के खिलाफ कैंपस में 3 दिसंबर 2019 से हड़ताल कर रहे हैं।

ईआईएमसी सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त सोसायटी है। वर्ष 1965 में स्थापित आईआईएमसी को देश का सर्वश्रेष्ठ मीडिया संस्थान माना जाता है। छात्रों का कहना है कि सरकारी संस्थान फीस साल दर साल बढ़ाई जा रही है और हर साल 10 प्रतिशत की दर से वृद्धि की जा रही है। आप को बता दें कि इसी साल संस्थान ने फीस में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है।

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मामले को लेकर अंग्रेजी पत्रकारिता की छात्रा आस्था सव्यसाची का कहना है, '10 महीने के कोर्स के लिए 1,68,500 से अधिक फीस और हॉस्टल व मेस चार्ज वहन करना किसी भी मध्यम वर्गीय छात्र के लिए असहनीय है। ऐसे में संस्थान में कई छात्र हैं जिन्हें पहले सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी।

स्था आगे बताती हैं, प्रत्येक छात्रा को हॉस्टल और मेस का शुल्क 6500 रुपये देना होता है जबकि लड़कों से 4800 रुपये का शुल्क हर महीने लिया जाता है, जबकि आईआईएमसी को एक सार्वजनिक वित्तपोषित संस्थान माना जाता है। साथ ही प्रत्येक छात्र को छात्रावास नहीं दिया गया है।

ईआईएमसी में रेडियो और टीवी पत्रकारिता के छात्र हृषिकेश कहते हैं, 'पिछले एक सप्ताह से हम संस्थान के साथ बातचीत के जरिए अपने मुद्दों के समाधान की कोशिश कर रहे हैं लेकिन प्रशासन हमारे मुद्दों पर गौर करने के बजाए चुप्पी साधे हुए है। संस्थान छात्रों को आश्वासन के सिवाय कोई जवाब नहीं दे रहा है। हमने बातचीत के जरिए इन मुद्दों को हल करने की पूरी कोशिश की लेकिन प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण हमारे पास विरोध प्रदर्शन ही केवल एकमात्र विकल्प बचा है।

हृषिकेश आगे कहते हैं, 'सस्ती शिक्षा देश के प्रत्येक छात्र का अधिकार है और अगर वे अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा को पास करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं तो उनकी उम्मीदों को ध्यान में रखना होगा। हम मीडिया संस्थानों को केवल उन लोगों के लिए सुलभ होने की अनुमति नहीं दे सकते हैं जो लाखों का भुगतान कर सकते हैं। शिक्षा एक अधिकार है और विशेषाधिकार नहीं है।'

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ईआईएमसी में इस साल की शुरूआत के साथ ही अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए फीस स्ट्रक्चर को बढ़ा दिया गया था जिसमें रेडियो और टीवी पत्रकारिता की फीस 1,68,500 है, वहीं विज्ञापन और पीआर की फीस 1,31,500 रुपये, हिंदी पत्रकारिता की 95,500 रुपये, अंग्रेजी पत्रकारिता की 95,500 रुपये और उर्दू पत्रकारिता की फीस 55,500 रुपये है।

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