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300 फीसदी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ जेएनयू छात्रों का हल्ला बोल, आर-पार की लड़ाई का बन रहा माहौल

Vikash Rana
5 Nov 2019 6:19 PM GMT
300 फीसदी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ जेएनयू छात्रों का हल्ला बोल, आर-पार की लड़ाई का बन रहा माहौल
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जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय में पिछले एक हफ्ते से छात्र और जेएनयू प्रशासन आ गए हैं आमने सामने, छात्रावास के नियमों में बदलाव, प्रवेश का समय सीमित करने समेत कई नियमों को लेकर छात्र कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन…

जनज्वार, दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय में हॉस्टल मैनुयल और फीस बढ़ोतरी समेत प्रवेश का समय निर्धारित करने जैसे मुद्दों पर अपना विरोध जताते हुए जेएनयूएसयू और विद्यार्थी पिछले 9 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का हॉस्टल मैनुयल के बारे में कहना है कि इसके लागू होने से सबसे ज्यादा नुकसान जेएनयू के 40 प्रतिशत उन विधार्थियों को होगा जिनके माता-पिता काफी गरीब है और आर्थिक रूप से कमजोर है. स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक प्रशासन अपने इस फैसले को वापिस नहीं ले लेता तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

जेएनयू प्रशासन ने हॉस्टल और अन्य नियमों को लेकर एक नया ड्राफ्ट तैयार किया, जिसको लेकर विधार्थियों ने अपनी आपत्ति जताई है. मैनुयल के द्वारा कई ऐसे बदलाव किए जा रहे है जिससे विवि को जेल बनाने की कोशिश की जा रही है. ड्राफ्ट के द्वारा प्रशासन ने सिंगल रुम का किराया 20 रुपए प्रतिमहीने से बढ़ाकर 600 रुपए प्रति महीना कर दिया है. वही डबल सीटर रूम का किराया 10 रुपए से प्रतिमहीने बढ़ाकर 300 रुपए प्रति महीना कर दिया है. नए नियमों के अनुसार छात्रों को सर्विस चार्ज के रुप में हर महीने 1700 रुपए का भुगतान करना होगा इसके अलावा एडमिशन के समय सिक्योरिटी की रकम को भी 5500 से बढ़ाकर 12000 रुपए कर दिया गया हैं।

स मुद्दे को लेकर जनज्वार से बात करते हुए जेएनयू छात्रसगंठन की अध्यक्ष आइशी घोष ने बताया कि, 'प्रशासन द्वारा जो मैनुयल लाया जा रहा है वो पूरी तरह से छात्रों और खासकर गरीब घरों से आने वाले विधार्थियों के एकदम खिलाफ है. जेएनयू में लगभग वो बच्चे पढ़ने आते है जो काफी गरीब है तथा जिनके मां बाप किसान, मजदूर है. लेकिन प्रशासन ये मैनुअल लाकर उनके पढ़ने के अधिकार को छीन रहा है. इसके अलावा छात्रों को प्रदर्शन करने से भी रोका जा रहा है और लड़कियों को क्या पहनना चाहिए इसके बारे में बताया जा रहा है। इन सब फैसलों के बारे में जेएनयूएसयू को कुछ भी नहीं बताया गया है छात्रों ने हमें चुनाव के जरिए चुना है. जिसके कारण हम विधार्थियों का नेतृत्व करते हैं लेकिन प्रशासन विवि को जेल बनाने जा रहा है जिसके लिए उन्होंने सीआरपीएफ को भी बुला लिया है.

जेएनयू की एमफिल की छात्रा ढोलन हॉस्टस मैनुयल को लेकर बोलती है कि, 'प्रशासन का यह रवैया पूरी तरह से आलोकतांत्रिक है. छात्रों के समर्थन के बिना इस ड्राफ्ट को पास किया जा रहा है और ये ड्राफ्ट पूरी तरह से स्टूडेंट्स के खिलाफ है. गरीब घर के बच्चे इससे प्रभावित होंगे ही लेकिन इससे जो छात्राएं यहां पर पढ़ती है उनकी निजता के ऊपर भी असर पड़ेगा ड्राफ्ट में बताया जा रहा है कि छात्राओं को क्या पहनना चाहिए तथा उनके घुमने फिरने के समय को भी सीमित करा जा रहा है।

जेएनयू प्रशासन कल 6 दिसंबर को हॉस्टल प्रेजिडेंट के साथ मीटिंग करने जा रहा है जिस पर छात्रों की मांगों के साथ साथ ड्राफ्ट को लेकर भी बात करी जाएगी हालांकि इस मीटिंग में जेएनयूएसयू को शामिल नहीं किया जा रहा है जिसको लेकर यूनियन द्वारा विरोध किया जा रहा है।

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