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प्लास्टिक फैक्ट्री में आग से आधा दर्जन की मौत, 30 मलबे में दबे

Janjwar Team
21 Nov 2017 10:14 AM GMT
प्लास्टिक फैक्ट्री में आग से आधा दर्जन की मौत, 30 मलबे में दबे
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मजदूरों की जिंदगी का नहीं कोई मोल, इसलिए फैक्ट्रियों में होती रहती हैं दुर्घटनाएं

लुधियाना। पंजाब के लुधियाना में कल यानी 20 नवंबर के तड़के सूफिया चौक के जनकपुरी इलाके में स्थित एक पांच मंजिला प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। इस दुर्घटना में तकरीबन आधे दर्जन लोगों के अब तक मरने की खबर है, वहीं तकरीबन 50 लोग गंभीर रूप से घायल हुए है।

घटनाक्रम के मुताबिक जब सुबह 7 बजे के आसपास फैक्ट्री में आग लगी तो फायर ब्रिगेड द्वारा दस बजे तक उस पर काबू पा लिया था, मगर दोबारा दुबारा फैक्ट्री में रखे केमिकल के ड्रमों में विस्फोट होने से आग भयानक रूप से भड़क गई, जिसे काबू में करना मुश्किल हो गया। इसमें 5 मंजिला इमारत तो ढह ही गई, साथ ही बगल की दो फैक्ट्रियों और 7 घरों को भी आग ने अपने लपेटे में ले लिया।

बचाव कार्य अभी भी जारी है। आसपास मौजूद लोगों के मुताबिक दिन के सवा ग्यारह बजे बजे दूसरा विस्फोट हुआ और साढ़े बजे के तकरीबन तीसरा विस्फोट हुआ तो पांच मंजिला फैक्ट्री ढह गई। तीसरे विस्फोट ने पांच मंजिला इमारत को तो अपनी जद में ले ही लिया, पास की दो फैक्ट्रिया भी इसके लपेटे में आकर ढह गईं।

अब तक की जानकारी के मुताबिक इमारत गिरने से 9 फायर ब्रिगेड कर्मी, 7 फैक्ट्री कर्मचारी और बचाव कार्य में लगे लगभग 30 लोग मलबे में दब गए। देर रात तक आधी दर्जन लाशें मलबे से निकाली जा चुकी थीं।

मगर रात को ढाई बजे मलबे में गिरे कैमिकल से फिर आग लग गई। सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक इस बार आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी।

फैक्ट्री के प्रोडक्शन मैनेजर गुरदीप सिंह के मुताबिक ऊपरी मंजिल पर लगी आग ग्राउंड फ्लोर पर पहुंच चुकी थी ।आग जैसे ही एक कमरे में रखे केमिकल स्याही वाले ड्रमों तक पहुंची तो फिर धमाका हुआ। इसके बाद बिल्डिंग ही गिर गई। आग की लपटें गली तक आईं। बाहर खड़े लोगों ने भागकर जान बचाई।

मामले की जांच कर रही पुलिस के मुताबिक जो पांचमंजिला इमारत ढही है वह अवैध रूप से बनी थी। इंद्रजीत सिंह गोला ने इसे 2002-03 के आसपास खरीदा था। तब ये बिल्डिंग सिर्फ दोमंजिला बनी थी। इसके बाद इसमें जो निर्माण हुआ उसके लिए निगम से मंजूरी ली गई हो, जांच में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले 5 सालों में सरकारी अफसरों की मिलीभगत से अवैध तरीके से इस बिल्डिंग का निर्माण किया गया। इतना ही इस पांच मंजिला इमारत में हमेशा खतरनाक कैमिकल भारी मात्रा में रहता था, जबकि आसपास रिहायशी बिल्डिंगें हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार फैक्ट्री मालिक को कहा था कि वे यहां से कैमिकल दूर रखें, जबकि मालिक ने कभी लोगों की इस शिकायत पर ध्यान नहीं दिया।

वर्ष 2012 में जालंधर के शीतल फाइबर्स ढह गयी और 23 मजदूरों मारे गए। पर उस मामले में कंपनी के मालिक शितल विज और अन्य 5 खिलाफ दर्ज मुकदमें में कुछ नहीं हो पाया, किसी को कोई सजा नहीं हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि लुधियाना की 70 फीसदी फैक्ट्रियां में सुरक्षा नियमों जैसे ईमारत की बनावट, आग, दुर्घटना के दौरान बाहर भागने के स्पेस आदि की कोई सुविधा नहीं है। करीब 30 फीसदी फैक्ट्रियां आवास की जरूरत के लिए बनी ईमारतों में चलती हैं।

सिर्फ लुधियाना में इसी साल अबतक 9 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें फैक्ट्री में आग लगने से लेकर उनके ढहने तक की वारदातें शामिल हैं।

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