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बिल्डरों के कहने पर येदियुरप्पा ने कैंसिल कराई ट्रेनें, कर्नाटक के प्रवासी मजदूर अब नहीं जा पाएंगे अपने घर

Manish Kumar
6 May 2020 6:03 AM GMT
बिल्डरों के कहने पर येदियुरप्पा ने कैंसिल कराई ट्रेनें, कर्नाटक के प्रवासी मजदूर अब नहीं जा पाएंगे अपने घर
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राज्य सरकार ने भारतीय रेलवे को पत्र लिख कर बुधवार (5 मई) से सभी ट्रेनों को कैंसिल करने को कहा है....

जनज्वारः कर्नाटक के प्रवासी मजदूर अब अपने घर वापस नहीं लौट पाएंगे. मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा की बिल्डिरों के साथ हुई एक मीटिंग के बाद कर्नाटक सरकार ने उन सारी ट्रनों को रद्द करने का फैसला किया है जो कि प्रवासी मजदूरों को लेकर जाने वाली हैं.

द क्विंट के मुताबिक राज्य सरकार ने भारतीय रेलवे को पत्र लिख कर बुधवार 5 मई से सभी ट्रेनों को कैंसिल करने को कहा है. कर्नाटक के अंतर-राज्यीय यात्रा के लिए नोडल अधिकारी एन मंजूनाथ प्रसाद साउथ वेस्टर्न रेलवे को एक लेटर लिखकर कहा है कि अब ट्रेन सवाओं की जरुरत नहीं रही.

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5 मई को लिखे गए पत्र में लिखा है, 'हमने पांच दिनों तक रोज दो ट्रेनों की व्यवस्था करने को कहा था. 6 मई के लिए तीन ट्रेनें की व्यवस्था के लिए कहा था. ये ट्रेनें बिहार के दानापुर जानी थीं। कल (बुधवार) से ट्रेन सेवाओं की आवश्यकता नहीं है, इसलिए उपरोक्त संदर्भ के तहत पहले लिखा गया पत्र वापस लिया जाता है।'

मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने मंगलवार को ट्वीट कर बिल्डरों के साथ हुई इस बैठक के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने लिखा, 'प्रवासी मजदूरों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बिल्डर्स के साथ एक बैठक आयोजित की गई. राज्य में COVID19 स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में नियंत्रण में है.



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उन्होंने लिखा, 'रेड जोन को छोड़कर, व्यापार, निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियों को फिर से शुरू करना होगा। इस संदर्भ में, यह समझाया गया कि प्रवासी श्रमिकों की अनावश्यक यात्रा को नियंत्रित किया जाना है। बिल्डरों ने कहा कि मजदूरों को सभी आवश्यक सुविधाएं दी गई हैं और निर्माण गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं।'

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उन्होंने लिखा, मंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मजदूरों को समझाएं कि वे अपने गृह राज्य न जाएं. मजदूरों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।



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बता दें लॉकडाउन के कारण देश के अलग ​अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूर, छात्र, पर्यटकों सहित अन्य लोगों के लिए उनके शहरों और गांवों तक पहुंचाने की इजजात केंद्र सरकार ने शुक्रवार (1 मई) को दी थी. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर पर हुई बैठक के बाद इस पर निर्णय लिया गया था. इस बैठक में पीएम के साथ गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री पीयूष गोयल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. गृहमंत्रालय ने इस बारे में विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की थी.

गौरतलब है कि लॉकडाउन का सबसे ज्यादा प्रभाव प्रवासी मजदूरों पर ही पड़ा है. लॉकडाउन घोषित होने के बाद उद्योग धंधे और बाजार बंद हो जाने की वजह से करोड़ों मजदूरों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है. एक महीने से भी ज्यादा समय से यह लोग बिना किसी काम के शहरों में फंसे रहे हैं.

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