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तेलंगाना से छत्तीसगढ़ पैदल लौट रही प्रवासी मजदूर महिला ने सड़क किनारे जन्मा बच्चा

Prema Negi
5 May 2020 5:43 PM GMT
तेलंगाना से छत्तीसगढ़ पैदल लौट रही प्रवासी मजदूर महिला ने सड़क किनारे जन्मा बच्चा
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पैदल चल रही गर्भवती महिला को ले जाने के लिए नहीं मिल पाया था कोई वाहन, इसलिए उसके साथ पैदल चलने वाली मजदूर महिलाओं की मदद से उसने सड़क किनारे दिया बच्चे को जन्म...

हैदराबाद, जनज्वार। केंद्र समेत तमाम राज्य सरकारें कोरोना के बाद किये गये लॉकडाउन के बाद दावे कर रही हैं कि मजदूरों खासकर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के तमाम उपाय किये जा रहे हैं, कोशिश की जा रही है कि उन्हें कोई परेशानी न हो। मगर कोरोना का सबसे ज्यादा अगर कोई दंश झेलने को मजबूर है तो यही मजदूर। लॉकडाउन के बाद भूखे—प्यासे मजदूर अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं तो वापस घरों की तरफ पैदल लौटने के दौरान भी कई मजदूर जान गंवा बैठे हैं।

सरकार का मजदूर हितैषी चेहरा और दावों की पोल खोलती रिपोर्टें मीडिया में सामने आती रहती हैं। कई मजदूर अब तक लॉकडाउन में अपनी जान गंवा बैठे हैं। मजदूरों की त्रासदी की एक ऐसी ही कहानी तेलंगाना में सामने आई है, जहां एक गर्भवती प्रवासी मजदूर महिला अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ के लिए पैदल चली थी। 70 किलोमीटर पैदल चलने के बाद उसे प्रसव पीड़ा हुई, मगर रास्ते में किसी तरह की कोई मेडिकल सुविधा या अस्पताल तक ले जाने के लिए वाहन तक नहीं उपलब्ध हुआ तो सड़क पर ही उस मजदूर महिला ने बच्चे को जन्म दिया।

छत्तीसगढ़ की एक प्रवासी महिला श्रमिक ने तेलंगाना के मेडक जिले में मंगलवार 5 मई की तड़के सड़क किनारे एक बच्चे को जन्म दिया।

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हिला अपने पति और कुछ अन्य प्रवासी श्रमिकों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 पर पैदल अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ लौट रही थी।

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ह घटना जापती शिवनूर गांव में घटी, जब महिला को प्रस्रव पीड़ा होने लगी। महिला की पहचान अनिता बाई के रूप में हुई है। वहां चूंकि कोई वाहन उपलब्ध नहीं था कि उसे अस्पताल ले जाया जा सके, लिहाजा उसके साथ चल रही महिलाओं की मदद से उसने सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दिया।

कुछ स्थानीय लोगों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद एक पुलिस उपनिरीक्षक ने एक निजी एंबुलेंस का बंदोबस्त किया और महिला को रामयापेट में एक सरकारी अस्पताल पहुंचाया।

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सर्कल इंस्पेक्टर नागार्जुन गौड़ ने आईएएनएस को बताया कि, "घटना के बारे में फोन कॉल मिलने पर एक एंबुलेंस का बंददोबस्त किया औैर महिला व नवजात दोनों को अस्पताल पहुंचाया। दोनों सुरक्षित हैं।"

महिला अपने पति और अन्य लोगों के साथ अपने घर लौटने के लिए 70 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय कर चुकी थी।

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