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मोदी सरकार ने पंजाब के गरीबों के ​लिये भेजा था फफूंद लगा सड़ा अनाज, अमरिंदर ने किया वापस

Prema Negi
16 May 2020 5:33 AM GMT
मोदी सरकार ने पंजाब के गरीबों के ​लिये भेजा था फफूंद लगा सड़ा अनाज, अमरिंदर ने किया वापस
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पंजाब सरकार ने लगाया केंद्र सरकार पर आरोप पहले ही एक माह देरी से दाल भिजवायी गयी थी और जो भिजवायी गयी उसकी गुणवत्ता इतनी खराब थी कि इंसान तो क्या इसे जानवर भी नहीं खा सकते हैं....

जनज्वार, चंडीगढ़। कोरोना से हुए लॉकडाउन के बाद गरीब मजदूरों की हालत बहुत खराब है, उनकी नौबत भूखों मरने की आ गयी है। अब तक कई मजदूर दुर्घटनाओं में मर चुके हैं तो कई ने आत्महत्या कर ली है। ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गरीबों को लगातार राशन देने की बात कही जा रही है, जिसकी कलई पंजाब में खुल गयी।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मोदी सरकार ने जो दाल पंजाब में भेजी थी, वह सड़ी हुई निकली। करीब 46 मीट्रिक टन दाल की गुणवत्ता बेहद खराब थी। इसमें बदबू आ रही थी, इसके साथ ही इसमें फफूंद भी लगी थी। लाेगों ने जब दाल पर आब्जेक्शन उठाया तो राज्य सरकार को पता चला कि दाल खराब है। दाल खराब होने की बात पता चलने पर राज्य की अमरिंदर सरकार ने उसे वापस लौटा दिया।

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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्ना योजना के तहत सड़ी हुई दाल को जब गरीबों में बांटा जा रहा था, तो उन्होंने इसकी गुणवत्ता पर आपत्ति जतायी। इसके बाद दाल की जांच हुई। इसमें पाया गया कि दाल में फफूंदी लगी हुई है। इसके साथ ही इसमें बदबू आ रही है। तुरंत वितरण के लिये भेजी गयी दाल वापस मंगायी गयी। अब दाल केंद्र को वापस कर दी है।

पंजाब के खाद्य आपूर्ति विभाग के निदेशक आनंदिता मित्रा ने बताया कि हमें डीसी मोहाली गिरीश डयालन से शिकायत मिली थी कि दाल खाने के लिये उपयुक्त नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें कई अन्य जिलों से भी इस तरह की शिकायत मिली थी। इस पर जब दाल की जांच की तो पाया कि यह खाने के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बाद दाल को वापस भेजा गया है।

photo : social media

ह दाल केंद्र की नेफेड की ओर से पंजाब में भेजी गयी थी। पंजाब के खाद्य आपूर्ति मंत्री भारत भूषण अंशु ने बताया कि पहले ही एक माह देरी से दाल भिजवायी गयी थी और जो भिजवायी गयी उसकी गुणवत्ता इतनी खराब थी कि इंसान तो क्या इसे जानवर भी नहीं खा सकते हैं। इस वजह इस दाल को वपस भेजने के सिवाय हमारे पास कोई चारा नहीं था।

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दाल को वापस भेजने के साथ ही पंजाब और केंद्र में टकराव भी तेज हो गया है। पंजाब सरकार का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार इस भयावह महामारी के मौके पर भी उन राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है, जहां जहां कांग्रेस की सरकार है।

कैप्टन अमरेंदर सिंह ने कहा है कि पीएम मोदी सिर्फ जुमलेबाजी कर रहे हैं। ग्राउंउ पर कुछ भी नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि इस मौके पर जबकि सभी को मिल कर काम करना चाहिये था, हो यह रहा है कि अब भी राजनीति हो रही है।

पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि जो दाल भेजी गयी थी, उसकी जांच तक नहीं की गयी। यदि जांच होती तो वहीं पर पता चल सकता था कि यह खाने लायक नहीं है। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दाल या तो बहुत पुरानी है या फिर घटिया दाल थी। जिसे ऐसे वक्त पर पंजाब में भेजा गया, जब यहां बड़ी संख्या में लोग भोजन के लिये सरकार पर निर्भर है। निश्चित ही दाल की खराब गुणवत्ता के बाद लोगों में रोष है, क्योंकि इस वजह से उन्हें राशन मिलने में देरी हुई है।

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पंजाब सरकार ने मांग की कि है इस मामले की जांच होनी चाहिये। आखिर क्यों खराब दाल पंजाब में भेजी गयी। यह दाल नेफेड ने कहां से खरीदी है? इसे खरीद करने वाले कौन कौन अधिकारी हैं? उनकी जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिये।

जाने माने कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने दाल केंद्र को वापस भेजने के पंजाब सरकार के निर्णय की सरहाना की है। उन्होंने बताया कि यह बड़ा कदम है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार को घेरा है।



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पंजाब में दाल वापस करने के मामले में जब नेफेड के पंचकूला स्थित ब्रांच कार्यालय में संपर्क किया गया तो वहां से कोई जवाब नहीं दिया गया। मेल के माध्यम से भी ब्रांच के जिम्मेदार अधिकारियों से वास्तु स्थिति जानने की कोशिश की गयी, लेकिन मेल का भी कोई रिस्पांस अभी तक नहीं आया।

स समामले में पंजाब खेत मजदूर यूनियन के पटियाला के अध्यक्ष संतोष सिंह ने बताया कि गरीबों को राशन चाहिये। वह चाहे केंद्र से आये या प्रदेश सरकार दे, लॉकडाउन की वजह से लोगों को राशन नहीं मिल रहा है। लोगों को काफी दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि राशन की गुणवत्ता सही हो, यह सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार का काम है। क्योंकि प्रदेश के लोग प्रदेश सरकार को जानते हैं, केंद्र क्या कर रहा है, इससे उन्हें ज्यादा मतलब नहीं होता।

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