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शिक्षा

राजस्थान के गर्ल्स स्कूलों में अब नहीं पढ़ा पायेंगे जवान पुरुष टीचर

Prema Negi
19 Oct 2019 11:10 AM GMT
राजस्थान के गर्ल्स स्कूलों में अब नहीं पढ़ा पायेंगे जवान पुरुष टीचर
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राजस्थान के लड़कियों वाले सरकारी स्कूलों में अब 50 साल से कम उम्र के पुरुष टीचर नहीं पढ़ा पाएंगे, ऐसा कदम उठाया जा रहा है स्कूली बच्चियों का शिक्षकों द्वारा किये जाने वाले यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए...

जनज्वार। देश में बच्चियों, महिलाओं, बुजुर्गों के साथ होने वाले जघन्य बलात्कार कांडों को रोकने के लिए सरकार की तरफ से कड़े कानून बनाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट चलाने जैसी बातें कही जाती हैं, मगर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने तो देशभर में चाइल्ड रेप मामले में चिंता जताई और मामले में खुद संज्ञान लेते हुए परीक्षण करने का फैसला भी किया था।

सी दिशा में स्कूली बच्चियों के साथ शिक्षकों द्वारा किये जाने वाले यौन उत्पीड़न पर रोक लगाने के लिए राजस्थान सरकार ने एक अनोखा कदम उठाया है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद डोतासरा ने शुक्रवार 18 अक्टूबर को कहा है कि लड़कियों वाले स्कूलों में अब 50 साल से कम उम्र के पुरुष टीचर नहीं पढ़ा पाएंगे और उनकी जगह पर महिला शिक्षकों की तैनाती की जायेगी। ऐसा कदम बच्चियों का शिक्षकों द्वारा किये जाने वाले यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए उठाया जा रहा है।

हालांकि राजस्थान सरकार के लड़कियों के स्कूलों के लिए लिये गये अजीबोगरीब फैसले पर बहस शुरू हो गयी है। लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि ऐसे फैसलों से बलात्कार की घटनाओं पर लगाम नहीं लगायी जा सकती। जिन केसों में बलात्कारी पुरुष 50 साल से ज्यादा का है, उन हालातों में क्या कहेंगे।

राजस्थान सरकार के इस फैसले को अपरिपक्व और बचकाना कहा जा रहा है। हालांकि लड़कियों के स्कूलों में महिला शिक्षक या फिर 50 साल से ज्यादा के पुरुष शिक्षकों की तैनाती वाला बयान देने के बाद में शिक्षा मंत्री गोविंद दोटासरा ने यह भी कहा कि यह फैसला तभी लागू किया जाएगा, जब हमारे पास पर्याप्त संख्या में महिला शिक्षक होंगी। माना जा रहा है कि देशभर के कई स्कूलों में पुरुष शिक्षकों द्वारा लड़कियों का यौन उत्पीड़न किये जाने के कई केस सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने यह फैसला लिया है।

शिक्षामंत्री गोविंद डोटासरा ने स्कूली बच्चियों के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए लिए जा रहे इस कदम के बारे में आगे कहा कि, 'शिक्षक संगठनों और शिक्षकों से बातचीत करने के बाद हम एक रोडमैप तैयार तैयार करेंगे और नीति बनाएंगे, जिससे ज्यादा से महिला शिक्षकों की नियुक्ति हो सके। महिला शिक्षकों के होने से लड़कियां उनसे अपनी मां और बहन की तरह की अपनी समस्याएं साझा कर सकेंगी और उन्हें कोई समस्या नहीं होगी।'

राजस्थान सरकार द्वारा जारी की गयी शिक्षा रिपोर्ट 2018—2019 के मुताबिक राज्य में फिलहाल कुल 68,910 स्कूल ऐसे हैं, जहां लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ते हैं। सिर्फ 1,019 स्कूल सिर्फ लड़कियों के हैं। टोटल 3.8 लाख शिक्षकों वाले राजस्थान में पुरुष शिक्षकों और महिला शिक्षकों का अनुपात 2:1 का है।

फिलहाल राजस्थान सरकार के इस फैसले पर तमाम सवाल उठाते हुए लोग यह भी कहने लगे हैं कि बेशक यह कदम स्वागत योग्य है, मगर क्या वाकई इससे स्कूलों में बच्चियों के यौन उत्पीड़न पर रोक लग पायेगी। एक बार को यह मान भी लिया जाये कि सिर्फ लड़कियों वाले स्कूलों में यौन उत्पीड़न की घटनायें रुक जायेंगी, मगर जिन विद्यालयों में लड़के—लड़कियां दोनों पढ़ते हैं, वहां होने वाले यौन उत्पीड़न के अपराधों पर सरकार कैसे रोक लगायेगी।

गौरतलब है कि एक जनवरी से लेकर 30 जून के बीच इस साल बच्चियों से रेप के 24 हजार 212 केस दर्ज हुए। इनमें से 11,981 मामलों में जांच चल रही है। पुलिस ने अभी तक 12,231 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। ट्रायल में अभी तक 911 मामलों में फैसला आ चुका है। 6449 मामले में ट्रायल चला है। इस तरह केवल 900 मामले में ट्रायल पूरा हुआ है और फैसला आया है, जो कि कुल संख्या का मात्र चार फीसद है। इनमें से स्कूली बच्चियों की संख्या भी अच्छी खासी है, जिनका उनके अध्यापकों द्वारा ही यौन शोषण किया गया।

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