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निजामुद्दीज मरकज के धार्मिक अंधविश्वास ने दिल्ली को बनाया कोरोना का रेडजोन, 24 पॉजिटिव मरीज मिले

Prema Negi
31 March 2020 5:39 AM GMT
निजामुद्दीज मरकज के धार्मिक अंधविश्वास ने दिल्ली को बनाया कोरोना का रेडजोन, 24 पॉजिटिव मरीज मिले
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अब तक देशभर में कोरोना से 32 मौतें हो चुकी हैं। इनमें निजामुद्दीन मरकज से वापस लौटे 10 लोग भी शामिल हैं और कोरोना पॉजिटिव से संक्रमित हैं...

जनज्वार। दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के धार्मिक अंधविश्वास ने दिल्ली को कोरोना का रेडजोन बना दिया है। सिर्फ निजामुद्दीन के कार्यक्रम में शामिल लोगों में अबतक कोरोना के 24 पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद देशभर में हड़कंप मच गया है।

भी तक मरकज से तकरीबन 900 लोगों को दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है। जानकारी के मुताबिक लगभग 300 लोगों को जोकि गंभीर हालत में हैं, अभी अस्पताल पहुंचाया जाना शेष है। इतने बड़े पैमाने पर कोरोना संदिग्धों के मामले सामने आने के बाद निजामुद्दीन मस्जिद वाले इलाके को सील कर दिया गया है।

अब 1600 लोगों की पुलिस तलाश कर रही है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने इलाके का दौरा किया है। पुलिस ने महामारी एक्ट के तहत इन लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि मरकज ने समय रहते पुलिस का सूचना दी थी, पर पुलिस और राज्य सरकार का महकमा किंतु—परंतु में ही लगा रहा और अब यह भयावह स्थिति देखने को मिल रही है।

मामले में मौलानाओं यानी जमात से जुड़े लोगों की लापरवाही तो सामने आ ही रही है, साथ ही पुलिस व्यवस्था की भी लापरवाही साफ दिख रही है। सवाल है कि जब पूरे विश्व को कोरोना ने अपनी जद में लिया हुआ है तो इतने बड़े पैमाने पर यानी तकरीबन 2000 से भी ज्यादा लोगों के एक जगह इकट्ठा होने की जानकारी से पुलिस प्रशासन क्यों इंकार कर रहा है, जबकि मरकज से जुड़े लोगों का कहना है कि उसने पुलिस प्रशासन को इस बारे में सूचना दी थी। अगर थी तो उसने इतने बड़े पैमाने पर इस खौफनाक वक्त में इतने ज्यादा लोगों को क्यों इकट्ठा होने दिया। साथ ही सवाल ये भी है कि आखिर धार्मिक अंधविश्वास के नाम पर इतने व्यापक तौर पर कोरोना को फैलाने वाले कृत्य को धर्म कैसे कहा जा सकता है।

निजामुद्दीन मरकज के पदाधिकारियों द्वारा निजामुद्दीन थाने के थानाध्यक्ष को लिखा गया पत्र

ह घटना तब सामने आई जब निजामुद्दीन इलाके में जमात मुख्यालय में रुके लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने से हालात बेकाबू हुए। गौरतलब है कि दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान सहित अन्य कई देशों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने 1 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था।

स्पतालों में भर्ती 900 लोगोंं में से लगभग 300 लोग ऐसे हैं जिनमें कोरोनावायरस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों को खांसी जुखाम और तेज बुखार की शिकायत है। मरकज से तेलंगाना लौटै 10 लोगों की बीते दो—तीन दिनों में मौत की खबर आ रही है, जिनमें कोरोना के लक्षण पाये गये थे।

स्वास्थ्य विभाग के पास कोरोना के संदिग्धों की इतनी भारी संख्या का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। निजामुद्दीन की उस मस्जिद को सोमवार 30 मार्च को बंद कर सेनेटाइज करवाया जा रहा है। अब पुलिस ड्रोन के माध्यम से संदिग्ध लोगों की तलाश कर रही है और इसके लिए इलाके में ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं। इस इलाके में पुलिस के अलावा डॉक्टरों की टीम भी तैनात की गई है।

के नाम पर हजारों लोगों की जान से खिलवाड़ पर फिरोज खान कहते हैं, 'मूर्खता की आखिरी सीमा जहां खत्म होती है, वहां से धर्म शुरू होता है। हर विपत्ति, हर आपदा में लोग ज्यादा, और ज्यादा धार्मिक हो जाते हैं। जब दुनियाभर में लोगों से फासला बनाये रखने की एडवाइजरी जारी हो रही थी, दिल्ली के निज़ामुद्दीन में देश और दुनिया के अल्लाह वाले जमा हो रहे थे। करीब 2000 लोग। ये अब तक वहीं थे। इनमें से अब 200 कोरोना सस्पेक्टेड हैं। इनमें से तमाम पॉजिटिव होंगे ही और वे पहले से खतरे में पड़े देश-दुनिया को और खतरे में डालेंगे। ये अल्लाह वाले लोग थे। सबसे ज्यादा पवित्र लोग। इनका खुदा इन्हें नहीं बचा सका। किसी का खुदा कभी किसी को नहीं बचाता। इन लोगों के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए और हत्या के मामले चलने चाहिए।'

फिरोज आगे कहते हैं, 'बाढ़ के समय मंदिर और मूर्तियां पानी में वैसे ही बह रही होती हैं, जैसे कोई खिलौना। मस्जिदों की दीवारें पसर जाती हैं सड़क पर। ऐसे सजदे में चली जाती हैं कि कभी नहीं उठतीं। धर्म का व्यापार दुनियाभर में फल-फूल रहा है। यह सरकारें बनाता है, नफरत फैलाने की बुनियाद में ये है।'

गौरतलब है कि भारत में तब्लीगी जमात का केंद्र निजामुद्दीन मरकज है। देश ही नहीं पूरी दुनिया से जमात यानी धार्मिक लोगों की टोली, जो इस्लाम के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए निकलते हैं, निजामुद्दीन मरकज पहुंचते हैं। मरकज में ही तय किया जाता है कि देशी या विदेशी जमात को भारत के किस क्षेत्र में जाना है।

ब तक जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक दिल्ली में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए ज्यादातर लोग मलेशिया और इंडोनेशिया से आये थे। ये लोग 27 फरवरी से 1 मार्च तक कुआलालंपुर में हुए इस्लामिक उपदेशकों के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद भारत पहुंचे थे।

तने बड़े पैमाने पर लोगों के धर्म के नाम पर इकट्ठा होने से अब तक दिल्ली में ही कल 30 मार्च को अब तक के सबसे ज्यादा 25 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 24 तबलीगी से जुड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक दिल्ली में लगभग 100 कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं ।

फिलहाल दिल्ली के 7 सरकारी अस्पतालों में भर्ती किया हुआ है। 20 हजार से ज्यादा लोग घरों में और सरकार की ओर से बनाये गए क्वारन्टीन केंद्रों में रह रहे हैं।

बलीगी का मतलब अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाला होता है। जमात का मतलब है एक खास धार्मिक समूह यानी धार्मिक लोगों की टोली, जो इस्लाम के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए निकलते हैं। मरकज का मतलब होता है बैठक या फिर इनके मिलने का केंद्र।

गौरतलब है कि हजरत मौलाना इलियास कांधलवी ने 1926-27 में सुन्नी मुसलमानों के संगठन तबलीगी जमात की स्थापना दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित मस्जिद से की थी इसीलिए यह जमात का मुख्यालय है। इस्लाम की शिक्षा देने के लिए इलियास शुरुआत में हरियाणा के मेवात के मुस्लिम समुदाय के लोगों को पहली जमात में ले गए थे।

मात से जुड़े लोग दावा करते हैं कि जमात दुनिया के 213 मुल्कों में फैली है और इससे दुनियाभर के 15 करोड़ लोग जुड़े हैं। इनका कहना है कि बिना सरकारी मदद के इस संगठन का संचालन किया जाता है और जमात अपना अमीर (अध्यक्ष) चुनती है। इससे जुड़े लोग उसी अमीर की बात मानते हैं।

मात का पहला धार्मिक कार्यक्रम 1941 में भारत में हुआ था। इसमें 25000 लोग शामिल हुए थे। 1940 तक जमात का कामकाज सिर्फ भारत तक ही था। इसके बाद जमात की शाखाएं पाकिस्तान और बांग्लादेश में खुल गईं। जमात हर साल देश में एक बड़ा कार्यक्रम करती है, जिसे इज्तेमा कहते हैं।

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