सिक्योरिटी

वैज्ञानिकों ने कहा स्मार्टफोन का इस्तेमाल बता देता है आपका व्यक्तित्व

Prema Negi
31 July 2019 6:29 AM GMT
वैज्ञानिकों ने कहा स्मार्टफोन का इस्तेमाल बता देता है आपका व्यक्तित्व
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स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के जरिये आज भले ही विश्व की आबादी का बड़ा हिस्सा, इतिहास के किसी भी दौर की तुलना में अधिक संख्या में एक दूसरे से जुड़ा है, पर वास्तविकता यही है कि समाज में इसी सोशल मीडिया के चलते आज जितना बिखराव है वह पहले किसी दौर में नहीं रहा....

महेंद्र पाण्डेय की रिपोर्ट

ऑस्ट्रेलिया के आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार स्मार्टफोन के उपयोग के आधार पर आपके व्यक्तित्व की सही जानकारी दी जा सकती है। पहले भी इस तरह के दावे किये गए हैं, पर उनका आधार आप कितनी देर और कितनी बार दिन में स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं, या फिर आप किस तरह के मैसेज करते हैं, रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का आधार स्मार्टफोन में लगे ऐक्सेलेरोमीटर हैं, जिनसे आप गति वाले गेम्स खेलते हैं या फिर आप कितने कदम दिनभर में चले, यह जानते हैं। इन वैज्ञानिकों के अनुसार विभिन्न व्यक्तित्व वाले लोगों की शारीरिक गतिविधियाँ अलग-अलग तरीके से होती हैं।

आरएमआईटी यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक फ्लोरा सलीम के अनुसार हम किस गति से और कितनी दूर तक टहलते हैं, हम दिन या रात में कब फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं, इन सबकी जानकारी के बाद किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की सही जानकारी दी जा सकती है। इन वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन के दौरान पांच प्रमुख प्रकार के व्यक्तित्व बहुर्मुखी, खुलापन, आसानी से सहमत होने वाले, कर्त्तव्यनिष्ठ और मनोविक्षुब्ध, का अध्ययन किया।

जून 2019 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में 57 प्रतिशत आबादी इंटरनेट का उपयोग करती है। यूरोप में 86.8 प्रतिशत, अमेरिका में 89.4 प्रतिशत और एशिया में 51.9 प्रतिशत आबादी इंटरनेट का उपयोग करती है। यूरोप में लगभग 72 करोड़ और अमेरिका में 33 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। दूसरी तरफ एशिया में कुल 220 करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जिसमें से चीन में 83 करोड़ और भारत में 56 करोड़ लोग रहते हैं।

दुनिया में 5.11 अरब लोग मोबाइल का उपयोग करते हैं, इंटरनेट का उपयोग 4.39 अरब, सोशल मीडिया का उपयोग 3.48 अरब लोग करते हैं, दुनिया में 3.26 अरब लोग अपने स्मार्टफोन पर ही सोशल मीडिया से जुड़े रहते हैं। सोशल मीडिया की पहुँच दुनिया के 230 देशों में है। दुनिया में औसतन लोग दिनभर में 6 घंटे 43 मिनट इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और 2 घंटे 16 मिनट सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं।

आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार जो लोग हरेक शाम एक जैसी दूरी तय करते हैं, वे अंतर्मुखी होते हैं, जबकि हरेक दिन बदलाव वाली दूरी से उनके बहुर्मुखी होने का पता चलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब आप एक जैसी दूरी तय करते हैं, इसका मतलब यह है की आप नए लोगों से मिलना नहीं चाहते और एक जैसी सामाजिक जिन्दगी जीते हैं, जबकि रोज दूरी बदलने का मतलब है आप नए-नए लोगों से मिलाना और बातें करना पसंद करते हैं।

जब आप सप्ताह में हरेक दिन अलग-अलग दूरी तय करते हैं और शाम को अधिक व्यस्त रहते हैं, इसका सीधा सा मतलब है कि आप जल्दी ही लोगों से सहमत हो जाते हैं और आपकी अपनी राय कोई मतलब नहीं रखती। अध्ययन के अनुसार मनोविक्षुब्ध महिलायें, जो अधिक संवेदनशील और बैचैन रहती हैं सुबह अपने फ़ोन के साथ एक निश्चित गति से एक जैसी दूरी तय करती हैं।

स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के जरिये आज भले ही विश्व की आबादी का बड़ा हिस्सा, इतिहास के किसी भी दौर की तुलना में अधिक संख्या में एक दूसरे से जुड़ा है, पर वास्तविकता यही है कि समाज में इसी सोशल मीडिया के चलते आज जितना बिखराव है वह पहले किसी दौर में नहीं रहा। अब लोग एक दूसरे से मिलते नहीं बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से मैसेज करते हैं।

लोग अपने समाज को छोड़कर एक आभासी समाज का हिस्सा हो गए हैं। हालात इतने खराब हैं कि एक दूसरे से लगातार मैसेज के माध्यम से जुड़े रहने वाले लोग भी आमने सामने मिलने पर बात नहीं कर पाते, लोगों की बातें करने की आदत धीरे-धीरे कम हो रही है। मैसेज करने की आदत ने लोगों की भाषा ही बदल डाली है।

ऐसे में इसका प्रभाव लोगों के व्यक्तित्व पर भी पड़ रहा है। आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के अध्ययन से आपके सामान्य व्यक्तित्व का तो पता चलता है, पर इसमें जो अंतर आ रहा है इसका पता नहीं चलता। वैज्ञानिकों को जल्दी की परम्परागत व्यक्तित्व से अलग हट कर नए व्यक्तित्व को भी तलाशना होगा, क्योंकि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया लोगों के व्यवहार को तेजी से बदलता जा रहा है।

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