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2 साल के मासूम की नरबलि मामले में तांत्रिक दंपती समेत 7 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

Prema Negi
5 Oct 2019 1:07 PM GMT
2 साल के मासूम की नरबलि मामले में तांत्रिक दंपती समेत 7 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
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छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित रुआबांधा बस्ती में अंधविश्वास के नाम पर 2 साल के मासूम चिराग राजपूत की अपने चेलों के साथ कथित तांत्रिक दंपती ने ली थी बलि...

जनज्वार। देश में अंधविश्वास 21वीं शताब्दी में भी चरम पर बना हुआ है, बल्कि यूं कहें यह और प्रसारित हो रहा है। तंत्र-मंत्र में विश्वास करने वाले कथित सपने में देखे हुए अंधविश्वास में नरबलि तक देने में नहीं हिचक रहे हैं। कड़े कानून होने के बावजूद भी अंधविश्वास के नाम पर आम जनता को ठग रहे ठगों का जाल और ज्यादा वृहद होता जा रहा है।

अंधविश्वास के नाम पर इंसानियत को शर्मसार करने वाला ऐसा ही एक मामला 8 साल पहले छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित रुआबांधा बस्ती में 23 नवंबर, 2011 को सामने आया था। इस कांड में अंधविश्वास के नाम पर नरबलि ली गयी थी। इसके आरोपियों को पहले से ही सुनाई फांसी की सजा को अब उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। हालांकि फांसी की सजा भी हमारे समाज से अंधविश्वास को कितना कम कर पायेगी, इसमें संशय है।

च्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय खंडपीट ने हाईकोर्ट के फैसले को न्यायसंगत पाते हुए फांसी सजा को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कथित तांत्रिक ईश्वर लाल यादव और उसकी पत्नी किरण बाई को मौत की सजा होगी।

गौरतलब है कि इस कांड में इस तथाकथित तांत्रिक दंपती ने 8 साल पहले दो साल के बच्चे का अपहरण कर उसकी बलि दे दी थी। इस मामले में 7 आरोपियों को तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मार्च 2014 में फांसी की सजा सुनाई थी। अब उच्चतम न्यायालय के इस फैसले को बरकरार रखा है, लेकिन दोषियों को फांसी होगी या नहीं इस पर गम्भीर प्रश्नचिन्ह है, क्योंकि अब राष्ट्रपति के समक्ष क्षमा याचिका दाखिल हो सकती है। यदि वहां से रिजेक्ट हुयी और फांसी देने में अतिशय विलम्ब हुआ तो उच्चतम न्यायालय ही इस उम्रकैद में बदल सकता है, जैसा पिछले कुछ सालों से देखने में आ रहा है।

8 साल पहले भिलाई में हुए इस दिल दहला देने वाले नरबलि कांड में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मुख्य आरोपियों सहित 7 को दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। तांत्रिक दंपती सहित मामले के 7 आरोपियों को दुर्ग न्यायालय ने साल 2014 में फांसी की सजा सुनाई थी। दो साल के बच्चे चिराग राजपूत की बलि चढ़ाने वाले दोषी ईश्वर लाल यादव और उसकी पत्नी किरण बाई के प्रकरण की सुनवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण और रिकार्ड में लाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत में इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए ये फैसला दिया गया।

2 साल के मासूम की बलि लेने वाले दंपती खुद को तांत्रिक बताते थे। उनके कई शिष्य भी थे। कथित तांत्रिक ईश्वर यादव और उसकी पत्नी किरण इस नरबलि कांड में सीधे सीधे शामिल थे। दंपती ने अपने शिष्यों के साथ नरबलि की योजना बनाई और अपने पड़ोस में रहने वाले पोषण सिंह के 2 साल के बेटे का अपहरण कर लिया और उसकी हत्या कर दी।

साक्ष्य छिपाने के लिए आरोपियों ने बच्चे के शव को दफना दिया था। शक के आधार पर जब आरोपी दंपती से पूछताछ की गई तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। तब पुलिस की जांच में एक और बच्ची की हत्या की बात सामने आई थी। दुर्ग कोर्ट में चल रहे इस मामले का फैसला साल 2014 में आया, जिसे ऐतिहासिक फैसला बताया गया। मामले में न्यायालय ने सभी आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी।

सके पहले हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक गुप्ता और संजय के अग्रवाल की पीठ ने तांत्रिक ईश्वरी यादव, उसकी पत्नी किरण यादव उर्फ गुरु माता की फांसी की सजा को बरकरार रखा। वहीं पांच अन्य आरोपियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। इस प्रकरण में दुर्ग जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौतम चौगड़िया ने चिराग राजपूत नरबलि कांड के सात आरोपियों को 25 मार्च 2014 को फांसी की सजा सुनाई थी। प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी मामले में एक साथ सात लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई हो। उसके बाद वेरीफिकेशन के लिए प्रकरण हाईकोर्ट गया था।

स मामले का एक आरोपी कृष्णा उर्फ तांबी को पुलिस 6 साल बीत जाने के बाद भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। वह अभी भी फरार है। रूआबांधा निवासी चिराग राजपूत के पड़ोस में रहने वाले तांत्रिक ईश्वरी पिता केवलराम यादव और उसकी पत्नी किरण उर्फ गुरुमाता और उसके साथियों महानंद यादव, राजेंद्र महार, निहालुद्दीन, सुखदेव यादव, हेमंत साहू को फांसी की सजा सुनाई थी।

चिराग राजपूत की नरबलि मामले में गिरफ्तारी के बाद एक अन्य बच्ची मनीषा की बलि दिए जाने का खुलासा हुआ था। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि उन्होंने वीरू की 6 साल की बेटी मनीषा का भी अपहरण कर उसकी भी बलि दे दी थी। मनीषा नरबलि कांड में भी हाईकोर्ट ने एक दिन पहले फैसला सुनाया है। इसमें फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील किया गया है। नरबलि की घटना को 23 नवंबर 2010 को अंजाम दिया गया था।

हीं चिराग राजपूत के लापता होने से परिजन एवं मोहल्ले वासी तलाश कर रहे थे। मोहल्लेवासियों ने देखा कि तांत्रिक ईश्वरी यादव और किरण यादव के यहां काफी जोर से साउंड में गाना बज रहा था। लोगों के शक के आधार पर तांत्रिक के घर जाकर देखा तो उसके घर के चारों तरफ खून के धब्बे फैले हुए थे। चिराग राजपूत के माता-पिता ने इस बात की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तांत्रिक, उसकी पत्नी और चेलों को गिरफ्तार किया था।

तांत्रिक की पत्नी ने पुलिस को पूछताछ में बताया था कि उसे सपना आया था कि बच्चे की बलि देनी है। इसके बाद यह कृत्य किया गया। आरोपियों के ताबीज पर लगे खून का मिलान बच्चे के शरीर से निकले खून से हो गया था। खून का मिलान होने पर ही न्यायाधीश गौतम चौगड़िया ने आरोपियों को सजा का मुख्य आधार बनाकर फांसी की सजा दी थी।

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