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कोरोना महामारी की भयावहता से जूझता देश और मोदी सरकार का 20 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट न्यू संसद

Nirmal kant
1 May 2020 1:30 AM GMT
कोरोना महामारी की भयावहता से जूझता देश और मोदी सरकार का 20 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट न्यू संसद
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सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा संसद की नई इमारत बन रही है जो देश की धरोहर है, इसमें किसी को आपत्ति भला क्यों होनी चाहिए....

जनज्वार ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना काल में देश और दुनिया महामारी से जूझ रहे हैं। आम आदमी, मजदूर, भटक रहे हैं। मेडिकल स्टॉफ पीपीई किट, मास्क सहित सुरक्षा उपकरणों की मांग कर रही है तो दूसरी तरफ देश की नरेंद्र मोदी सरकार संसद सहित कुछ नई इमारतें बनवाने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि का सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने जा रही है। गुरुवार 30 अप्रैल सुप्रीम कोर्ट में इस प्रोजेक्ट पर स्टे के लिए लगी याचिका की सुनवाई थी।

देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल को हुई हुई केंद्र सरकार के 20 हजार करोड़ रुपए के भारी भरकम प्रोजेक्ट सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर सुनवाई के दौरान रोक लगाने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मामले की सुनवाई की। केंद्र के इस प्रोजेक्ट के तहत संसद के दोनों सदनों के लिए ज्यादा सदस्यों की क्षमता वाली नई इमारतें बनाई जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट के वकील राजीव सूरी ने केंद्र सरकार के इस प्रोजेक्ट पर स्टे लगाए जाने की मांग की थी।

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मामले में याचिकाकर्ता के रूप में पेश एडवोकेट राजीव सूरी ने दलील देते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत लैंड यूज में अवैध तरीके से बदलाव किया गया है। जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि ऐसी ही एक याचिका उनके पास पहले से पेंडिंग है, इसे दोहराने का कोई मतलब नहीं। चीफ जस्टिस ने कहा स्टे लगाने की जरूरत नहीं है क्योंकि कोरोना के समय कोई कुछ नहीं करने वाला। सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संसद की नई इमारत बन रही है जो देश की धरोहर है, इसमें किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए?

THE WEEK की रिपोर्ट के मुताबिक आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने सेंट्रल विस्टा के लिए एक अधिसूचना जारी की है, पुनर्विकास परियोजना के लिए 20,000 करोड़ रुपये आंकी गई। 20 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी सरकार द्वारा सेल्फ-डिफेंस को तवज्जो देते हुए लॉकडाउन की घोषणा के एक दिन बाद, दिल्ली विकास प्राधिकरण में एक असाधारण गजट अधिसूचना 2021 के तहत दिल्ली में मास्टर प्लान में ज़ोन डी और ज़ोन सी के रूप में 90 एकड़ भूमि में किए जाने वाले बदलाव किए गए हैं।

ह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब देश कोरोनावायरस संकट में इससे निपटने के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए धन की व्यवस्था कर रहा है। 2024 तक पूरा होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना स्लेटेड सेंट्रल विस्टा रिवापमेंट सरकार की जरूरत है, तो सर्जिकल मास्क, एन 95 मास्क और पर्सनल प्रोटेक्शन किट सप्लाई करना सरकारों के लिए उतना जरूरी नहीं है, जैसा इस वक्त जरूरी जरूरतों को पूरा कराने का दिखावा करने वाली मेडिकल बिरादरी और अन्य लोगों को चाहिए।

कोरोना महामारी के तीसरे फेज वाले रोगियों के लिए अधिक ऑक्सीजन वेंटिलेटर प्राप्त करने के लिए भी धन खर्च किया जा सकता है। वेंटिलेटर्स की कीमत के लिए एक त्वरित खोज इंटेंसिव केयर यूनिट्स (ICUs) में इस्तेमाल होने वाले फिक्स्ड वेंटिलेटरों की कीमत 2.80 लाख रुपये से 9.3 लाख रुपये के बीच आती है। पोर्टेबल वेंटिलेटर की कीमत 1.5 लाख रुपये से 6.5 लाख रुपये के बीच है। जब देश महामारी में जूझ रहा है, वैसे वक्त में सेंट्रल विस्टा जैसी भारी—भरकम बजट वाली परियोजना को आगे बढ़ाने के क्या मायने हैं, यह एकदम समझ से परे है।

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा यह मास्टर प्लान उस समय लाया जा रहा है, जब दिल्ली विकास प्राधिकरण के दिल्ली मास्टर प्लान-2021 की आर्थिक जनगणना रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी क्षेत्रों में रोजगार घट रहा है। इस जनगणना के अनुसार सरकारी कर्मचारियों की संख्या जो 18981 में 2.25 लाख से घटकर 2.14 लाख हो चुकी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की केवल एक धरोहर जो अपने आप मे वायरोलॉजी का देश है। यहां की 57.84 एकड़ भूमि सरकारी कार्यालयों के निर्माण के लिए दी जानी है। इस क्षेत्र को वर्तमान में 'सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक सुविधाओं' के रूप में उपयोग के लिए चिह्नित किया गया है, जिसमें तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र, सामाजिक-सांस्कृतिक परिसर, फायर स्टेशन, खेल सुविधाएं आदि शामिल हैं।

धिसूचना यह भी बताती है कि कैसे साढ़े 9 एकड़ मनोरंजन (जिला पार्क) अब घर की संसद को दिया जाएगा, लेकिन इसी क्षेत्र में कहीं भी, इन प्रत्येक 1.88 एकड़ के तीन पार्कों के बदले मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसी प्रकार, 15 एकड़ सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक उपयोगिताओं और खेल के मैदानों को आवासीय उपयोग में बदल दिया जाएगा। यह प्लॉट नंबर 7, साउथ ब्लॉक है जो अब नई योजना के तहत देश के प्रधान मंत्री का घर होगा।

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सी अधिसूचना के अनुसार डीडीए यानी दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा 21 दिसंबर, 2019 को दिल्ली विकास योजना में बदलावों को अधिसूचित किया गया था, और आपत्तियों या सुझावों को आमंत्रित करने के लिए विभिन्न माध्यमों द्वारा प्रकाशित किया गया था।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्रेजीडेंसी यानी राष्ट्रपति भवन सहित मौजूदा संसद भवन, इंडिया गेट और राष्ट्रीय अभिलेखागार की इमारत को वैसा ही रखा जाएगा। सेंट्रल विस्टा के मास्टर प्लान के मुताबिक पुराने गोलाकार संसद भवन के सामने गांधीजी की प्रतिमा के पीछे नया तिकोना संसद भवन बनेगा। यह भवन 13 एकड़ की जमीन पर विस्तार लेगा। इस जमीन पर अभी पार्क, अस्थायी निर्माण और पार्किंग बनी हुई हैं। नए बनाये जाने वाले संसद भवन के दोनों सदनों लोकसभा व राज्यसभा के लिए एक-एक इमारत बनाये जाने की योजना है, मगर इसमें सेंट्रल हॉल नहीं बनाया जाएगा।

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