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अजीत पवार का दावा, अगले तीन-चार महीने में बड़ी संख्या में भाजपा नेता राकांपा में होंगे शामिल

Janjwar Desk
26 Dec 2020 2:15 PM GMT
अजीत पवार का दावा, अगले तीन-चार महीने में बड़ी संख्या में भाजपा नेता राकांपा में होंगे शामिल
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अजीत पवार ने कहा कि कुछ नेता हैं जो अब हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं, लेकिन चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद हम उन्हें स्वीकार करना शुरू कर देंगे....

पुणे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजीत पवार ने शनिवार को कहा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए नेता अगले तीन-चार महीनों में राकांपा में लौट आएंगे।

पवार ने कहा, 'इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़े पैमाने पर बीजेपी द्वारा आयात किया गया था। वे इस उम्मीद में बीजेपी में गए कि पार्टी सत्ता में आएगी और उनके क्षेत्र के विकास की उनकी योजनाओं को समर्थन मिलेगा। हालांकि, अब ये नेता निराश हैं। वे अपने क्षेत्र के लिए कोई योजना लागू नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए, वे अब लौटने के लिए उत्सुक हैं।'

'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक पवार ने कहा कि यह केवल पुणे और पिंपरी-चिंचवड में ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी होगा। पवार ने कहा कि वह इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे कि पार्टी में कौन शामिल होगा क्योंकि ग्राम पंचायत चुनावों के लिए चुनाव आचार संहिता प्रभावी है।

उन्होंने आगे कहा कि कुछ नेता हैं जो अब हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं, लेकिन चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद हम उन्हें स्वीकार करना शुरू कर देंगे। पुणे और पिंपरी-चिंचवड में, कुछ महत्वपूर्ण नेता जल्द ही हमारे साथ जुड़ेंगे।

पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस और राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल पर तंज कसते हुए पवार ने कहा, 'कुछ नेता कह रहे थे, मैं सत्ता में लौटूंगा, और अब एक और कह रहा है कि वह कोल्हापुर लौट आएगा। एक (फडणवीस) नहीं लौटा और दूसरा वापस जा रहा है। पवार ने कहा कि एक साल के भीतर पाटिल ने महसूस किया कि वह पुणे में काम नहीं कर सकते हैं और अब कोल्हापुर लौटना चाहते हैं।

पुणे नगर निगम के भीतर 23 गांवों के हाल के विलय पर बोलते हुए पवार ने कहा कि इन क्षेत्रों में तेजी से शहरीकरण को देखते हुए निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा, 'ग्राम पंचायतें इन शहरी क्षेत्रों की बढ़ती अपेक्षा को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। अल्प बजट के साथ, ग्राम पंचायतों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना मुश्किल हो रहा था और इसलिए हमें उन्हें पीएमसी के साथ मिलाना पड़ा।' उन्होंने कहा कि कुछ गांव पीसीएमसी में शामिल होने का इंतजार कर रहे हैं। "हम जल्द ही उनके बारे में निर्णय लेंगे।

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