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हरीश रावत की नई सनसनी : राहुल न बने अध्यक्ष तो नए कदम पर सोचूंगा! क्या नवरात्रों में छोड़ देंगे कांग्रेस?

Janjwar Desk
22 Sep 2022 12:55 PM GMT
हरीश रावत की नई सनसनी :  राहुल न बने अध्यक्ष तो नए कदम पर सोचूंगा! क्या नवरात्रों में छोड़ देंगे कांग्रेस?
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Dehradun news : उत्तराखंड में संगठन के सर्वोच्च निकाय प्रदेश कांग्रेस कमेटी की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस के प्याले में उठा बवंडर शांत नहीं हुआ, उससे पहले ही हरीश रावत ने एक और नई सनसनी को जन्म दे दिया है

Dehradun news : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत क्या नवरात्रों में कांग्रेस पार्टी को छोड़कर कोई नया राजनैतिक ठौर तलाशने जा रहे हैं ? यह सवाल खुद बृहस्पतिवार 22 सितंबर को हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया पर उछाला है। उत्तराखंड में संगठन के सर्वोच्च निकाय प्रदेश कांग्रेस कमेटी की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस के प्याले में उठा बवंडर शांत नहीं हुआ, उससे पहले ही हरीश रावत ने एक और नई सनसनी को जन्म दे दिया है।

मालूम हो कि उत्तराखंड कांग्रेस में इन दिनों पीसीसी सदस्य चयन में सीनियर नेताओं की अनदेखी से कोहराम की स्थिति है। सूची से नाराज कांग्रेसी संगठन के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के बेटे अभिषेक सिंह व पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर ने पीसीसी सदस्य चयन में वरिष्ठ और जनाधार वाले नेताओं की अनदेखी की वजह से पीसीसी से इस्तीफा दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनिर्वाचित सदस्यों की घोषित सूची जो कि अभी विधिवत जारी नहीं की गई है, में 222 सदस्य शामिल किए जाने की सूचना है।

सूची में प्रदेश के दिग्गज और बड़े नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों का दबदबा बताया गया है। पार्टी के कुल 19 विधायकों में 16 को ही इस सूची में जगह दी गई है। उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी व विधायक ममता राकेश इस सूची से बाहर हैं। कांग्रेस के 225 सांगठनिक ब्लाकों में से 222 सदस्यों की तैयार इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, उनके पुत्र आनंद सिंह रावत व विधायक पुत्री अनुपमा रावत के साथ उनके कई समर्थकों व करीबियों को बतौर सदस्य तरजीह दिए जाने की खबर है।

विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में गए पूर्व मंत्री हरक सिंह और लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी रही उनकी पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और उनके पुत्र पूर्व विधायक संजीव आर्य के साथ ही बदरीनाथ विधायक राजेंद्र भंडारी और उनकी पत्नी रजनी भंडारी भी इस सूची का हिस्सा बताए जा रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ उनके कुछ करीबी पीसीसी सदस्य बने हैं तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व चकराता विधायक प्रीतम सिंह इस सूची से बाहर हैं, लेकिन प्रीतम के पुत्र अभिषेक सिंह और भाई चमन सिंह को पीसीसी सदस्य बनाया गया है। आश्चर्यजनक रूप से उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी व विधायक ममता राकेश इस सूची से बाहर हैं।

वैसे कांग्रेस पीसीसी में विधायक सामान्यत विशेष आमंत्रित सदस्य होते ही हैं, लेकिन वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया में पीसीसी के मौजूदा सदस्य ही मतदान कर पाएंगे, इस लिहाज से अधिकृत पीसीसी सूची की भूमिका अधिक है। इसी वजह से वर्तमान पीसीसी लिस्ट को लेकर कांग्रेस में यह तूफान मचा हुआ है। इस बवंडर की धुंध इसी से समझी जाती है कि सवालों की बौछार से बचने के लिए पीसीसी चीफ करन मेहरा को अपना मोबाइल फोन तक बंद करना पड़ रहा है। कांग्रेस इस बवंडर को शांत करने का कोई उपाय तलाशती उससे पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस से अपनी विदाई की संभावना जताकर प्रदेश की राजनैतिक तापमान को ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।


सोशल मीडिया पर हरीश रावत ने कुछ ही देर पहले राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष न बनने की सूरत में अगला कदम उठाने के संकेत दे दिए हैं। बकौल हरीश रावत "मैं अपने जीवन की एक बड़ी उलझन को सुलझाने जा रहा हूं। पहले पित्रों को याद करूंगा। पित्रों का आशीर्वाद लेकर भगवान बद्रीश की शरण में जाऊंगा। कोरोना के साथ भीषण संघर्ष के बाद जिंदा वापस आने पर मैंने अपने मन में आगे की राजनीतिक जीवन के विषय में मनन किया। मेरे मन ने कहा कि जितनी भी शक्ति व जीवन शेष है, आप श्री राहुल गांधी को समर्पित करो। आप पार्टी के लिए दो काम कर सकते हैं, चुनाव के वक्त प्रचार कर वोट इकट्ठा करने का। दूसरा काम आप संगठनात्मक कर सकते हो, लोगों को निरंतर पार्टी के साथ जोड़ने का। राहुल जी अध्यक्ष पद संभालते हैं तो उनके साथ खड़े होकर संगठन में काम करने की स्वाभाविक इच्छा है। यदि वह अध्यक्ष पद नहीं संभालते हैं तो उसके बाद अपने आगे के राजनीतिक जीवन को लेकर एक बड़ा प्रश्न है? मैं निरंतर काम करने वाला व्यक्ति हूं, पांव एक बार थम जाएंगे तो फिर उम्र हावी हो जाएगी। राहुल जी मेरी प्रेरणा हैं। चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। आगे की क्या रूपरेखा बनाऊं, भगवान बद्रीश से मार्गदर्शन युक्त आशीर्वाद मांगूगा।"

"।‌।जय बद्रीनाथ।।", संबोधन के साथ अपनी बात खत्म करते हुए रावत ने इस पोस्ट पर कांग्रेस और प्रियंका गांधी को हैश टैग किया हुआ है। वैसे वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शास्त्री ने हरीश रावत की इस पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उम्र की सांध्य बेला में हरीश रावत कांग्रेस छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले। अपने आप को चर्चाओं में रखकर सुर्खियों में रहना उनका पुराना शगल है। सड़क पर खड़े ठेलों पर पकौड़ी बनाना हो या घर में ककड़ी पार्टी करना, सब उनके प्रचार के फंडे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले केदारनाथ गए थे। जहां उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में सब कुछ बम-बम होने के दावा किया था। वह दावा फुस्स होते ही केदारनाथ में उनकी आस्था दरक चुकी है। इसीलिए अब वह भगवान बद्रीनाथ की शरण में जाने की बात कर रहे हैं।

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