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बिहार में बीजेपी और जदयू में बढ़ी टकराहट, पार्टी ने किया प्रस्ताव पास - नीतीश में पीएम बनने के सभी गुण

Janjwar Desk
30 Aug 2021 7:32 AM GMT
बिहार में बीजेपी और जदयू में बढ़ी टकराहट, पार्टी ने किया प्रस्ताव पास - नीतीश में पीएम बनने के सभी गुण
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(जदयू : सीटों की बात नहीं बनी तो अगला चुनाव एकला चलो के राह पर)

जदयू की रविवार को पटना में संपन्न हुई राष्ट्रीय परिषद की बैठक संगठन के अंदर व बाहर दोनों तरफ एक संदेश देने में कामायाब रही, जदयू के कोटे से केंद्र में मंत्री बने आरसीपी सिंह व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिहं के समर्थकों के बीच चले पोस्टरवार से संगठन की हाल के दिनों में बहुत किरकिरी हुई.....

जितेंद्र उपाध्याय का विश्लेषण

जनज्वार। बिहार की सत्ता में जदयू के साथ भाजपा भले ही भागीदार है,लेकिन दोनों दलों में टकराव की कहानी पुरानी है। एक बार फिर जद यू के राष्ट्रीय परिषद की बैठक से जो ध्वनि बाहर निकली है,वे बिहार के सियासी राजनीति को गरमा दी है। बैठक में जदयू ने नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री के सभी गुण होने संबंधित एक प्रस्ताव पास कर ऐसा लगता है कि भाजपा नेतृत्व को एक संदेश देने की कोशिश की है। बैठक में चर्चा के अधिकांश मुद्दों में किसी न किसी रूप में विपक्षी दल के बजाए भाजपा ही इनके निशाने पर अधिक दिखी।अब बात यहां तक आ गई कि अगर भाजपा नेतृत्व को हमारे प्रस्ताव मंजूर नही ,तो आगामी चुनाव एकला चलो के नारे के साथ लड़ा जाएगा।

जदयू की रविवार को पटना में संपन्न हुई राष्ट्रीय परिषद की बैठक संगठन के अंदर व बाहर दोनों तरफ एक संदेश देने में कामायाब रही। जदयू के कोटे से केंद्र में मंत्री बने आरसीपी सिंह व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के समर्थकों के बीच चले पोस्टरवार से संगठन की हाल के दिनों में बहुत किरकिरी हुई। इसके चलते प्रमुख विपक्ष राजद को भी हमला करने का मौका मिल गया। बहस इस मोड़ तक आकर खड़ी हो गई कि दोनों में संगठन पर किसका बड़ा अधिकार। लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बहाने पटना में लगे होर्डिंग में मात्र नीतीश कुमार की तस्वीरों से नेतृत्व ने यह संदेश दिया कि जदयू मतलब नीतीश कुमार से इतर कुछ भी नहीं। इस तरह पार्टी अपने संगठन व कार्यकर्ताओं के बीच जहां संदेश देने में कामयाब रही वहीं विपक्ष को भी खामोश कर दिया।

मुददों की सहमति पर अब भाजपा से तय होंगे रिश्ते

जदयू राष्ट्रीय परिषद ने बैठक में एक प्रस्ताव भी पारित किया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में सभी गुण हैं जो एक प्रधान मंत्री के पास होने चाहिए। पेगासस स्पाइवेयर मुद्दे की जांच की मांग करके जदयू ने पूर्व में ही भाजपा नेतृत्व को अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दे दिया था कि गठबंधन का मतलब यह नहीं कि केंद्र के हर कार्य शिरोधार्य होंगे। जाति जनगणना की मांग के लिए प्रतिद्वंद्वी राजद के साथ मिलकर मानो जदयू पहले ही कह चुका है कि अब हर बात होगी मुददों पर। जद (यू) ने अपने गठबंधन सहयोगी पर एनडीए समन्वय समिति की मांग की। साथ ही कहा कि राज्य और केंद्र स्तर पर कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हम अलग हैं।

परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, जद (यू) के प्रमुख महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा "जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान एनडीए की एक समन्वय समिति थी, हम अब इसी तरह की एक समिति का स्वागत करेंगे जो कई मुद्दों पर चर्चा करेगी। जिन मुद्दों पर हम अलग हैं। यह गठबंधन के सुचारू कामकाज में मदद करेगा और एनडीए गठबंधन के नेताओं की अनुचित टिप्पणियों को हतोत्साहित करेगा। बाद में, द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, त्यागी ने कहा, हमने पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में एक प्रस्ताव भी पारित किया है कि नीतीश कुमार पीएम की दौड़ में नहीं हो सकते हैं, लेकिन वे सभी गुण हैं जो एक पीएम के पास होने चाहिए।


इस तरह के प्रस्ताव की आवश्यकता के बारे में पूछे जाने पर, त्यागी ने कहा, अक्सर कुछ तिमाहियों से (नीतीश कुमार के प्रधान मंत्री पद के अवसरों पर) आक्षेप किया गया है, और हम रिकॉर्ड को सीधा रखना चाहते थे। जद (यू) नेता ने यह भी कहा कि पार्टी जाति जनगणना की मांग करना जारी रखेगी। उन्होंने कहा, हम पीएम की सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

जद (यू) की एक समन्वय समिति की मांग के बारे में पूछे जाने पर, भाजपा नेता और बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद प्रतिक्रिया में सतर्क थे। हम इसका समर्थन करते हैं क्योंकि यह हमें विभिन्न मुद्दों पर समन्वय करने में मदद करेगा।

23 अगस्त को, नीतीश कुमार ने जाति जनगणना के मुद्दे पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए 10-पक्षीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग कर फोन की निगरानी के आरोपों की जांच की मांग की थी।

भाजपा जाति जनगणना के संबंध में कोई भी कदम उठाने से सावधान है, खासकर उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक हैं। पार्टी के कई नेताओं ने निजी तौर पर कहा है कि पार्टी ओबीसी का विरोध करने का जोखिम नहीं उठा सकती है, जो हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण समर्थन आधार बन गए हैं।

20 जुलाई को, लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था "भारत सरकार ने नीति के रूप में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जाति-वार आबादी की गणना नहीं करने का निर्णय लिया है।

उधर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने एक बार फिर कहा कि जो लोग हमारे नेता नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री मटेरियल होने पर सवाल उठाते थे, उनको एतराज होता था। ऐसे लोगों को बताना चाहते हैं कि हमारे नेता नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री बनने के तमाम गुण हैं। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के गुण और दावा दोनों में काफी अंतर है। हम एक छोटी पार्टी हैं, हम इसका दावा कैसे करेंगे? इसलिए जो भी इस तरह का भ्रम फैला रहे हैं। उनको यह स्पष्ट होना चाहिए कि हमारे नेता में प्रधानमंत्री बनने के तमाम गुण मौजूद हैं।

पार्टी के विस्तार को लेकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि अगर बीजेपी यूपी और मणिपुर के आगामी विधानसभा चुनाव में उनको एनडीए का पार्ट नहीं बनाती है, तो जेडीयू स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के लिए भी तैयारी कर रही है। इधर, सीएम नीतीश कुमार के सामने कार्यकर्ताओं ने देश का पीएम कैसा हो, नीतीश कुमार जैसा हो का नारा लगाया। हालांकि, पार्टी की ओर से पीएम मटेरियल बताए जाने को खुद नीतीश कुमार ने खारिज कर दिया और सवाल पूछे जाने पर सिर्फ इतना कहा कि उनकी ऐसी कोई इच्छा नहीं है। आगे ये कहा कि मैं तो अपना काम करता हूँ।

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