'उत्तराखंड में 20% कमीशन दिए बिना कोई काम नहीं होता', BJP के पूर्व सीएम ने अपनी ही पार्टी पर उठा दिये सवाल

Dehradun news : उत्तराखंड के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रहे विकास कार्यों में होने वाली कमीशनखोरी पर खुली स्वीकारोक्ति करते हुए आधा सच सामने रखा है। वर्तमान में पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र से सांसद पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यह स्वीकारोक्ति करते हुए राज्य के हालात के प्रति निराशा के भाव प्रकट किए हैं।
पिछली भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाने के बाद पौड़ी गढ़वाल के सांसद तीरथ सिंह रावत को सूबे का नया मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन उनके कुछ बयान पार्टी पर भारी पड़ने की आशंका के चलते उनकी इस पद से विदाई हो गई थी, जिसके बाद मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ही उस सरकार की कमान संभाली थी। अब इन्हीं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश में होने वाले विकास कार्यों की पोल खोलते हुए उसमें व्याप्त कमीशनखोरी पर बड़ा हमला किया है।
वैसे पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अपने इस बयान से एक बार फिर से फंसते नजर आ रहे हैं। लेकिन इस बहाने उन्होंने सच्चाई बोलकर सिस्टम को रक्षात्मक मुद्रा में जरूर ला दिया है। उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक अपनी बेबाकी से हलचल मचना तय करने वाले इस बयान में रावत ने भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी पर हमला किया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
हालांकि पूर्व सीएम तीरथ ने अपने इस बयान में किसी व्यक्ति विशेष पर तो हमला नहीं किया, लेकिन जनप्रतिनिधियों को उन्होंने अवश्य कठघरे में खड़ा कर दिया। एक मिनट 57 सेकेंड के वीडियो में पौड़ी से सांसद तीरथ रावत कहते हैं "आज बहुत जगह बताते हैं कि बिना कमीशन के काम नहीं हो रहे। जब उत्तराखंड बना तो तत्कालीन यूपी के विकास कार्यों में 20 प्रतिशत कमीशन था। उत्तराखंड में नए राज्य के लिहाज से हमें इस मामले में जीरो होना चाहिए था, लेकिन उत्तराखंड की तो शुरुआत ही सीधे बीस प्रतिशत कमीशन से हुई।"
आगे रावत का कहते हैं, "इसके लिए किसी एक व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। पूरी मानसिकता ठीक करने की जरूरत है। मेरा प्रदेश ही मेरा परिवार है, यह भाव आना चाहिए। भ्रष्टाचार में अधिकारियों को दंडित कर दिया जाता है, लेकिन इन सभी के पीछे जनप्रतिनिधि होता है। दोषी दोनों ही होते हैं।"
पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि "यूपी के समय सुनते थे कि जल निगम, जल संस्थान, आदि में 2 प्रतिशत कमीशन चलता है। धीर धीरे यह कमीशन 20 प्रतिशत तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि कमीशनखोरी उत्तर प्रदेश में प्रचलित थी और दुर्भाग्य से यह अब उत्तराखंड में भी जारी है।" हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि "वह सीएम भी रहे हैं, सरकार में भी, उन्हें यह बात नहीं कहनी चाहिए, फिर भी उन्हें यह सब कहने में कोई हिचक नहीं है।"
पूर्व और वर्तमान में जिम्मेदार पद पर रहने के बाद भी उत्तराखंड में कमीशनखोरी जैसे विवादास्पद बयान देने का दुस्साहस करने वाले रावत के बारे में बता दें कि वह पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं, जिन्हें बाद में विवादित बयान का दर्जा मिला था। उत्तराखंड के सीएम रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पिछले साल मार्च में भी संस्कारों के अभाव में युवाओं के फटी जींस पहनने को लेकर बयान दिया था, जो उन दिनों मीडिया की सुर्खियों में रहा था। इसके बाद उन्होंने पीएम मोदी की तुलना भगवान से कर दी थी। फिर कोरोना काल में मिलने वाले मुफ्त राशन को लेकर मुस्लिमों को अधिक बच्चे होने के कारण उन्हें ज्यादा राशन मिलने पर कटाक्ष किया था। उसके कुछ समय बाद उनके मुंह से निकली इस बात ने भी विवाद को जन्म दिया था जब वह धोखे में इंग्लैंड की जगह अमेरिका का नाम लेकर यह कह बैठे थे कि अमेरिका ने 200 साल तक भारत को गुलाम बनाकर रखा था।
वैसे जिस बात की स्वीकारोक्ति पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने करने का दुस्साहस किया है, उसे अधूरा सच बताने वालों की भी कोई कमी नहीं है। कई लोगों का कहना है कि जिस कमीशनखोरी का जिक्र करते हुए तीरथ रावत उसे 20 प्रतिशत बता रहे हैं, वह धरातल में इस समय एक तिहाई से आगे पहुंच चुका है। कई कई विभागों में तो वह सीधे आधे तक पहुंचने की दहलीज पर खड़ा है।











