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सचिन पायलट के क्षेत्र में इलाज की असलियत लिखने वाले पत्रकार पर राजस्थान पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

Janjwar Desk
11 May 2021 3:55 AM GMT
सचिन पायलट के क्षेत्र में इलाज की असलियत लिखने वाले पत्रकार पर राजस्थान पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
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सत्ता में चाहे कोई भी दल बैठा हो छवि सुरक्षित करने के लिए कोई भी तरीका अख्तियार करने से गुरेज नहीं करता, सचिन पायलट के क्षेत्र की असलियत बताने पर राजस्थान में एक पत्रकार को फेसबुक पोस्ट के लिए थाने बुला दर्ज कर दिया मुकदमा...

जनज्वार। सत्ता में चाहे कोई पार्टी बैठी हो, सबका चरित्र एक सा होता है। यह साबित होता है राजस्थान में मात्र फेसबुक पर एक टिप्पणी लिखने पर पत्रकार को थाने में बुला लेने वाले मामले से। राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में है, मगर सत्ता का चरित्र भाजपा से अलग नहीं है।

पुलिस का बयान है कि नासिर एक टैक्सी ड्राइवर है पत्रकार नहीं, मगर नासिर के आईकार्ड कर रहे उसके पत्रकार होने की पुष्टि

एक अखबार 'दैनिक पक्षी का संदेश' के पत्रकार नासिर खान ने सोशल मीडिया पर 7 मई को सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक के सरकारी अस्पताल की अव्यस्थाओं को लेकर फेसबुक पोस्ट लिखी थी। उसी रात को उन्हें थाने बुला लिया गया और शांति भंग के आरोप में धाना 151 में मामला दर्ज करने की धमकी दी गयी।

इन्हीं फेसबुक पोस्टों पर हुई थी नासिर पर कार्रवाई

इस मामले में टोंक पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश ने मीडिया में बयान दिया कि आरोपी नासिर खान खुद को पत्रकार बताता है, लेकिन वास्तव में वह एक टैक्सी चालक है और उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि है। खान को गिरफ्तार कर लिया गया और सीआरपीसी की धारा 151 के तहत केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद उसे रिहा कर दिया गया। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

इन्हीं फेसबुक पोस्टों पर हुई थी नासिर पर कार्रवाई

गौरतलब है नासिर खान ने अपनी फेसबुक पोस्टों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन पर कोविड-19 की स्थिति से निपटने में कुप्रबंधन का आरोप लगाया था और स्थानीय विधायक सचिन पायलट की अनुपस्थिति के बारे में भी जानकारी दी थी।

इन्हीं फेसबुक पोस्टों पर हुई थी नासिर पर कार्रवाई

पत्रकार अवधेश पारिक साथी पत्रकार नासिर खान पर पु​लिसिया कार्रवाई के बारे में कहते हैं, 'नासिर खान टोंक जिले से एक दैनिक अखबार के रिपोर्टर हैं और सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी आवाज़ उठाते हैं। 7 मई को इन्होंने पायलट साब के विधानसभा क्षेत्र के सरकारी अस्पताल की अव्यस्थाओं को लेकर फेसबुक पोस्ट लिखा, रात को थाने बुला लिया गया और शांति भंग के आरोप में 151 में मामला दर्ज करने का कहा। बाद में माफीनामे के साथ जमानत मिली।'

पत्रकार अवधेश पारिक की नासिर पर दर्ज हुए मुकदमे के बाद लिखी गयी पोस्ट

अवधेश आगे कहते हैं, 'मैंने नासिर से बात की तो उन्होंने सबसे पहले कहा मैंने जो देखा वही लिखा, आज मेरे साथ ये हुआ है कल आप भी हो सकते हो अस्पताल के बारे में लिखना शायद ऊपर बैठे लोगों को खटक गया क्योंकि मामला सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र का है। नासिर को एक शिकायत यह भी है कि आज मेरे साथ जो हुआ उस पर तथाकथित बड़के पत्रकारों ने चुप्पी साध ली, बस एक अंग्रेजी अखबार ने कोने में छोटी सी उस खबर को जगह दी। एक रिपोर्टर के अस्पताल के बारे में लिखने पर शांति भंग कैसे होती है ये अब सचिन पायलट या सूबे के मुख्यमंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस करके हमें बता दें।'

फेसबुक पर ही नासिर से जबरन लिखवाया गया माफीनामा

नासिर खान द्वारा लिखे गये माफीनामे पर अवधेश का कहना है, 'माफीनामा पढ़िए कितना रोचक है, इस पर नासिर ने मुझे बताया कि वो भी वहां जबरदस्ती उनसे लिखवाया गया, माने शब्द उनके थे लिखा नासिर ने।'

पुलिस कहती है नासिर नहीं है पत्रकार, मगर उसकी बाईलाइन प्रकाशित खबरें कुछ और ही कहती है, कौन है झूठा

नासिर ने बाद में जो माफीनामा लिखा है, उसमें लिखा है, 'पोस्ट के जरिए रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन की कमी को रेखांकित करना मेरी गलती था। मुझे दिखाई देने वाले बुरे सपनों के कारण मैंने ऐसा लिखा था। टोंक जिले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और हमारे पास स्थानीय अस्पताल में स्वास्थ्य संबंधी सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं। मेरे द्वारा पूर्व में इस मामले में की गयी पोस्टों के लिए क्षमाप्रार्थी हूं।'

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