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UP Election 2022 : 34 दिनों में 20 BJP नेताओं ने छोड़ा साथ, जानें सियासी मायने

Janjwar Desk
14 Jan 2022 10:41 AM GMT
Yogi के खोखले दावों की पड़ताल: बुनियादी शिक्षा सुधार में पश्चिम बंगाल और महाराष्ट से भी पीछे छूटा Uttar Pradesh
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Yogi के खोखले दावों की पड़ताल: बुनियादी शिक्षा सुधार में पश्चिम बंगाल और महाराष्ट से भी पीछे छूटा Uttar Pradesh 

UP Election 2022 : दलित और पिछड़ों के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले कुछ दिनों में भाजपा नेतृत्व को बता दिया कि लोकतंत्र में जनता की ताकत का मतलब क्या होता है।

UP Election 2022 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के एलान के साथ-साथ पिछले कुछ दिनों से दलबदल का सिलसिला भी जारी है। योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे और समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चा के साथ ही विधानसभा चुनाव अब द्विपक्षीय हो गया है। इतना ही भगदड़ नहीं रुकने पर सपा नेता अखिलेश यादव सब पर भारी भी साबित हो सकते हैं।

इस बीच अहम सवाल यह है कि पिछले महीने यानी 11 दिसंबर से लेकर आज तक के 34 दिनों में 21 भाजपा नेता पार्टी छ़ो चुके हैं। इनमें मंत्री, पूर्व सांसद, विधायक, एमएली व अन्य शामिल हैं। आज की बात करें तो तो योगी के एक पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य सहित भाजपा के 8 बागी विधायकों ने आज समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

सवाल : भाजपा मंत्री, विधायक और अन्य नेता क्यों छोड़ रहे है पार्टी?

भाजपा छोड़ने वाले मंत्रियों, विधायकों व अन्य नेताओं के बयानों पर गौर फरमाएं तो एक बात साफ है कि स्वामी प्रसाद मौर्य को 2017 विधानसभा चुनाव से पहले डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ही भाजपा में लेकर आए थे। केशव तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। पांच साल पहले उन्होंने बड़े पैमाने पर गैर यादव ओबीसी नेताओं को पार्टी के साथ जोड़ने का काम किया था, लेकिन जिस ताकत से स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा में आए थे, उन्हें उतनी तवज्जो योगी सरकार में नहीं मिली।

स्वामी प्रसाद ऐन मौके पर करा रहे हैं अपनी ताकत का अहसास

स्वामी प्रसाद मौर्य योगी कैबिनेट में स्वामी मंत्री तो बन गए लेकिन विभाग काफी कमजोर मिला। इस बीच, केशव मौर्य भी डिप्टी सीएम तो बनाए गए लेकिन योगी से उनके हमेशा मतभेद रहे। योगी और केशव के बीच की लड़ाई कई बार सामने आ चुकी है। दूसरी तरफ स्वामी नेतृत्व से अपने असंतोष को लेकर शिकायत भी करते रहे। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य दिल थामकर साढ़े चार साल मंत्री तो बने रहे लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भाजपा को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है।

भाजपा में वही टिकेगा जो काम करेगा की थ्योरी भगदड़ के लिए जिम्मेदार

असंतोष का दूसरा कारण यह है कि नवंबर 2021 में यह खबर आई थी कि इस बार भारतीय जनता पार्टी 100 से ज्यादा विधायकों का टिकट काटने जा रही है। इस नीति से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी पहले से ही असहमत हैं। ऐसे नेताओं से कहा गया कि भाजपा की नीतियां दूसरी सियासी पार्टियों से अलग है। भाजपा में वही टिकेगा जो काम करेगा। पार्टी के जिन विधायकों ने काम नहीं किया है, उन्हें दोबारा टिकट मिलने की संभावना कम है। मीडिया में इस तरह की खबरें आने के बाद से भाजपा के विधायकों में भगदड़ की स्थिति पैदा हुई है। कई विधायक जिन्हें पता चल गया है कि इस बार उन्हें टिकट नहीं मिलेगा वह अपनी जमीन दूसरी जगह तलाश रहे हैं।

भाजपा में भगदड़ मचने से पहले सपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि कई भाजपा के मंत्री और विधायक पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं। चुनाव नजदीक आते ही एक-एक करके सभी पार्टी छोड़ देंगे। अब ठीक वही हो रहा है, जो उन्होंने दावा किया था।

सपा में क्यों जा रहे नेता?

स्वामी के साथ व उनसे पहले भाजपा को छोड़ने वाले नेताओं का सपा में जाने के पीछे मुख्य वजह इस बार का चुनाव भाजपा और सपा के बीच दिखाई दे रहा है। ऐसे में हर नेता अपना राजनीतिक लाभ लेने के लिए ऐसा कर रहा है। फिर सपा ने इस बार चुनाव में एमवाई फैक्टर यानी मुस्लिम और यादव के फार्मूले को किनारे लगाकर भाजपा की रणनीति अपनाई है। 2017 चुनाव में भाजपा ने गैर यादव ओबीसी वोटर्स को केशव प्रसाद मौर्य के जरिए अपने पाले में किया था। जिन क्षेत्रों में बहुजन समाज पार्टी का प्रत्याशी मजबूत नहीं था, वहां दलित वोटर्स ने भी भाजपा का ही साथ दिया। इस बार समाजवादी पार्टी यही करने की कोशिश कर रही है। सपा के लिए यादव वोटर्स पक्के माने जाते हैं। ऐसे में अब उनका फोकस गैर यादव और ब्राह्मण वोटर्स पर है।

इन विधायकों ने अब तक छोड़ी पार्टी

1. बदायूं जिले के बिल्सी से भाजपा विधायक राधा कृष्ण शर्मा 2. सीतापुर से बीजेपी विधायक राकेश राठौर, 3. बहराइच के नानपारा से विधायक माधुरी वर्मा 4. संतकबीर नगर से भाजपा विधायक जय चौबे 5. योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य 6. भगवती सागर बिल्हौर कानपुर से विधायक 7. बांदा के तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बृजेश कुमार प्रजापति 8. शाहजहांपुर के तिलहर से विधायक रोशन लाल वर्मा 8. औरैया के विधुना विधानसभा सीट से विधायक विनय शाक्य, 9. भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना 10. मऊ की बधुबन सीट से विधायक और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान 11. शिकोहाबाद से भाजपा विधायक मुकेश वर्मा, 12. योगी सरकार में आयुष मंत्री रहे धर्मपाल सिंह सैनी 13 . भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता जय प्रकाश पांडे 14. भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री अशोक कुमार वर्मा "गोपार" 15. भाजपा के टिकट पर प्रयागराज से चुनाव लड़ चुके शशांक त्रिपाठी 16. भाजपा के पूर्व एमएलसी कांति सिंह, 17. प्रतापगढ़ से भाजपा के पूर्व विधायक ब्रजेश मिश्रा 18. रमाकान्त यादव पूर्व सांसद आजमगढ़ 19. पूर्व मंत्री राकेश त्यागी बुलंदशहर 20. जिला पंचायत सदस्य, आगरा हेमंत निषाद।

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