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Uttarpradesh Election : शिवपाल यादव ने फिर जताई सपा से गठबंधन की इच्छा, लेकिन टीपू नहीं दे रहे भाव

Janjwar Desk
14 Oct 2021 6:29 AM GMT
Uttarpradesh Election : शिवपाल यादव ने फिर जताई सपा से गठबंधन की इच्छा, लेकिन टीपू नहीं दे रहे भाव
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(शिवपाल यादव के चुनावी गठबंधन के ऑफरों को अखिलेश यादव कोई भाव नहीं दे रहे) file pic.

Uttarpradesh Election : एक तरफ प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव बारबार समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन की इच्छा जता रहे हैं तो दूसरी तरफ भतीजे अखिलेश यादव उन्हें कोई भाव नहीं दे रहे..

Uttarpradesh Election : एक तरफ प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (Pragatisheel Samajwadi Party) के अध्यक्ष शिवपाल यादव बारबार समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन की इच्छा जता रहे हैं तो दूसरी तरफ भतीजे अखिलेश यादव उन्हें कोई भाव नहीं दे रहे। यहां तक कि उनके बयानों के नोटिस भी नहीं ले रहे हैं। शिवपाल (Shivpal Yadav) पिछले कई महीनों से लगातार मीडिया में बयान दे रहे हैं कि वे समाजवादी पार्टी के साथ गठजोड़ करना चाहते हैं।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की ओर से हालांकि, इन बयानों को लेकर अबतक एक भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यानी, इशारा साफ है- 'समझने वाले समझ गए जो ना समझे वो अनाड़ी वाली' बात है। चूंकि, चाचा शिवपाल के फोन और मैसेज का जबाब भी अखिलेश की ओर से नहीं मिल रहा।

यह बात खुद शिवपाल यादव ने मीडिया को बताई थी। इस बीच गठबंधन (Gathbandhan) के लिए शिवपाल यादव की ओर से दी गई 11 अक्टूबर की डेडलाइन भी खत्म हो चुकी है।

जानकार बताते हैं कि अखिलेश यादव साफ तौर पर अपना चुनावी ऐक्शन प्लान (Election Action Plan) बना चुके हैं और उनके प्लान में शिवपाल और उनकी पार्टी की कोई जगह नहीं दिख रही। वे अपने रास्ते पर चल पड़े हैं। वहीं, शिवपाल भी समझ रहे हैं कि चुनावी समर में जीत हासिल करना उनके अकेले के वश का नहीं। समाजवादी पार्टी के बिना उनकी पार्टी चुनावों में कुछ खास नहीं कर पाएगी। लिहाजा, वे गठबंधन की लगातार कोशिशें कर रहे हैं।

अभी हाल ही में शिवपाल यादव ने कहा कि उन्होंने सपा से गठबंधन के लिए पूरा प्रयास कर लिया है और अभी भी अखिलेश के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा अब निर्णय सपा प्रमुख को करना है। शिवपाल यादव ने यादव परिवार में समझौते को लेकर पेशकश भी की थी।

साथ ही शिवपाल यादव करीब करीब हर मंच पर कहते रहे हैं कि वह समाजवादी पार्टी से गठबंधन करना चाहते हैं, लेकिन अखिलेश यादव की ओर से बात अटकी है।

पिछले दिनों शिवपाल यादव ने साफ तौर पर कहा कि सपा के साथ गठबंधन करने के लिए उनकी पार्टी प्रसपा अब सपा के जवाब का इंतजार कर रही है। उन्होंने ये भी कहा था कि अगर 11 अक्टूबर तक अखिलेश यादव का कोई जवाब नहीं मिलेगा तो फिर अपने कार्यक्रमों को वो आगे बढ़ाएंगे। शिवपाल यादव ने कहा कि वह चाहते हैं कि समझौता हो तो अच्छा रहेगा नहीं तो प्रसपा विधानसभा की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।

वहीं, पिछले 7 अक्टूबर को शिवपाल ने कहा कि आज मैंने अखिलेश को फोन और मैसेज किया था कि बीजेपी (BJP) को हराने के लिए बात करना जरूरी है, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। शिवपाल ने कहा कि बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए सभी को एकजुट होने की जरूरत है।

शिवपाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष उनके कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "पांडवों ने केवल पांच गांव मांगे थे और कौरवों को पूरा राज्य दे दिया था। इसी तरह, मैंने सिर्फ सम्मान मांगा था, लेकिन कुछ लोग इसके लिए भी तैयार नहीं हैं।"

उसी दिन शिवपाल ने फोन और मैसेज का जबाब न मिलने की बात भी स्वीकार की थी। शिवपाल ने कहा, "मैंने बहुत कुछ हासिल किया है, मैं मंत्री भी रहा हूं और अब मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन गया हूं। मैंने 22 नवंबर, 2020 को यहां तक कह दिया था कि अगर इच्छा रही तो हम चुनाव भी नहीं लड़ेंगे। यहां तक कि आज मैंने उन्हें (अखिलेश) फोन और मैसेज किया था कि बीजेपी को हराने के लिए बात करना जरूरी है, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।"

उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए सभी को एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हालांकि नेताजी मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते थे कि मैं एसपी छोड़ दूं, लेकिन मैं एसपी से अलग हो गया। मैंने पहले भी कहा था कि अगर सभी एकजुट हो गए तो अखिलेश मुख्यमंत्री बनेंगे।"

उन्होंने कहा कि सपा से गठबंधन नहीं होता तो आगे की रणनीति तय करेंगे और समान विचारधारा वाली पार्टियों से गठबंधन करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आ चुका है ऐसे में समान विचारधारा वाली पार्टियों के बड़े नेताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है। असदुद्दीन ओवैसी को लेकर उन्होंने कहा कि वह बड़े व सेकुलर नेता हैं, लेकिन गठबंधन के बारे में अभी कुछ कहना ठीक नहीं है।

इस बीच दोनों ओर से, मतलब चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अखिलेश यादव द्वारा अपनी अलग - अलग यात्राएं निकाली गई हैं। 12 अक्टूबर से दोनों की यात्राएं शुरू हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) यात्रा पर निकल चुके हैं। कानपुर से शुरू हो रहे इस यात्रा का मकसद है कि दो दिन में चार जिलों के लोगों के बीच पहुंचा जाए।

एक तरफ भतीजे अखिलेश की यात्रा 12 अक्टूबर से शुरू हुई है वहीं दूसरी ओर चाचा शिवपाल यादव भी समाजिक परिवर्तन रथ यात्रा पर इसी दिन से निकले हैं। शिवपास यादव की यात्रा मथुरा से शुरू हो रही है और बृज क्षेत्र से होते हुए आगरा, इटावा, औरेया, कानपुर देहात, झांसी, महोबा फतेहपुर होते हुए प्रयागराज जाएगी।

अभी हाल ही में शिवपाल यादव ने इटावा में बयान दिया कि उनकी तरफ से समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के तमाम प्रयास कर लिए गए हैं और अब उन्हें समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के जवाब का इंतजार है।

यानी एक तरफ शिवपाल यादव अखिलेश यादव के साथ जाने को आतुर दिख रहे हैं वहीं दूसरी तरफ एक और विकल्प भी उन्होंने खोल कर रखा है। इस विकल्प में उनके साथ वो लोग हैं जो लगातार अखिलेश यादव पर निशाना साध रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में 2022 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में हर दिन नए सियासी समीकरण देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव के घर पर AIMIM प्रमुख असउद्दीन ओवैसी, भागीदारी संकल्प मोर्चा के ओमप्रकाश राजभर और भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद की जो बैठक हुई उसके बाद सियासी गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं।

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